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शशि शेखर वेम्पति बने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के नए अध्यक्ष
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वेम्पति ने हाल ही में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के बोर्ड से इस्तीफा दिया है. वे 2024 से इस संस्था में प्रोफेशनल डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
प्रसार भारती के पूर्ण सीईओ और पद्म श्री से सम्मानित शशि शेखर वेम्पति को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति देश की शीर्ष फिल्म प्रमाणन संस्था में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन मानी जा रही है.
वेम्पति ने यह जिम्मेदारी प्रसून जोशी से संभाली है, जिन्हें हाल ही में प्रसार भारती का चेयरमैन नियुक्त किया गया था.
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वेम्पति ने हाल ही में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के बोर्ड से इस्तीफा दिया है. वे 2024 से इस संस्था में प्रोफेशनल डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे. अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए वेम्पति ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया.
विशेषज्ञों का मानना है कि CBFC में वेम्पति की नियुक्ति से प्रमाणन प्रक्रिया में नीति, तकनीक और मीडिया का अनुभव जुड़ जाएगा. यह उस समय खास अहमियत रखता है जब फिल्म और डिजिटल कंटेंट के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच कंटेंट मानकों को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं.
मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, BARC से CBFC तक वेम्पति का यह बदलाव दर्शक मापन से कंटेंट नियमन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है. जहां BARC टीवी दर्शकों के आंकड़ों के जरिए विज्ञापन और प्रोग्रामिंग रणनीतियों को प्रभावित करता है, वहीं CBFC भारत में फिल्मों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित करने वाली प्रमुख वैधानिक संस्था है.
वेम्पति का पेशेवर सफर दो दशकों से अधिक का रहा है, जिसमें तकनीक, प्रशासन और मीडिया के क्षेत्र शामिल हैं. वे IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने इंफोसिस में 16 वर्षों से अधिक समय तक प्रोडक्ट रणनीति और डिजिटल इनोवेशन पर काम किया. इसके बाद 2013 में उन्होंने नीति-आधारित मीडिया प्लेटफॉर्म NitiCentral के CEO के रूप में कार्यभार संभाला. बाद में वे प्रसार भारती के CEO बने, जहां उन्होंने दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो जैसे पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स के आधुनिकीकरण और डिजिटल विस्तार पर काम किया.
वेम्पति नीति और शैक्षणिक क्षेत्रों में भी सक्रिय रहे हैं. वे DeepTech for Bharat Foundation के सह-संस्थापक हैं और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) की सोसाइटी के सदस्य होने के साथ-साथ साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन भी हैं.
उनका नियामकीय अनुभव 2020 के टीवी रेटिंग विवाद के दौरान भी सामने आया, जब उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति का नेतृत्व किया था. इस समिति का उद्देश्य TRP में हेरफेर के आरोपों के बाद पारदर्शिता बढ़ाना और विश्वसनीयता बहाल करना था.
BARC से उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब यह संस्था टीवी इंडस्ट्री में विज्ञापन निवेश से जुड़े अहम डेटा प्रदान करती है. हालांकि उनका कार्यकाल छोटा रहा, लेकिन यह सुधार और समीक्षा के दौर के साथ जुड़ा रहा.
CBFC में वेम्पति को अब अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना होगा. यह संस्था अक्सर रचनात्मक स्वतंत्रता, प्रमाणन मानकों और नियमन बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों के केंद्र में रहती है. OTT प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और बदलती दर्शक पसंद के चलते CBFC की भूमिका पर और अधिक ध्यान दिया जा रहा है.
फिल्म और मीडिया उद्योग के सभी हितधारक इस बात पर नजर रखेंगे कि वेम्पति प्रमाणन मानकों को कैसे लागू करते हैं, खासकर ऐसे समय में जब नए कंटेंट फॉर्मेट, वितरण माध्यम और वैश्विक प्रभाव तेजी से बढ़ रहे हैं.
उनकी नियुक्ति यह भी दर्शाती है कि सरकार प्रमुख मीडिया संस्थानों में बहु-क्षेत्रीय अनुभव रखने वाले तकनीकी-प्रशासनिक विशेषज्ञों को प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि भारत का कंटेंट इकोसिस्टम लगातार विस्तार और जटिलता की ओर बढ़ रहा है.
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