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सरकार बनाएगी न्यूक्लियर लाइबिलिटी फंड, ₹1500 करोड़ से ज्यादा के परमाणु हादसों का मुआवजा होगा कवर
यह फंड न केवल ऑपरेटरों की जिम्मेदारी की तय सीमा से अधिक मुआवजा देने की व्यवस्था करेगा, बल्कि इससे ग्लोबल सप्लायर्स की रिस्क को लेकर आशंकाएं भी कम होंगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
केंद्र सरकार जल्द ही एक नया न्यूक्लियर लाइबिलिटी फंड (Nuclear Liability Fund) बनाने जा रही है, जो 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के परमाणु हादसों के मुआवजे को कवर करेगा. यह कदम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश और जोखिम साझा करने की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
फंड की भूमिका और उद्देश्य
सरकार के इस प्रस्तावित फंड का मकसद परमाणु ऊर्जा प्लांट ऑपरेटरों की तय मुआवजा सीमा से ऊपर के खर्चों को कवर करना है. यह वैधानिक फंड मौजूदा एड-हॉक भुगतान प्रणाली की जगह लेगा और सरकारी मुआवजा देने की क्षमता को और मजबूत करेगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पहल से ग्लोबल सप्लायर कंपनियों और निजी फर्मों की रिस्क-शेयरिंग की चिंताओं को कम किया जा सकेगा, जिससे लंबे समय से रुका हुआ निजी और विदेशी निवेश आकर्षित हो सकेगा. 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता में 12 गुना वृद्धि का लक्ष्यभारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 12 गुना बढ़ाना है. इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार नियमों में ढील दे रही है ताकि दशकों पुराने सरकारी एकाधिकार को खत्म कर निजी और विदेशी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जा सके. जानकारी के अनुसार टाटा पावर, अदाणी पावर और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े कॉर्पोरेट समूह इस क्षेत्र में निवेश करने की तैयारी कर रहे हैं. नया कानून संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा.
नए कानून में सप्लायर्स की जिम्मेदारी होगी सीमित
नए प्रस्तावित कानून में सप्लायर्स पर असीमित जिम्मेदारी (Unlimited Liability) का प्रावधान हटाने की तैयारी है. इसके तहत एक स्पष्ट कानूनी तंत्र स्थापित किया जाएगा, जिससे ऑपरेटर की निर्धारित सीमा से अधिक मुआवजा देने का प्रावधान होगा. वर्तमान में भारत 2015 में बनाए गए न्यूक्लियर इंश्योरेंस पूल पर निर्भर है, जो कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है. यह पूल ऑपरेटर और सप्लायर दोनों की जिम्मेदारी कवर करने के लिए बनाया गया था, लेकिन विदेशी कंपनियों की सुरक्षा चिंताओं को पूरा करने में विफल रहा.
पुरानी कानून व्यवस्था खत्म, नए कानून से होगा सुधार
नए विधेयक के लागू होने के बाद 1962 का परमाणु ऊर्जा अधिनियम और 2010 का न्यूक्लियर डैमेज सिविल लाइबिलिटी एक्ट खत्म कर दिया जाएगा. यह नया कानून परमाणु ऊर्जा उत्पादन और यूरेनियम खनन जैसे क्षेत्रों में निजी और विदेशी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देगा.
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