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सी.पी राधाकृष्णन बने देश के 15वें उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

सी.पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू होकर उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचा है. संगठन, संसद और राज्यपाल जैसे अलग-अलग दायित्वों में उनका लंबा अनुभव उन्हें नई भूमिका निभाने में मदद करेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन (C P Radhakrishnan) ने शुक्रवार यानी 12 सितंबर, 2025 को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित संक्षिप्त समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. 67 वर्षीय राधाकृष्णन ने लाल कुर्ता पहनकर ईश्वर के नाम पर अंग्रेजी में शपथ ग्रहण की. बता दें, मंगलवार को हुए चुनाव में राधाकृष्णन ने संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से हराकर जीत हासिल की. यह चुनाव तब आवश्यक हुआ जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था. धनखड़ भी इस शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहे और पद छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए.

नई जिम्मेदारी, बड़ी चुनौतियां

उपराष्ट्रपति पद संभालने के बाद राधाकृष्णन के सामने राज्यसभा के सभापति के रूप में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी. पिछले कुछ वर्षों में विपक्ष ने आसन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. इससे पहले राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे.

समारोह में दिग्गज नेता रहे मौजूद

शपथ ग्रहण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. इसके अलावा पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और वेंकैया नायडू ने भी समारोह में शिरकत की.

आरएसएस स्वयंसेवक से उपराष्ट्रपति तक

सी.पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर किशोरावस्था से ही शुरू हुआ. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जनसंघ से जुड़े. 1990 के दशक में कोयंबटूर से दो बार लोकसभा चुनाव जीतकर वे संसद पहुंचे. समर्थक उन्हें ‘तमिलनाडु का मोदी’ भी कहते हैं. हालांकि, इस सीट से बाद में उन्हें लगातार तीन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा.

राज्यपाल के रूप में अनुभव

राधाकृष्णन कई राज्यों के राज्यपाल रह चुके हैं. उन्होंने 31 जुलाई 2024 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में शपथ ली. इससे पहले वे झारखंड के राज्यपाल थे और इसी दौरान उन्हें तेलंगाना और पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया.

शैक्षणिक और संगठनात्मक पृष्ठभूमि

20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में जन्मे राधाकृष्णन बिजनेस मैनेजमेंट में स्नातक हैं. 16 वर्ष की उम्र में आरएसएस से जुड़े और 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य बने. 1996 में वे भाजपा की तमिलनाडु इकाई के सचिव बने और 1998 व 1999 में कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए. संसद में रहते हुए उन्होंने कई संसदीय समितियों में कार्य किया. 2004 से 2007 के बीच वे भाजपा तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष रहे और इसी दौरान उन्होंने 19,000 किलोमीटर लंबी, 93 दिनों तक चलने वाली रथयात्रा निकाली.

 


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