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नीति आयोग में बड़ा बदलाव, अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी बने नए उपाध्यक्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहिड़ी और अन्य नए सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग भारत की नीति निर्माण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सहकारी संघवाद, सुधारों और आम लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में काम करता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख नीति थिंक टैंक नीति आयोग का पुनर्गठन करते हुए वरिष्ठ अर्थशास्त्री और भाजपा विधायक अशोक कुमार लाहिड़ी को नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. इस फैसले को संस्थागत स्तर पर बड़े बदलाव और नई नीति दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
पीएम मोदी ने दी बधाई, बताया “नीति निर्माण का अहम स्तंभ”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहिड़ी और अन्य नए सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग भारत की नीति निर्माण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सहकारी संघवाद, सुधारों और आम लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में काम करता है. उन्होंने एक मुलाकात के दौरान लाहिड़ी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका अनुभव भारत को “विकसित भारत” बनाने की दिशा में सुधारों को और मजबूती देगा.
नए पूर्णकालिक सदस्यों की भी नियुक्ति
सरकार ने आयोग में पांच नए पूर्णकालिक सदस्यों की भी नियुक्ति की है. इनमें राजीव गौबा, के. वी. राजू, गोवर्धन दास, अभय करंदीकर और एम. श्रीनिवास शामिल हैं.
कौन हैं अशोक कुमार लाहिड़ी
अशोक कुमार लाहिड़ी पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से भाजपा विधायक हैं और 2026 के चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. वे अर्थशास्त्र, नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं. वे अक्टूबर 2002 से जून 2007 तक भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं. इस दौरान उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह दोनों सरकारों के साथ काम किया. इसके अलावा वे 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं.
अंतरराष्ट्रीय और शैक्षणिक अनुभव
लाहिड़ी का करियर अकादमिक और वैश्विक संस्थानों से भी जुड़ा रहा है. उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के निदेशक भी रह चुके हैं और बंधन बैंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन भी रहे हैं. इसके अलावा वे एशियन डेवलपमेंट बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से 2013 में रिटायर हुए.
आर्थिक मुद्दों पर स्पष्ट राय
लाहिड़ी वित्तीय अनुशासन और राज्यों की आर्थिक स्थिति पर अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं. अपनी किताब 'India in Search of Glory' में उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र ने देश निर्माण को मजबूत किया है, लेकिन स्वतंत्रता के बाद शुरुआती दशकों में सामाजिक-आर्थिक विकास अपेक्षाकृत धीमा रहा. उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, गरीबी घटेगी, शिक्षा में सुधार होगा और शहरीकरण बढ़ेगा, वैसे-वैसे आर्थिक विकास तेज होगा.
फ्रीबी योजनाओं पर जताई चिंता
लाहिड़ी ने चुनावों से पहले घोषित की जाने वाली लोकलुभावन योजनाओं की आलोचना भी की है. उनका मानना है कि अनियंत्रित सरकारी खर्च राज्यों को वित्तीय संकट की ओर धकेल सकता है. उन्होंने राज्यों द्वारा बुनियादी सेवाओं में कम निवेश को भी एक बड़ी चुनौती बताया है.
बदलाव के दौर में नई जिम्मेदारी
यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब नीति आयोग में कई अहम बदलाव हुए हैं. सुमन बेरी पिछले चार वर्षों से उपाध्यक्ष थे, जबकि हाल ही में CEO बीवीआर सुब्रह्मण्यम पद छोड़ चुके हैं. ऐसे में लाहिड़ी की एंट्री को नीति आयोग के लिए नए दिशा-निर्देशन और मजबूती के रूप में देखा जा रहा है.
अशोक कुमार लाहिड़ी के नेतृत्व में नीति आयोग से आर्थिक सुधार, वित्तीय नीति और संस्थागत सुधारों को नई गति मिलने की उम्मीद है. सरकार के “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने में उनका अनुभव अहम भूमिका निभा सकता है.
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