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नीति आयोग में शामिल हुईं अरुणाचल प्रदेश की प्रमुख शिक्षाविद् जोरम अनिया
जोरम अनिया न्यीशी समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की. साथ ही वह अरुणाचल प्रदेश की पहली विद्वान हैं जिन्होंने हिंदी विषय में डॉक्टरेट प्राप्त किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
देश के शीर्ष नीति संस्थान नीति आयोग में एक ऐतिहासिक नियुक्ति के तहत अरुणाचल प्रदेश की शिक्षाविद् जोरम अनिया को पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है. यह कदम राष्ट्रीय नीति निर्माण में आदिवासी और पूर्वोत्तर भारत के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
आदिवासी समुदाय से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
जोरम अनिया अरुणाचल प्रदेश से आने वाली एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् हैं और डेरा नटुंग गवर्नमेंट कॉलेज में हिंदी विभाग की प्रमुख हैं. उनकी नियुक्ति न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि देश के नीति तंत्र में क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विविधता को शामिल करने की दिशा में बड़ा संकेत भी है.
पहली न्यीशी महिला PhD और हिंदी की विदुषी
जोरम अनिया न्यीशी समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की. साथ ही वह अरुणाचल प्रदेश की पहली विद्वान हैं जिन्होंने हिंदी विषय में डॉक्टरेट प्राप्त किया. उनका अकादमिक कार्य साहित्य, संस्कृति और विशेष रूप से आदिवासी ज्ञान पर आधारित रहा है.
शोध, लेखन और नीति से जुड़ा लंबा अनुभव
18 वर्षों से अधिक के अपने करियर में अनिया ने शिक्षण, शोध और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है. वह अरुणाचल प्रदेश प्राइवेट एजुकेशनल रेगुलेटरी कमीशन की सदस्य भी हैं. उन्होंने न्यीशी साहित्य और संस्कृति पर कई किताबें लिखी और संपादित की हैं, साथ ही अनेक शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं.
नीति आयोग में बड़ा पुनर्गठन
यह नियुक्ति उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है, जिसकी घोषणा 24 अप्रैल को की गई थी. 2015 में प्लानिंग कमीशन की जगह बने नीति आयोग में यह पहला बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है. इस दौरान अशोक लाहिरी को उपाध्यक्ष बनाया गया, जिन्होंने सुमन बेरी की जगह ली. इसके अलावा अभय करमदिकर और एम श्रीनिवास को भी पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया.
रणनीतिक समय पर अहम नियुक्ति
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब चाइना लगातार अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिश करता रहा है. भारत ने इन दावों को सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है. ऐसे में अनिया की नियुक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर पूर्वोत्तर की मजबूत भागीदारी के रूप में भी देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोरम अनिया को बधाई देते हुए कहा कि उनका अनुभव और समझ नीति निर्माण को नई दिशा देगा. उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों के योगदान से विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और विकास को बढ़ावा मिलेगा.
राष्ट्रीय नीति में बढ़ेगा पूर्वोत्तर और आदिवासी प्रतिनिधित्व
जोरम अनिया की नियुक्ति को न केवल उनके अकादमिक और सांस्कृतिक योगदान की पहचान माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और आदिवासी समुदायों की आवाज को राष्ट्रीय नीति निर्माण में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है.
जोरम अनिया का नीति आयोग में शामिल होना देश के नीति ढांचे को और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है. इससे जमीनी और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को राष्ट्रीय रणनीतियों में शामिल करने की उम्मीद बढ़ी है.
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