होम / जनता की बात / Chandrayaan-3 की सफलता के बाद दो हफ्तों में सूर्य पर जाएगा भारत?
Chandrayaan-3 की सफलता के बाद दो हफ्तों में सूर्य पर जाएगा भारत?
चांद पर तिरंगा लहराने के बाद भारत सूरज के बारे में ज्यादा जानने के लिए मिशन आदित्य L-1 (Aditya L-1) लॉन्च करने जा रहा है.
पवन कुमार मिश्रा 2 years ago
भारत में चांद और सूरज को भगवान का दर्जा दिया जाता है. हाल ही में भारत ने सफलतापूर्वक चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) मिशन को अंजाम दिया है और इस वक्त पूरी दुनिया भारत का लोहा मान रही है. चांद के दक्षिणी पोल पर लैंड करने वाला भारत पहला देश बन गया है. इस बीच भारत द्वारा अपने अगले मिशन की तैयारी भी शुरू की जा चुकी है.
क्या है नया मिशन?
भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) द्वारा अगले दो हफ्तों में ही नया मिशन लॉन्च किया जाना है और अबकी बार भारत चांद की ठंडी सतह नहीं बल्कि सूरज की गर्मी की तरफ बढ़ने जा रहा है. चांद पर तिरंगा लहराने के बाद भारत अब सूरज के बारे में ज्यादा जानने के लिए अपना नया मिशन आदित्य L-1 (Aditya L-1) लॉन्च करने जा रहा है. यह पहला मिशन होगा जिसमें एक भारतीय स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी पर भेजा जाएगा और इसे सूरज से 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर एक पॉइंट पर स्थिर कर दिया जाएगा . इस पॉइंट को लंग्रंगियन (Langrangian Point) के नाम से भी जाना जाता है.
2023 में इतने मिशन कर चुका है इसरो
विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के डायरेक्टर A Rajarajan ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया है कि सतीश धवन स्पेस सेंटर में आदित्य L-1 को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. स्पेसक्राफ्ट को लेकर फाइनल चेकिंग की जा रही है और इस मिशन के लिए PSLV रॉकेट (मिशन संख्या C57) को भी तैयार किया जा रहा है. आदित्य L-1 को सितंबर के पहले हफ्ते में ही लॉन्च किया जाएगा. अभी तक 2023 में ISRO द्वारा 6 मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं.
क्यों महत्त्वपूर्ण है आदित्य L-1 (Adtiya L-1) मिशन?
हिंदी भाषा में सूर्य के पर्यायवाचियों में से एक होता है आदित्य, और इस मिशन को भी वही नाम दिया गया है. आदित्य L-1 भारत की तरफ से पहला ऑब्जर्वेटरी-क्लास मिशन है. ऑब्जर्वेटरी क्लास में ऐसे मिशन रखे जाते हैं जिनको लॉन्च करने का मकसद ही किसी ग्रह को बस स्टडी करना होता है. इस स्पेसक्राफ्ट को सूर्य और पृथ्वी के सिस्टम के बीच हेलो ऑब्जर्वेटरी में पहले Lagrange पॉइंट, L-1 के पास प्लेस किया जाएगा. इस पॉइंट पर एक सैटेलाईट के होने का फायदा ये होगा कि ग्रहण की स्थिति में भी सूर्य पर नजर रखी जा सकती है और सूर्य की एक्टिविटी पर भी ध्यान रखा जा सकता है. आदित्य L-1 में में 7 विभिन्न पेलोड (Payload) होंगे जो Photosphere, Chromosphere और सूर्य की बाहरी परत (The Corona) पर प्रमुख रूप से ध्यान देगा और इसके लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पार्टिकल डिटेक्टर्स का इस्तेमाल किया जाएगा.
यह भी पढ़ें: Softbank बेच देगा Zomato के शेयर, जानिए क्या है पूरा मामला?
टैग्स