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2025 में अफॉर्डेबल हाउसिंग संकट: निर्माण लागत में 40% की वृद्धि, आपूर्ति घटकर 12% तक पहुंची

भारत के आवास क्षेत्र, विशेषकर अफॉर्डेबल सेगमेंट में, निर्माण लागतों में बढ़ोत्तरी के चलते एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

देश में सस्ती आवास परियोजनाओं के लिए हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं. पिछले पाँच वर्षों में आवास निर्माण की लागत में लगभग 40% की वृद्धि हुई है, जिससे सस्ती आवास परियोजनाओं की हिस्सेदारी 2019 में 40% से घटकर 2025 की पहली छमाही में मात्र 12% रह गई है. यह जानकारी ANAROCK ग्रुप की एक ताजा रिपोर्ट में सामने आई है.  

Anarock Group के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और रिसर्च और एडवायजरी प्रमुख डॉ. प्रकाश ठाकुर ने कहा "सस्ती आवास विकासक सबसे बड़े लागत-संबंधी बाधाओं का सामना करते हैं, क्योंकि उनके खरीदार अत्यधिक मूल्य-संवेदनशील होते हैं, यहां तक कि मामूली लागत वृद्धि भी बिक्री में रुकावट का कारण बन सकती है,"

महानगरों में सबसे अधिक निर्माण लागत

रिपोर्ट के अनुसार मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में निर्माण लागत सबसे ज्यादा है. मुंबई में लक्जरी हाउसिंग की लागत 5,000 रुपये  प्रति वर्ग फुट से भी अधिक हो गई है, जबकि अफॉर्डेबल हाउसिंग की लागत 1,500–2,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच चुकी है.

शहर                अफॉर्डेबल हाउसिंग    मिड-रेंज/प्रीमियम   लक्जरी हाउसिंग 
मुंबई                ₹2,500–₹4,500      ₹3,500–₹5,000      ₹5,000+         
दिल्ली NCR      ₹2,000–₹3,500      ₹3,000–₹4,500      ₹4,500+         
बेंगलुरु              ₹1,800–₹3,200      ₹2,800–₹4,000      ₹4,500+         
चेन्नई                 ₹1,700–₹2,800      ₹2,500–₹3,800      ₹4,200+         
हैदराबाद           ₹1,600–₹2,700      ₹2,400–₹3,500      ₹4,000+         
पुणे                   ₹1,800–₹3,000      ₹2,400–₹4,000      ₹4,500+         
कोलकाता          ₹1,500–₹2,500      ₹2,200–₹3,500      ₹4,000+         

लागत वृद्धि के कारण

1. कच्चा माल : सीमेंट की कीमतें एक साल में 15% गिरी हैं, लेकिन पांच सालों में इसमें 30–57% तक की वृद्धि देखी गई है. कॉपर और एल्युमिनियम की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है.

2. श्रम लागत : श्रमिकों की मजदूरी में पिछले साल 25% और 2019 से अब तक 150% की वृद्धि हुई है.

3. अन्य लागतें : अनुमोदनों, लॉजिस्टिक्स, और अनुपालन की लागतें भी लगातार बढ़ रही हैं.

लागत में वृद्धि का असर

लागत में वृद्धि होने से घर खरीदार और डेवलपर दोनों संकट में हैं. अफॉर्डेबल सेगमेंट के खरीदारों पर 500–800 रुपये प्रति वर्ग फुट की वृद्धि भी भारी पड़ सकती है. कुल 5–6% लागत वृद्धि सीधे कीमतों में झलकती है. इसके अलावा छोटे डेवलपर्स लाभांश की कमी के चलते नई परियोजनाएं शुरू करने से हिचक रहे हैं, जबकि बड़े ब्रांड लागत को समायोजित करने में सक्षम हैं.

सेगमेंट विश्लेषण

अफॉर्डेबल हाउसिंग : सबसे अधिक प्रभावित, क्योंकि इस सेगमेंट में खरीदार बेहद मूल्य-संवेदनशील होते हैं. 2019 में 38% बिक्री से घटकर H1 2025 में 18% तक आ गई है.

मिड-रेंज : सीमित लचीलापन है, लेकिन मुद्रास्फीति और नीति बदलावों से यह वर्ग भी प्रभावित हो रहा है.

लक्जरी सेगमेंट : इस वर्ग के खरीदारों पर लागत वृद्धि का असर न्यूनतम है, क्योंकि उनका फोकस विशेषताओं और ब्रांड वैल्यू पर होता है.

टैरिफ और जीएसटी का प्रभाव

25% टैरिफ लागू होने पर निर्माण लागत में 1.5–2.5% की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है. 50% टैरिफ लागत को 5% या उससे अधिक तक बढ़ा सकता है, जिससे आयात-निर्भर परियोजनाएं प्रभावित होंगी.संभावित राहत - जीएसटी सुधार: सरकार द्वारा प्रस्तावित जीएसटी संरचना में सीमेंट पर कर 28% से घटाकर 18% करने की योजना है. इससे निर्माण लागत में 2–4% तक की कमी आ सकती है. मिड-सेगमेंट में 2–3% तक और लक्ज़री में न्यूनतम लाभ की संभावना है.


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