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हमने हमेशा ग्राहक फर्स्‍ट की नैतिक सोच का पालन किया है: वी वैद्यनाथन

बैंक का डिपॉजिट वित्‍त वर्ष 2024 में 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है. जबकि अगले पांच सालों में बैंक का लक्ष्‍य इसे 6 लाख करोड़ के पार पहुंचाने का है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

 पिछले कुछ समय में बैंकों में लगने वाले हर तरह के चार्जेज ग्राहक के लिए चर्चा का विषय रहे हैं. लेकिन एक बैंक ऐसा भी है जिसने अपने ग्राहकों की डिमांड पर सभी तरह के चार्जेज को हटा दिया. बैंक के इस कदम से उसके रेवेन्‍यू पर असर पड़ा है लेकिन उसका विश्‍वास है कि ये कदम उसे एक लंबी रेस में आगे लेकर जाएगा. आखिर क्‍या है बैंक की तैयारियां इसे लेकर बिजनेस वर्ल्‍ड ने आईडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ वी वैद्नाथन से बात की है. जिन्‍होंने बैंक की तैयारियों को लेकर कई अहम बातें कही. 

आपके बैंक को आईआईटी बॉम्‍बे के प्रोफेसर आशीष दास और मनीलाइफ फाउंडेशन द्वारा एक स्‍टडी में क्‍लास पार्ट नाम दिया गया है. आपके लिए इस तारीफ का क्‍या महत्‍व है? 

जब हम आईडीएफसी के साथ विलय के बाद अपने बैंक का विजन तैयार कर रहे थे तब हमने एक साफ स्लेट से शुरुआत की. हमने अपने विजन स्‍टेटमेंट में यहां नैतिक बैंकिंग की पहचान की और लक्ष्‍यों को तय किया. लेकिन हम नहीं चाहते थे कि यह एक रटा-रटाया नारा बन जाए जिसे कर्मचारी पढ़ें और भूल जाएं. इसलिए, हमने अपने सभी उत्पादों, सेवाओं, शर्तों आदि को नया रूप दिया जिससे हम हमेशा इसमें रह सकें. इसका नतीजा ये हुआ कि हमारे उत्पाद अधिक से अधिक अनुकूल बन गए. हमारे विवरण और भी अधिक साफ और स्पष्ट हो गये. अब हम इससे खुश हैं. आईआईटी बॉम्बे और मनीलाइफ के प्रोफेसर आशीष दास द्वारा एक स्वतंत्र अध्ययन ने भी यही स्वीकार किया है. वे अत्यधिक विश्वसनीय लोग हैं, इसलिए हम खुश हैं इस रिपोर्ट में भारतीय बैंकों को ‘एक वर्ग से अलग’ कहा गया है. 

बैंक जीरो फी बैंकिंग कैसे लेकर आया?
एक दिन हमारी वित्त टीम ने पाया कि हमारा बैंक डेबिट कार्ड शुल्क नहीं ले रहा है, जबकि अन्य सभी बैंक ऐसा कर रहे हैं, इसलिए,हमारे सीएफओ ने हमारे बिजनेस प्रमुखों को खुद को बेंचमार्क करने की सलाह दी और इसके लिए शुल्क लें. हमारी उत्पाद प्रबंधन टीम ने इस पर काम किया और ग्राहकों को यह कहते हुए पत्र भेजे और कहा कि हम जुलाई 2022 से सभी ग्राहकों से डेबिट कार्ड शुल्क के रुप में 500रु से 600 रु चार्ज करेंगे. कुछ ग्राहकों ने हमसे मेल करते हुए कहा कि हमने आपके बैंक का समर्थन तब से किया है जब आप छोटे थे, क्या आप इस पर पुनर्विचार कर सकते हैं? संयोग से उनमें से एक मेल मुझ तक पहुंचा और हमने इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपनी सभी फीसों और विवरणों तथा अन्य पर फिर से विचार किया. कुछ चर्चाओं के बाद हमने इसे सरल बनाने का निर्णय किया. हमने सभी जगहों ग्रामीण, शहरी, छोटे, बड़े सभी ग्राहकों के लिए इसे जीरो कर दिया. अब हमारे ग्राहक इससे बहुत खुश हैं. 

क्या आप इसके कुछ उदाहरण साझा कर सकते हैं?
यह आमतौर पर जटिल है, अलग-अलग मामलों बहुत सारे किंतु-परंतु के साथ इसे कैलकुलेट करना कठिन है, लेकिन हमने दूर कर दिया है, सभी जटिल विवरणों के साथ, और बस इसे शून्य बना दिया. यहां तक ​​की हमारे ग्रामीण बैंकिंग ग्राहक जो मिनिमम बैलेंस सिर्फ 5,000 रुपये रखें, अब इसका आनंद लें.

क्या आप हमें इस तरह के आरोपों के कुछ उदाहरण दे सकते हैं जिन पर दूसरे बैंक चार्ज करते हैं लेकिन आप नहीं करते हैं.

