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सिर्फ 5 प्रतिशत कुत्तों को ही लग रही वैक्सीन, जानें Rabies Dogs को कैसे पहचानें

ऐसे खतरनाक हालात के बाद भी जिले के करीब 70000 कुत्तों में से पांच फीसदी कुत्तों का ही वैक्सीनेशन हो सका है.

आमिर कुरेशी 4 years ago

आगरा: ताज नगरी शहर से लेकर देहात तक कुत्तों का आतंक है. हर साल करीब 72000 लोगों को कुत्ते काट रहे हैं. इसके बाद भी कुत्तों का वैक्सीनेशन नहीं किया जा रहा है. साथ ही साथ कुत्तों में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकार के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है.

रेबीज का वैक्सीनेशन बहुत जरूरी
ऐसे खतरनाक हालात के बाद भी जिले के करीब 70000 कुत्तों में से पांच फीसदी कुत्तों का ही वैक्सीनेशन हो सका है. पशु चिकित्सक डॉक्टर एके दोनारिया के मुताबिक कुत्तों में 9 बीमारियां और रेबीज का वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है. कुत्तों की पावो वायरस बीमारी मनुष्य में भी चली जाती है. रेबीज बीमारी लाइलाज है, इसलिए जो लोग कुत्तों का पालन करते हैं उनको हर साल कुत्तों का वैक्सीनेशन कराते रहना चाहिए.

पशुपालन विभाग को पोस्ट वॉइस वैक्सीन मिलती है
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी विजय वीर चंद्र पाल ने बताया कि पशुपालन विभाग को पोस्ट वॉइस वैक्सीन मिलती है. कुत्ते के द्वारा किसी गाय, भैंस, बकरी, सहित अन्य जानवरों को काटने पर हम वैक्सीनेशन करते हैं. इस साल कुत्तों के बढ़ते हमलों के बाद भी वर्ष 2022 में आगरा को मात्र 2291 वैक्सीन ही मिली. इसमें से भी अभी 600 वैक्सीन लगनी शेष है.

कुत्तों को वैक्सीन लगाने का कार्य PFA करती है
नगर निगम पशु चिकित्सा अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि शहर में कुत्तों को वैक्सीन लगाने का कार्य PFA करती है. वे महीने में 35 से 40 कुत्तों को वैक्सीन लगा रहे हैं. उनकी डिमांड के हिसाब से हम रेबीज वैक्सीन उन्हें मुहैया करा रहे हैं. वहीं, पशु चिकित्सक डॉक्टर संजीव नेहरू का कहना है कि आगरा में 35 से 40 हजार पालतू कुत्ते हैं. इनमें से 20 फीसदी का ही वैक्सीनेशन हुआ है.

साल में 72 हजार कुत्ते के काटने के मामले सामने आते हैं
जिला अस्पताल के आंकड़ों को देखा जाए तो वर्तमान में कुत्तों के काटने के मामले प्रतिदिन 250 तक आ रहे हैं, जबकि गर्मी में इसका आंकड़ा बढ़कर 450 तक पहुंच जाता है. प्रतिदिन 200 मामलों से महीने में 6 हजार और साल में 72 हजार कुत्ते के काटने के मामले सामने आते हैं.

कितना खर्चा आता है एक कुत्ते की वैक्सीनेशन का
कुत्ते की वैक्सीनेशन की शुरुआत 2600 रुपये हो जाती है और 5000 रुपये तक जाती है. उसके बाद हर साल बूस्टर डोज जो हाफ प्राइस में मिल जाती है.

क्या कहते हैं आंकड़े
- 21 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते उत्तर प्रदेश में हैं. इनमें से वैक्सीनेटेड कुत्तों की संख्या इतनी है कि उनकी गिनती ही नहीं हो पाई है.

- उत्तर प्रदेश में 26 लाख के करीब पालतू कुत्ते हैं. इनमें से लगभग 19 लाख वैक्सीनेटेड हैं.

- उत्तर प्रदेश में कुत्तों के वैक्सिनेशन का सालाना बजार अनुमानित 290 करोड़ रुपये का है.

हैरान करने वाली बात
- सरकारी पशु अस्पतालों में कुत्तों के वैक्सीनेशन का कोई सालाना बजट नहीं आता है. जिले से वैक्सीनेशन की डिमांड भेजी जाती है. उसमें भी 50 से 60% तक की ही आपूर्ति होती है.

- उत्तर प्रदेश में हाइड्रोफोबिया से मौतों का सिलसिला टूटता नहीं है. रेबीज इंफेक्शन होने के बाद मृत्यु शत प्रतिशत निश्चित है. किसी भी तरह की दवा से संक्रमित की जान नहीं बच सकती.

रेबीज कुत्ते की पहचान व बचाव
- कुत्ते के मुंह से हरवक्त लार निकालती रहती है
- कुत्ते की ज़ुबान को लकवा मर जाता है 
- कोई भी खाना निगल नही पाएगा
- जखम को 10 मिनट तक बीटाडीन से साफ करें
- 10 मिनट तक घाव को साबुन से धोएं, जिससे कि वायरस मर जाए

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