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शुभेंदु अधिकारी: ममता को दो बार हराने वाला नेता, अब मुख्यमंत्री रेस में सबसे आगे

भाजपा का 2026 में पश्चिम बंगाल में बहुमत और ममता बनर्जी पर अधकारी की दोहरी जीत ने शुभेंदु अधिकारी को राज्य में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में स्थापित किया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताशुभेंदु अधिकारी, राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों में एक केंद्रीय भूमिका निभाने वाले नेता के रूप में उभरे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दो बार हराया है, पहली बार 2021 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम में और फिर 2026 में भवानीपुर में, भारतीय जनता पार्टी द्वारा हालिया चुनावों में बहुमत हासिल करने के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभरते हुए.

2026 के परिणामों ने भाजपा के लिए एक ऐतिहासिक सफलता दर्ज की, जिसमें पार्टी ने 294 में से 206 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शासन का अंत कर दिया, जबकि TMC केवल 80 सीटों पर सिमट गई.

ममता बनर्जी के पूर्व करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर एक ऐसे बदलाव को दर्शाता है जिसमें वह एक भरोसेमंद सहयोगी से उनके सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी बन गए.

शुरुआती करियर और TMC में उदय

राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार से आने वाले अधिकारी, सिसिर अधिकारी के पुत्र हैं, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवा दी थी. उन्होंने 1990 के दशक के मध्य में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और बाद में 1990 के दशक के अंत में TMC में शामिल हो गए. 2006 में वे कांथी दक्षिण से विधानसभा पहुंचे और पूर्वी बंगाल के तटीय क्षेत्रों में मजबूत संगठनात्मक आधार तैयार किया.

2007 का नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोध आंदोलन शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जिसने उन्हें जमीनी स्तर पर एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया और 2011 में TMC के सत्ता में आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने 2009 और 2014 में तमलुक लोकसभा सीट से दो बार जीत हासिल की.

2016 में TMC की वापसी के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया, जहां उन्होंने परिवहन और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली.

BJP में शामिल होना और सीधा मुकाबला

दिसंबर 2020 में आंतरिक मतभेदों के बीच शुभेंदु अधिकारी ने TMC से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा, जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेता अमित शाह की मौजूदगी में औपचारिक रूप दिया गया. यह कदम TMC के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका और भाजपा के लिए रणनीतिक लाभ माना गया. उन्होंने खुद को TMC की संगठनात्मक संरचना से परिचित एक नेता के रूप में पेश किया और “आमी एकांकर छेले” (मैं इस मिट्टी का बेटा हूं) जैसे नारे के जरिए अपनी क्षेत्रीय पहचान को मजबूत किया.

2021 का विधानसभा चुनाव उनके लिए ममता बनर्जी के खिलाफ पहला सीधा चुनावी मुकाबला था. नंदीग्राम में कड़े मुकाबले में उन्होंने मुख्यमंत्री को हराया, जो पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा उलटफेर माना गया. हालांकि, भाजपा उस समय केवल 77 सीटें जीत सकी और सरकार नहीं बना पाई, जबकि TMC सत्ता में बनी रही.

भवानीपुर में दूसरी बड़ी जीत

2026 के चुनाव शुभेंदु अधिकारी और भाजपा दोनों के लिए निर्णायक साबित हुए. भवानीपुर, जिसे ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता है, वहां से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने 15,000 से अधिक मतों से जीत दर्ज की. यह ममता बनर्जी पर उनकी दूसरी जीत थी, जिसने उन्हें राज्य की राजनीति में सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित किया.

इस जीत के बाद उन्होंने इसे जनता की भावना का प्रतिबिंब बताते हुए कहा कि यह “ममता बनर्जी की राजनीति से विदाई का संकेत” है.

शपथपत्र: मामले बढ़े, आय बढ़ी, संपत्ति घटी

भारत निर्वाचन आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ वर्तमान में 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश 2020 में TMC छोड़ने के बाद दर्ज हुए हैं. 2021 में उनके खिलाफ केवल एक मामला था.

उनकी कुल संपत्ति लगभग 85.9 लाख रुपये बताई गई है और कोई देनदारी नहीं है. उनके खिलाफ कुल 29 मामले लंबित बताए गए हैं.

इन मामलों में आपराधिक धमकी, हत्या के प्रयास, दंगा, धार्मिक भावनाएं भड़काना और जातिगत टिप्पणी जैसे आरोप शामिल हैं.

2022 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम संरक्षण दिया था और बिना अनुमति नए मामले दर्ज करने पर रोक लगा दी थी. अक्टूबर 2025 में कोर्ट ने उनके खिलाफ 15 मामलों को खारिज कर दिया और नई पाबंदियां भी हटा दीं.

आर्थिक रूप से उनकी आय 2020–21 के 8,13,170 रुपये से बढ़कर 2024–25 में 17,38,590 रुपये हो गई, लेकिन इस दौरान उनकी संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई.

दोहरी जीत से बदली राजनीति की तस्वीर

दो अलग-अलग चुनावों में दो बार मुख्यमंत्री को हराकर शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल की है. उनकी जीतों ने भाजपा की स्थिति को मजबूत किया है और राज्य की राजनीतिक कहानी को नए सिरे से परिभाषित किया है.

2026 के चुनाव 29 अप्रैल को हुए थे और परिणाम 4 मई को घोषित किए गए, जिसके बाद भाजपा की बड़ी जीत और अधिकारी की लगातार सफलता ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल कर दिया है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में दिलीप घोष, सामिक भट्टाचार्य, रूपा गांगुली, अग्निमित्रा पॉल और स्वपन दासगुप्ता जैसे नाम भी शामिल हैं.
 


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