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फिजिकल हेल्थ की तरह मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना भी है ज़रूरी, पढ़िए क्या बता रही हैं लाइफ कोच

बीते कुछ समय से कॉर्पोरेट सेक्टर अपने कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ पर काफी ध्यान देने लगा है, जो पॉजिटिव साइन हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

जिंदगी की भागदौड़ में हम अक्सर मानसिक सेहत यानी कि मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना भूल जाते हैं. जबकि वो भी उतना ही ज़रूरी है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना. इस महत्वपूर्ण मुद्दे की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है. इस मौके पर 'BW हिंदी' ने लाइफ कोच आनंदमयी कुमार से बातचीत की. उन्होंने बताया कि खासतौर पर कॉर्पोरेट सेक्टर में मेंटल हेल्थ को लेकर अवेयरनेस बढ़ी है, लेकिन इस दिशा में अभी काफी काम किया जाना बाकी है.

मेंटल हेल्थ आज भी टैबू
आनंदमयी के अनुसार, कोरोना ने हमारी जिंदगी को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. फिर चाहे बात वर्क कल्चर की हो या सामान्य जिंदगी की. ऐसे में हमारे स्ट्रेस लेवल में भी इजाफा हुआ है, जिससे मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना और भी ज्यादा ज़रूरी हो गया है. जब हमें कोई फिजिकल सिम्टम दिखाई देता है तो हम तुरंत डॉक्टर के पास जाते हैं, लेकिन जब हमें डिप्रेशन महसूस होता हो तो उसे इग्नोर कर देते हैं. सबसे बड़ी समस्या ये है कि हम आज भी मेंटल हेल्थ को टैबू मानते हैं. यदि आप किसी को बोलते हैं कि मुझे डिप्रेशन लग रहा है, तो अक्सर उनका जवाब होता है – पागल है क्या ऐसा कुछ नहीं होता. चल कहीं घूमकर आते हैं, सब ठीक हो जाएगा. लेकिन हम कभी ये नहीं सोचते कि हमारी बॉडी में हार्मोन हैं, कैमिकल हैं, जब उनमें कुछ बदलाव होता है, तो इसका हमारे ब्रेन पर भी असर पड़ता है. हम सही से काम नहीं कर पाते, नकारात्मक विचार हमें घेर लेते हैं और इससे हमारी पूरी लाइफ लाइफ प्रभावित होती है. 

कॉर्पोरेट सेक्टर बन रहा सजग
आनंदमयी बताती हैं कि बीते कुछ समय से कॉर्पोरेट सेक्टर अपने कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ पर काफी ध्यान देने लगा है, जो पॉजिटिव साइन हैं. जिस कंपनी के साथ मैं काम करती हूं, उन्होंने अपने 12 साल के इतिहास में पहली बार इस विषय पर एक वर्कशॉप आयोजित की. इसके अलावा, कई बड़ी कंपनियों ने भी मुझसे संपर्क किया है, ताकि मैं उनके स्टाफ को मेंटल हेल्थ के बारे में बता सकूं. मानसिक स्वास्थ्य और बीमारियों के रिश्ते के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, ‘कुछ साल पहले एक रिसर्च में पाया गया था कि मेंटल स्ट्रेस, एंग्‍जायटी और इमोशनल ट्रॉमा की वजह से हमारे शरीर में 85% तक बीमारियां होती हैं. यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हमारे इमोशनल और मेंटल इम्बैलेंस की वजह से होती हैं. क्योंकि इमोशनल और मेंटल इम्बैलेंस के लक्षण फिजिकल सिम्टम की तरह दिखाई नहीं देते, इसलिए हम उन्हें इग्नोर कर देते हैं’. 

क्या करना चाहिए?
लाइफ कोच आनंदमयी के मुताबिक, कई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि कभी-कभी मेडिकेशन के बावजूद लोगों की स्थिति में तब तक सुधार नहीं होता, जब तक कि मेंटल और इमोशनल काउंसलिंग करके उस थॉट पैटर्न को नहीं तोड़ा जाता, जो उन्हें बार-बार परेशान कर रहा है. ऐसी स्थिति के लिए हम Positive Affirmations की वर्कशॉप करते हैं, इसमें सबसे महत्वपूर्ण है योग, जो हमारे इंडियन कल्चर का सबसे बेहतरीन अविष्कार है. योग फिजिकल और मेंटल बॉडी दोनों के लिए मददगार है. सिर्फ 15 मिनट का मेडिटेशन ही पूरे दिन की एनर्जी दे सकता है. इसके अलावा, अच्छी बुक्स पढ़ना, खान-पान पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है. कुल मिलाकर कहें तो हम क्या इनपुट लेते हैं, उससे हमारा मानसिक स्वास्थ्य निर्भर करता है. इनपुट में सिर्फ खाना-पीना ही नहीं आता. इसमें हमारे थॉट प्रोसेस कैसे हैं, हम TV पर क्या देखते हैं, हम न्यूज़पेपर में क्या पढ़ रहे हैं, हम नेचर के साथ कितना टाइम बिताते हैं, हम एनिमल्स के साथ कैसा बर्ताब कर रहे हैं, भी आता है. लिहाजा, इन सब बातों पर ध्यान देने के साथ ही अच्छी नींद भी ज़रूरी है.

काउंसलर के पास जाने में झिझक कैसी?
यहां यह भी समझना ज़रूरी है कि काउंसलर के पास जाना कोई टैबू नहीं है. मैं पिछले 10 सालों से लाइफ कोच हूं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर काउंसलर के पास जाती हूं. यह उसी तरह है जैसे फिजिकल हेल्थ चेकअप के लिए डॉक्टर के पास जाना, लिहाजा इसमें किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए. प्रोफेशनल लाइफ में मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना कितना ज़रूरी है? इस सवाल के जवाब में आनंदमयी ने कहा – बेहद ज़रूरी है. हमारी परफॉरमेंस हमारी मेंटल हेल्थ से जुड़ी होती है. यदि हमारा मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं होगा, तो हम बेहतर काम नहीं कर पाएंगे. काम नहीं करेंगे, तो करियर ग्रोथ रुक जाएगी. इसके अलावा, मेंटल हेल्थ ठीक नहीं होने पर बॉडी भी हमारा साथ नहीं देगी. ऐसे में जहां हम 9 घंटे काम कर सकते हैं, वहां बमुश्किल 4-5 घंटे ही काम कर पाएंगे. कॉर्पोरेट सेक्टर में हम फिजिकल लेबर नहीं करते, हम मेंटल लेबर करते हैं, इसलिए हमारा मानसिक रूप से पूरी तरह फिट रहना ज़रूरी है. 
 


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