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RBI का बड़ा फैसला: शेयरों पर लोन की सीमा अब ₹1 करोड़, IPO फाइनेंसिंग भी ₹25 लाख तक बढ़ी

RBI का यह कदम भारतीय वित्तीय बाजार को और सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल है. इससे निवेशकों को पूंजी तक आसान पहुंच मिलेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने निवेशकों को राहत देते हुए शेयरों और डेट सिक्योरिटीज पर लोन की सीमा में बड़ा इजाफा किया है. अब निवेशक अपनी लिस्टेड शेयर होल्डिंग को गिरवी रखकर 1 करोड़ रुपये तक का लोन ले सकेंगे. पहले यह सीमा सिर्फ 20 लाख रुपये थी. वहीं, IPO फाइनेंसिंग की लिमिट भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है. इस फैसले की घोषणा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद की. यह बदलाव 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो गया है.

क्या होता है शेयरों पर लोन?

शेयरों पर लोन एक ऐसी सुविधा है, जिसमें निवेशक अपने शेयर बेचे बिना बैंक या ब्रोकरेज हाउस से कर्ज ले सकते हैं. इस लोन पर ब्याज दर आमतौर पर पर्सनल लोन से कम होती है. उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक के पास 50 लाख रुपये के शेयर हैं, तो पहले उन्हें अधिकतम 20 लाख रुपये तक लोन मिलता था. लेकिन अब वे बैंक की मार्जिन शर्तों के अनुसार 1 करोड़ रुपये तक उधार ले सकते हैं. इससे व्यक्ति अपनी संपत्ति बेचे बिना मेडिकल, शिक्षा, व्यवसाय या निवेश संबंधी खर्चों को पूरा कर सकता है.

IPO फाइनेंसिंग में बड़ा सुधार

IPO फाइनेंसिंग का मतलब होता है कि निवेशक नए शेयर इश्यू में भाग लेने के लिए लोन लेते हैं. पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया गया है. इससे उन निवेशकों को फायदा होगा जो बड़े IPO अलॉटमेंट के लिए आवेदन करना चाहते हैं लेकिन पूरा कैश निवेश नहीं करना चाहते. हालांकि ध्यान रहे, अगर IPO में शेयर नहीं मिलते या उनका प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो निवेशकों को लोन ब्याज सहित चुकाना होगा.

डेट सिक्योरिटीज पर लोन की सीमा भी हटाई गई

RBI ने लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज जैसे कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs) और डिबेंचर पर लोन लेने की ऊपरी सीमा को खत्म कर दिया है. अब निवेशक इन परिसंपत्तियों को भी गिरवी रखकर अधिक फंडिंग हासिल कर सकते हैं. इससे निवेशकों को पूंजी तक पहुंच और भी लचीली हो जाएगी.

निवेशकों को क्या फायदे होंगे?

1. अब निवेशक अपनी होल्डिंग्स को बेचे बिना बड़ी राशि का लोन ले सकेंगे.

2. शिक्षा, चिकित्सा या व्यवसाय जैसे जरूरी खर्चों के लिए कर्ज लेना आसान होगा.

3. IPO में भागीदारी बढ़ेगी, जिससे अच्छे रिटर्न वाले ऑफर्स में निवेश संभव होगा.

4. डेट सिक्योरिटीज से भी फाइनेंसिंग का विकल्प खुलेगा, जो पहले सीमित था.

जोखिम भी कम नहीं हैं

हालांकि यह सुविधा कई मामलों में फायदेमंद है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी हैं. अगर गिरवी रखे गए शेयर की कीमत गिरती है, तो बैंक अतिरिक्त गिरवी की मांग कर सकता है या आंशिक शेयर बेच सकता है. ब्याज दर और अन्य शुल्क समय के साथ बढ़ सकते हैं. IPO लोन में शेयर न मिलने पर निवेशक को बिना रिटर्न के लोन चुकाना पड़ सकता है.

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक अपने बैंक या ब्रोकरेज से जानकारी लें कि नई लिमिट्स उपलब्ध हैं या नहीं. इसके अलावा ब्याज दरें, मार्जिन रेशियो और शर्तों को समझकर ही लोन लें. उधार लिए गए पैसों का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, साथ ही गिरवी रखी संपत्ति पर नजर रखें और गिरावट की स्थिति में सुरक्षा मार्जिन का ध्यान रखें.

 

 


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