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DLF ने साउथ मुंबई प्रोजेक्ट से नाम वापस लिया, हबटाउन से ₹800 करोड़ में हुआ समझौता

तुलसीवाड़ी अर्बन रिन्युअल प्रोजेक्ट से जुड़ा वर्षों पुराना विवाद अब समाप्त हो गया. DLF ने इस प्रोजेक्ट में अपनी हिस्सेदारी छोड़ने के साथ सभी कानूनी कार्रवाइयों को भी वापस ले लिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

साउथ मुंबई के तारदेव इलाके में स्थित तुलसीवाड़ी अर्बन रिन्युअल प्रोजेक्ट को लेकर चल रहा वर्षों पुराना विवाद आखिरकार खत्म हो गया है. देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी DLF ने इस प्रोजेक्ट से औपचारिक रूप से नाम वापस ले लिया है. हबटाउन और DLF के बीच हुए 800 करोड़ रुपये के समझौते के बाद प्रोजेक्ट को अब नई गति मिलने की उम्मीद है.

DLF ने छोड़ी हिस्सेदारी, कानूनी कार्रवाई पर भी विराम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, DLF ने पुनर्विकास योजना से पूर्ण रूप से अपना हाथ खींच लिया है और हबटाउन, इसकी सहयोगी कंपनी ट्वेंटी-फाइव डाउनटाउन रियल्टी (पूर्व में जॉयस हाउसिंग), पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस तथा अन्य पक्षों के खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाइयों को वापस ले लिया है.

800 करोड़ रुपये का भुगतान दो वर्षों में होगा पूरा
समझौते की शर्तों के अनुसार, हबटाउन समर्थित ट्वेंटी-फाइव डाउनटाउन, DLF को दो वर्षों में कुल 800 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी. इसमें से पहली किस्त के रूप में 100 करोड़ रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं. शेष राशि के लिए हबटाउन ने आगामी विकास परियोजना में 1.5 लाख वर्गफुट की बिक्री योग्य क्षेत्र को DLF के पक्ष में बंधक रखा है. यह बंधक दस्तावेज पिछले सप्ताह औपचारिक रूप से पंजीकृत किए गए.

2021 में हुआ था ऋण डिफॉल्ट
यह विवाद वर्ष 2021 में तब शुरू हुआ था, जब प्रोजेक्ट ने पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस से लिए गए 900 करोड़ रुपये के ऋण का भुगतान करने में चूक की. इसके बाद गिरवी रखे गए शेयरों को बेच दिया गया, जो पहले DLF और उसके पूर्व सहयोगी चिन्शा प्रॉपर्टी (शापूरजी पालोनजी ग्रुप की एक इकाई) के पास थे. ये शेयर बाद में ओमकारा एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा खरीदे गए. जहां चिन्शा ने प्रोजेक्ट से बाहर निकलते हुए अपने सभी आपत्तियों को वापस ले लिया, वहीं DLF ने शेयर ट्रांसफर का विरोध करते हुए अपने शेयरधारक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया था.

प्रोजेक्ट को मिला नया जीवन
DLF अब इस प्रोजेक्ट की विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) कंपनी में अपनी 37.5% हिस्सेदारी भी छोड़ चुका है, जिसे पहले चिन्शा और हबटाउन के साथ मिलकर बनाया गया था. यह SPV अब तीन आवासीय टावरों को रेरा में रजिस्टर कर चुका है और ओकट्री कैपिटल से वित्त पोषण प्राप्त कर चुका है. DLF की पूर्ण वापसी और कानूनी बाधाओं के हटने के बाद, साउथ मुंबई का यह बहुचर्चित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट अब तेजी से आगे बढ़ने की राह पर है.
 


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