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अनूठी कला को जीवित रखने वालों की कहानी दिखाती है “थेवा”

दिल्ली के इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित की गई थी फिल्म की स्क्रीनिंग.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

सोने की महीन चादरों को रंगीन कांच पर जोड़कर छोटे उपकरणों की मदद से सोने पर डिजाइन तैयार करने का नाम है “थेवा”, जो कि भारत में सदियों से प्रचलित है. इस कला से अब राजस्थान के केवल 12 परिवार ही जुड़े हुए हैं. इस हुनर पर आधारित चलचित्र “थेवा” का प्रदर्शन दिल्ली में किया गया. डायरेक्टर शिवानी पांडेय द्वारा निर्देंशित चलचित्र ”थेवा“ में उन गुमनाम नायकों को दिखाया है, जो रहस्यमय तरीके से निर्मित कला को जीवित रखे हुए हैं.

बताई फिल्म के पीछे की कहानी
इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ऐसे ही कला और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए चलचित्र तैयार करता रहा है. शुक्रवार को केंद्र के समवेत सभागार में सायं चार बजे से मीडिया सेंटर द्वारा फिल्म स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया. डायरेक्टर शिवानी पांडेय ने फिल्म के निर्मित होने की कहानी को दर्शकों के साथ साझा किया. दर्शकों ने भी निर्देशक से फिल्म से जुड़े प्रश्न किए. लेखिका मालविका जोशी ने फिल्म की तारीफ करते हुए कहा कि इसमें अनोखी कला के बारे में दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों के कारण ही कला और संस्कृति का संरक्षण किया जा सकता है. 

ऐसे प्रयासों की जरूरत 
वहीं, सेंसर बोर्ड के पूर्व सदस्य अतुल गंगवार ने कहा कि ऐसे चलचित्र ही हमारी संस्कृति और कला को जीवंत बनाए हुए हैं. इससे अन्य राज्यों की संस्कृति को भी चलचित्र के माध्यम से जनता के सामने लाने का प्रयास किया जाना चाहिए, जिससे हमारे देश की विभिन्न राज्यों की कलाओं और संस्कृति की जानकारी अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो सके. फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान किसान नेता नरेश सिरोही, नियंत्रक अनुराग पुनेठा, उप नियंत्रक श्रुति नागपाल, उमेश पाठक आदि मौजूद रहे.
 


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