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भारत में बदल रहा इंफ्रा निवेश का ट्रेंड, सड़क और ग्रीन एनर्जी एसेट्स पर बढ़ा दांव: रिपोर्ट

Equirus के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में पूंजी बाजार से जुटाए गए फंड का सबसे बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी, InvITs और EPC कंपनियों के पास गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 hours ago

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का रुख तेजी से बदल रहा है. अब निवेशक नए प्रोजेक्ट्स की बजाय ऑपरेशनल रोड एसेट्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. निवेश बैंकिंग और रिसर्च फर्म Equirus की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाईवे निर्माण की रफ्तार धीमी पड़ने और ऊर्जा परिवर्तन पर बढ़ते खर्च के बीच निवेशक स्थिर रिटर्न देने वाली परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

इंफ्रा सेक्टर में बड़े सौदों का दबदबा

रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो वित्त वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी और मर्जर एंड एक्विजिशन गतिविधियों पर रिन्यूएबल और ट्रांसपोर्ट एसेट्स का दबदबा रहा. इस दौरान कई अरब डॉलर के सौदों ने बाजार की तस्वीर बदल दी. मार्च 2025 में जेएसडब्ल्यू एनर्जी (JSW Energy) ने केएसके महानदी पावर कंपनी (KSK Mahanadi Power Company) का 1.86 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था. वहीं फरवरी 2025 में ओएनजीसी एनटीपीसी ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड (ONGC NTPC Green Pvt Ltd) ने अयाना रिन्यूएबल पावर (Ayana Renewable Power) को 2.3 अरब डॉलर में खरीदा.

सड़क परियोजनाओं में भी बढ़ी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी

ऑपरेशनल रोड एसेट्स भी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं. अप्रैल 2026 में विंची हाईवेज (Vinci Highways) ने लगभग 1.7 अरब डॉलर में सेफवे कंसेशंस (Safeway Concessions) के अधिग्रहण पर सहमति जताई थी. इसके अलावा एक्टिस ग्रुप (Actis Group) ने कालीकट एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड (Calicut Expressway Pvt Ltd) और विंध्याचल एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड (Vindhyachal Expressway Pvt Ltd) समेत कई सड़क परियोजनाओं का अधिग्रहण किया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाइब्रिड एन्युटी और टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल के तहत आने वाली ऑपरेशनल हाईवे परिसंपत्तियां निवेशकों को इसलिए पसंद आ रही हैं क्योंकि इनमें ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स की तुलना में कम जोखिम और ज्यादा स्थिर रिटर्न मिलता है.

सात साल के निचले स्तर पर पहुंचा हाईवे निर्माण

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हाईवे निर्माण गतिविधियां धीमी हो रही हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में हाईवे निर्माण और नए प्रोजेक्ट अवॉर्ड्स सात साल के निचले स्तर पर पहुंच गए. इस दौरान 10,000 किलोमीटर से कम हाईवे बनाए गए, जबकि करीब 7,000 किलोमीटर नई परियोजनाओं को मंजूरी मिली.

टोल कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड

हाईवे निर्माण की रफ्तार धीमी होने के बावजूद टोल कलेक्शन में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. FY26 में टोल कलेक्शन सालाना आधार पर 14 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 82,900 करोड़ रुपये पहुंच गया.

इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह टोल रोड नेटवर्क का विस्तार और फास्टैग (FASTag) के बढ़ते इस्तेमाल को माना जा रहा है. भारत का टोल रोड नेटवर्क FY19 के 26,067 किलोमीटर से बढ़कर नवंबर 2025 तक 55,812 किलोमीटर हो गया.

डेवलपर्स पुराने एसेट्स बेचकर जुटा रहे पूंजी

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बदलावों के चलते डेवलपर्स अब परिपक्व सड़क परिसंपत्तियों को मोनेटाइज कर नई परियोजनाओं में निवेश या कर्ज घटाने की रणनीति अपना रहे हैं.

रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश की रफ्तार बरकरार

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भी निवेश का उत्साह बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने सिर्फ 14 महीनों में 50 गीगावॉट सोलर क्षमता जोड़ ली है. नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (National Solar Energy Federation of India) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 तक भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बन सकता है.

ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बना बड़ी चुनौती

हालांकि तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल सेक्टर के सामने ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार अकेले राजस्थान में करीब 60 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे भारत की ग्रिड विस्तार योजनाओं पर दबाव बढ़ रहा है.

भारत के ऊर्जा बदलाव में गैस सेक्टर की कमजोर कड़ी

रिपोर्ट में भारत के प्राकृतिक गैस सेक्टर को ऊर्जा परिवर्तन की “मिसिंग मिडिल” बताया गया है. भारत के कुल ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी केवल 7 फीसदी है, जबकि वैश्विक औसत करीब 24 फीसदी है. सीमित पाइपलाइन नेटवर्क, एलएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर (LNG Infrastructure) और लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स की कमी इसके पीछे बड़ी वजह मानी गई है.

रिपोर्ट का अनुमान है कि FY40 तक भारत में गैस की मांग लगभग चार गुना तक बढ़ सकती है, जिससे सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव और बढ़ेगा.

इंफ्रा सेक्टर में पूंजी बाजार से जुटाई जा रही बड़ी रकम

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आईपीओ (IPO), क्यूआईपी (QIP) और इनविट (InvIT) के जरिए फंड जुटाने की गतिविधियां भी FY26 में मजबूत बनी रहीं. इस दौरान राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (Raajmarg Infra Investment Trust) ने 60,000 मिलियन रुपये और क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस (Clean Max Enviro Energy Solutions) ने 30,799 मिलियन रुपये जुटाए.

इक्विरस (Equirus) के मुताबिक 2020 से 2025 के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में पूंजी बाजार से जुटाए गए फंड का सबसे बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी, इनविट्स (InvITs) और ईपीसी कंपनियों (EPC Companies) के पास गया.
 


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