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MPC बैठक: रीपो दर 5.5% पर स्थिर, महंगाई अनुमान घटा; ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बरकरार

विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर तक एक और दर कटौती की संभावना बनी हुई है, जिससे आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों को और बल मिल सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार यानी 1 अक्टूबर को अपनी द्विमासिक बैठक में रीपो दर को 5.5% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है. यह लगातार दूसरी बैठक है जब समिति ने सर्वसम्मति से दरों को यथावत बनाए रखने का फैसला किया है. नीतिगत रुख को भी 'तटस्थ' बनाए रखा गया है, हालांकि दो बाहरी सदस्यों ने ‘उदार रुख’ की वकालत की है. अब से नीति रुख पर मतदान की परंपरा समाप्त कर दी गई है क्योंकि यह कानूनी रूप से आवश्यक नहीं है.

महंगाई और विकास के अनुमान में बदलाव

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए औसत मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर 2.6% कर दिया है, जो पहले 3.1% था. अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए यह अनुमान 4.9% से घटाकर 4.5% किया गया है. साथ ही, पूरे वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.8% कर दिया गया है, हालांकि दूसरी छमाही के लिए इसे 6.3% कर दिया गया है, जो 15 आधार अंक कम है.

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और शुल्क संबंधी घटनाक्रम के कारण वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही और उसके बाद अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में गिरावट आने की आशंका है. वर्तमान वृहद आर्थिक परिस्थितियों ने वृद्धि को और अधिक समर्थन देने के लिए नीतिगत गुंजाइश खोली है.”

ब्याज दरों में कटौती की संभावना

निवेश जगत से मिली प्रतिक्रिया में नरम रुख को प्रमुख माना गया है. कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के कार्यकारी उपाध्यक्ष (निवेश) चर्चिल भट्ट ने कहा, “MPC ने आज नीति दरों में नरम रुख अपनाते हुए यथास्थिति बनाए रखी है, जो तेजी से बदलती वृद्धि और मुद्रास्फीति की स्थिति को स्वीकार करता है. मुद्रास्फीति का औसत अनुमान घटाया गया है, जबकि GDP अनुमान में वृद्धि की गई है. यह रुख मौद्रिक राहत की संभावनाओं के लिए जगह बनाता है. हमें लगता है कि MPC का यह बयान पहले की तुलना में नरम माना जाएगा, जिससे बॉन्ड यील्ड में किसी तेज़ वृद्धि की संभावना कम हो जाएगी. हम आगे इस चक्र में एक और दर कटौती की उच्च संभावना देखते हैं.”

गोल्डमैन सैक्स ने भी अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि “गवर्नर का नरम रुख और महंगाई का घटा अनुमान दिसंबर में 25 आधार अंकों की कटौती का मार्ग प्रशस्त कर सकता है.”

बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया

आरबीआई के निर्णय का असर बाजारों में भी दिखा. बॉन्ड बाजार ने इस नरम रुख का स्वागत किया, जिससे बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6 आधार अंक गिरकर 6.52% पर आ गई. स्टॉक मार्केट में भी तेजी देखी गई, जहां सेंसेक्स 716 अंक और निफ्टी 225 अंक ऊपर बंद हुआ.

रियल एस्टेट सेक्टर को मिली राहत

रीपो दर स्थिर रखने के फैसले का रियल एस्टेट सेक्टर ने गर्मजोशी से स्वागत किया है. कई डेवलपर्स और निवेश विश्लेषकों ने इसे स्थिरता और खरीदारों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला कदम बताया है.

कॉन्शिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. के बिजनेस हेड मोहित अग्रवाल ने कहा, “रेपो दर को 5.5% पर स्थिर बनाए रखने का फैसला आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक संतुलित और विवेकपूर्ण कदम है. कम उधारी लागत से लग्जरी घर खरीदारों और निवेशकों की क्षमता बनी रहेगी. इससे HNI और NRI निवेशकों में रियल एस्टेट को लेकर विश्वास और मजबूत होगा.”

हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर ने कहा, “यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्थिरता और भरोसे का संकेत है. घर खरीदारों को इससे ईएमआई स्थिर रहने का लाभ मिलेगा, जिससे वे खरीदारी को लेकर ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करेंगे. डेवलपर्स के लिए भी यह ब्याज लागत को संभालने और प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने में सहायक होगा.”

रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासन ने टिप्पणी की, “साल की शुरुआत में 100 आधार अंकों की कटौती के बाद अब दर को यथावत रखना स्थिरता का स्पष्ट संकेत है. इससे खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा क्योंकि लोन की दरें अनुमान के अनुरूप बनी रहेंगी और ईएमआई में राहत बनी रहेगी.”

व्हाइटलैंड कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर (स्ट्रैटेजी) सुदीप भट्ट ने कहा, “आरबीआई द्वारा दर को स्थिर रखना दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए उत्साहजनक है. इससे होम लोन की ईएमआई में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे खरीदारों की मासिक किस्तें सुविधाजनक बनी रहेंगी. डेवलपर्स को प्रोजेक्ट प्लानिंग और कार्यान्वयन में सहूलियत मिलेगी.”

एसएस ग्रुप के एमडी और सीईओ अशोक सिंह जौनापुरिया ने कहा, “त्योहारी सीजन में यदि भविष्य में ब्याज दरों में कटौती होती है, तो मिड-इनकम और प्रीमियम सेगमेंट के खरीदारों में रुचि और बढ़ेगी. भले ही दरें अभी स्थिर हैं, लेकिन जीएसटी में हाल की कटौती और ईएमआई स्थिर रहने से घर खरीदना आसान हुआ है. इससे बाजार में विश्वास बना रहेगा.”

बेटर चॉइस रियल्टर्स के चीफ सेल्स ऑफिसर अजय त्यागी के अनुसार , "वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, आरबीआई द्वारा रेपो दर को 5.5% पर स्थिर रखने का निर्णय ऐसे समय में स्थिरता को पुष्ट करता है जब यह सबसे ज्यादा मायने रखता है. लक्जरी हाउसिंग सेक्टर, खासकर प्रीमियम सेगमेंट के लिए, यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि बायर्स फेस्टिव सीजन के दौरान पूरे विश्वास के साथ उधार ले सकें. यह वह समय है जो पारंपरिक रूप से संपत्ति की खरीदारी में तेजी से जुड़ा होता है. हाल ही में जीएसटी में की गई कटौती के साथ, स्थिर दरें अंतिम उपयोगकर्ताओं और निवेशकों, दोनों के लिए निर्णायक कदम उठाने के लिए एक शक्तिशाली प्रोत्साहन प्रदान करती हैं."

एम2के ग्रुप के वीपी और हेड मार्केटिंग, सेल्स और सीआरएम डॉ. विशेष रावत का कहना है कि “आरबीआई का रेपो रेट 5.5% पर बिना बदलाव और न्यूट्रल रुख अपनाने का फैसला एक स्थिर और संतुलित नीति का संकेत है. रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि इससे होम लोन की ब्याज दरें स्थिर रहती हैं और त्योहारों के समय घर खरीदना और भी किफायती बनता है. इस स्थिरता से पहली बार घर खरीदने वालों और मिड-इनकम खरीदारों का भरोसा बढ़ता है, साथ ही डेवलपर्स और निवेशकों को लंबे समय की योजना बनाने का आत्मविश्वास मिलता है. यह कदम सही समय पर लिया गया है, क्योंकि त्योहारों का मौसम हमेशा से ही घरों की बिक्री के लिए सबसे मजबूत समय माना जाता है.”
 


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