वी वैद्यनाथन कहते हैं कि उनके बारे में बताने में तो बहुत समय लगेगा. इतना कहना पर्याप्त होगा कि एक लंबी सूची है जैसे आईएमपीएस, एनईएफटी, आरटीजीएस के लिए शुल्क नकद जमा, नकद निकासी, तीसरे पक्ष के लेनदेन, गैर-घरेलू, शाखा लेनदेन, विदेशी एटीएम, निकासी, एसएमएस...के बारे में हैं
ऐसे 35 चार्ज हैं जिन्‍हें हमने हटा दिया है. 

क्या इसका आपके खाते पर कोई गंभीर प्रभाव पड़ा?
वी वैद्यनाथन कहते हैं कि हाँ, वास्तव में. जब हमने इसे लागू किया तो इसका, हम पर प्रभाव पड़ा. लेकिन सकारात्मक बात ये है कि हमने पिछले कुछ समय में अपने ग्राहकों से गुडविल हासिल की है. एक बैंक बना रहे हैं लंबे समय तक, हम इंतजार करने को तैयार हैं.

 क्‍या आपका मौजूदा और भविष्‍य का ग्राहक उन फायदों के बारे में जानता है जिन्‍हें आप दे रहे हैं? 
उन्‍हें शिक्षित करना और इसका प्रचार करना बहुत कठिन है. लेकिन इसे अगले 4 से 5 सालों तक अवश्य होना चाहिए. 

जीरो फी बैंकिंग के अलावा आपका बैंक और क्या यूनीक सुविधाएं ऑफर कर रहा है?
हमारे पास मौजूद हर उत्पाद के लिए हमने ग्राहक फर्स्‍ट की थीम का पालन किया है. उदाहरण के लिए, क्रेडिट कार्ड में, रिवॉर्ड अंक समाप्त नहीं होते हैं. हम एकमात्र बैंक हैं जो ग्राहकों को अगली ऑनलाइन खरीद के लिए रिवॉर्ड भुनाने की अनुमति देते हैं. इस तरह, हमारे पास इसके लिए कई सुविधाएं हैं

प्रोफेसर आशीष दास और मनीलाइफ की तो रिपोर्ट का कौन सा भाग आपके लिए उपयोगी है?
यह आशीष दास-मनीलाइफ रिपोर्ट व्यापक है, यह विभिन्न मामलों की तर्कसंगतता प्रणाली में तुलना करता है. हर बैंक का अपने उत्पाद के नाम और उनके प्रत्येक उत्पाद के अंतर्गत फीस के बारे में बताने का अपना तरीका है. तो आप कैसे दो बैंकों की फीस की तुलना करते हैं? इसे निकालना, तुलना करना और रखना एक कठिन और श्रमसाध्य कार्य है, यह सब ,एक साथ है.

आप अपने प्रोडक्‍ट को कैसे प्रमोट करने की योजना बनाते हैं?

यह रिपोर्ट हमारे कर्मचारियों ने बनाई है और मैं इससे बहुत खुश हूँ क्योंकि यह आसान है. वे अब हमारा प्रतिनिधित्व करेंगे. अब ये साफ है कि हमारे उत्पाद अत्यधिक ग्राहक अनुकूल हैं,ताकि वे हमारे उत्पादों का अधिक आत्मविश्वास के साथ प्रचार कर सकें. 

क्या पिछले 5 वर्षों में आपके बैंक की जमापूंजी  ने आपको जीरो फीस बैंकिंग की ओर आगे बढ़ने में बड़ी भूमिका निभाई? 
खैर, कोई एक कारण चुनना बहुत कठिन है. ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं जिन्‍हें हमने किया है, हमने ब्रैंड जागरूकता, ब्रैंड चरित्र का मजबूत निर्माण किया है इसके अतिरिक्‍त हमारा संस्‍थागत अनुभव भी इसके पीछे है.  हम बेहतरीन ग्राहक सेवा देने को लेकर भी प्रतिबद्ध हैं, तीसरा, हमने प्रौद्योगिकी का उपयोग किया और ग्राहक बढ़ाने के लिए पूरा जोर लगा दिया गया है. हमने अपने ग्राहकों को कई समाधानों से युक्त एक विश्व स्तरीय ऐप दिया. हमारे मोबाइल ऐप की Google रेटिंग 5 में से 4.9 है, जो काफी शानदार है. तो, ये सब चीजें जमा प्राप्त करने में भूमिका निभाती हैं. 

भविष्‍य के बैंक डिपॉजिट के लक्ष्‍यों के लिए आपका क्‍या दृष्टिकोण है?
हमारी जमा राशि FY24 में 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. हमारा अनुमान है कि अगले 5 वर्षों में यह आसानी से 6 लाख करोड़ रुपये पार कर जाएगा. गाइडेंस 1.0 में 18 से 19 प्‍वॉइंट हैं, जिन्‍हें हमने अचीव किया है. अब हम गाइडेंस 2.0 के लिए तैयार हैं.


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