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सर्विस सेक्टर में तेजी, अप्रैल में PMI 58.8 पर पहुंचा

अप्रैल में सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में उछाल का सबसे बड़ा कारण मजबूत घरेलू मांग रही. कंपनियों को नए ऑर्डर्स में तेजी देखने को मिली, जिससे कुल बिजनेस गतिविधियों में सुधार हुआ.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत के सर्विस सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत दमदार प्रदर्शन के साथ की है. अप्रैल में सर्विसेज PMI बढ़कर 58.8 पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का उच्चतम स्तर है. मजबूत घरेलू मांग, ई-कॉमर्स गतिविधियों में तेजी और नए ऑर्डर्स में सुधार ने इस वृद्धि को गति दी, जबकि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद सेक्टर में सकारात्मक रुझान कायम रहा.

घरेलू मांग बनी ग्रोथ की मुख्य ताकत

अप्रैल में सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में उछाल का सबसे बड़ा कारण मजबूत घरेलू मांग रही. कंपनियों को नए ऑर्डर्स में तेजी देखने को मिली, जिससे कुल बिजनेस गतिविधियों में सुधार हुआ. ई-कॉमर्स और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सेवाओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण निर्यात मांग कमजोर रही, लेकिन घरेलू बाजार ने इस कमी की भरपाई कर दी.

निर्यात में नरमी, वैश्विक परिस्थितियों का असर

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले नए ऑर्डर्स में गिरावट दर्ज की गई. न्यू एक्सपोर्ट बिजनेस इंडेक्स एक साल से अधिक समय के दूसरे सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. कंपनियों ने इसके पीछे पश्चिम एशिया संघर्ष और कमजोर इनबाउंड टूरिज्म को प्रमुख कारण बताया. इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल सर्विस सेक्टर की निर्भरता घरेलू मांग पर अधिक बढ़ गई है.

लागत दबाव बरकरार, लेकिन राहत के संकेत

सर्विस सेक्टर की कंपनियों को अप्रैल में बढ़ती लागत का सामना करना पड़ा. खाद्य पदार्थों, गैस, श्रम और अन्य इनपुट की कीमतों में वृद्धि से ऑपरेटिंग खर्च बढ़ा. हालांकि, मार्च के मुकाबले इनपुट लागत महंगाई में थोड़ी कमी आई, लेकिन यह अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है.

दिलचस्प बात यह रही कि कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला. आउटपुट कीमतों में वृद्धि तीन महीनों की सबसे धीमी रही, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनियां प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन कर रही हैं.

रोजगार में सुधार, हायरिंग में तेजी

नए कारोबार में मजबूती का असर रोजगार पर भी देखने को मिला. कंपनियों ने बढ़ते काम के दबाव को संभालने के लिए शॉर्ट-टर्म और जूनियर लेवल कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाई. सर्विस सेक्टर के सभी प्रमुख क्षेत्रों में रोजगार बढ़ा, जिससे लंबित कार्यों का दबाव कुछ हद तक कम हुआ.

कारोबारी भरोसा थोड़ा कमजोर, लेकिन रुख सकारात्मक

हालांकि कंपनियां भविष्य को लेकर आशावादी बनी हुई हैं, लेकिन मार्च के मुकाबले कारोबारी भरोसे में हल्की गिरावट आई है. पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और लगातार ऊंची लागत को कंपनियां आगे के लिए प्रमुख जोखिम मान रही हैं.

कंपोजिट PMI में भी मजबूती के संकेत

सिर्फ सर्विस सेक्टर ही नहीं, बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था में भी सुधार दिखा. कंपोजिट PMI मार्च के 57.0 से बढ़कर अप्रैल में 58.2 पर पहुंच गया. यह मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों क्षेत्रों में मजबूती का संकेत देता है, जिससे निजी क्षेत्र के उत्पादन में तेज वृद्धि दर्ज हुई.

अप्रैल के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारत का सर्विस सेक्टर मजबूत घरेलू मांग के सहारे तेजी से आगे बढ़ रहा है. हालांकि वैश्विक अनिश्चितताएं और लागत दबाव चुनौतियां बने हुए हैं, फिर भी सेक्टर की बुनियाद मजबूत नजर आ रही है और आने वाले महीनों में स्थिर वृद्धि की उम्मीद बनी हुई है.


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