✕

होम / हेल्थ / कैसे दूर होंगी डाइग्नोसिस की खमियां? पढ़ें BW HealthCare इवेंट में क्या बोले एक्सपर्ट्स

कैसे दूर होंगी डाइग्नोसिस की खमियां? पढ़ें BW HealthCare इवेंट में क्या बोले एक्सपर्ट्स

BW हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवॉर्ड्स सेरेमनी में एक्सपर्ट्स ने इस विषय पर अपने विचार पेश किए कि कैसे डाइग्नोसिस में खामियों को दूर किया जा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

किसी मरीज को कितनी जल्दी ठीक किया जा सकता है, यह काफी हद तक सटीक डाइग्नोसिस पर निर्भर करता है. कई बार डाइग्नोसिस में खामियां आ जाती हैं, जिसकी वजह से मरीज और डॉक्टर दोनों को अपने-अपने स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है. क्या टेक्नोलॉजी इन खामियों को दूर करने में अहम भूमिका निभा सकती है? BW हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवॉर्ड्स सेरेमनी में एक्सपर्ट्स ने इस विषय पर अपने विचार पेश किए.

पैनल डिस्कशन में ये रहे शामिल
कार्यक्रम में 'Reducing Diagnosis Errors - Role that technology will play' विषय पर पैनल डिस्कशन में महाजन इमेजिंग के एसोसिएट डायरेक्टर कबीर महाजन, पैथकाइंड लैब्स के एमडी और CEO संजीव वशिष्ठ, ICMR की पूर्व डिप्टी डायरेक्टर और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर दीपिका सराफ, Sigtuple के फाउंडर एवं सीईओ Dr. Tathagato Rai Dastidar ने अपने विचार रखे. मॉडरेटर के रूप में Dr. Dang's Labs के सीईओ डॉक्टर अर्जुन डांग उपस्थित थे.

कोरोना महामारी ने सिखाया
सबसे पहले ICMR की पूर्व डिप्टी डायरेक्टर और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर दीपिका सराफ ने बताया कि टेक्नोलॉजी डाइग्नोसिस की खामियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने हमें काफी कुछ सिखाया है. महामारी से पहले तक जो हम सोच भी नहीं सकते थे, अब कर रहे हैं. उदाहरण के तौर पर आज डॉक्टर डिजिटल कंसल्टेशन करते हैं. यानी वो डिजिटली पेशेंट से मिलकर उसकी समस्या जानकर मेडिसिन प्रिस्क्राइब करते हैं. क्या कोरोना काल से पहले, ऐसा संभव था? कुछ खास मामलों में भले ही ऐसा होता हो, लेकिन जितना आम ये आज हो गया है, उतना पहले संभव नहीं था. लॉकडाउन के समय डिजिटल कंसल्टेशन शुरू हुआ था और आज ये बहुत कॉमन हो गया है. इसलिए टेक्नोलॉजी डाइग्नोसिस की खामियों को दूर करने में अहम् भूमिका निभा सकती है.     

कई वजह से होती हैं खमियां 
पैथकाइंड लैब्स के एमडी और CEO संजीव वशिष्ठ ने समझाया कि डाइग्नोसिस में गड़बड़ी कई वजह से हो सकती है. उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल का ठीक से पालन नहीं करने से लेकर प्रिस्क्रिप्शन को गलत पढ़े जाने तक ऐसी कई वजह हैं, जिनके चलते कभी-कभी Diagnosis Errors हो जाते हैं. संजीव वशिष्ठ ने आगे कहा, 'कई बार सैंपल शहर के एक छोर से कलेक्ट होता है और लैब दूसरे छोर पर होती है, ऐसे में यदि सही पैकेजिंग और कोल्ड चेन आदि का ठीक से पालन नहीं किया गया है, तो लैब तक पहुंचते-पहुंचते गर्मी की वजह से सैंपल में बदलाव संभव है'.

प्रोटोकॉल का पालन ज़रूरी
पैथकाइंड लैब्स के CEO ने कहा कि कभी-कभी प्रिस्क्रिप्शन को गलत पढ़ लिया जाता है, फिर चाहे वह डॉक्टर की राइटिंग की वजह से हो या किसी और वजह से, ऐसे में डाइग्नोसिस में खामियां संभव हैं. इसी तरह, यदि बार कोडिंग ठीक नहीं है, तो सैंपल के मिक्सअप होने का खतरा रहता है. कई मामलों में गलती पेशेंट की तरफ से होती है, वो प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते. उदाहरण के तौर पर कुछ मामलों में यदि सैंपल कलेक्शन से पहले उन्होंने अत्यधिक कसरत कर रखी है या फिर किसी वजह से बेहद तनाव में हैं, तो इसका असर सैंपल पर भी पड़ेगा'. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी से डाइग्नोसिस से जुड़ी कई तरह की खामियों को दूर किया जा सकता है.

AI टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण
महाजन इमेजिंग के एसोसिएट डायरेक्टर कबीर महाजन ने रेडियोलॉजी में AI टेक्नोलॉजी पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में रेडियोलॉजी में AI काफी प्रभावशाली साबित हो सकती है. इससे समय पर केस डिटेक्ट करने में मदद मिल सकती है. रेडियोलॉजिस्ट के रिपोर्टिंग डेटा क्वालिटी और सटीकता में इजाफा हो सकता है. कबीर महाजन के मुताबिक, कई प्रकार के कैंसर की स्क्रीकिंग में AI से विभिन्न लाभ मिल सकते हैं.

स्क्रीनिंग में हम काफी पीछे 
बेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग पर बात करते हुए महाजन इमेजिंग के एसोसिएट डायरेक्टर ने कहा कि इस मामले में कम काफी पीछे हैं. अफसोस की बात है कि हमें जहां होना चाहिए था, हम वहां नहीं हैं. शायद इसलिए कि हमारे पास पर्याप्त मैनपावर नहीं है, जो इमेजस से कैंसर डिटेक्ट कर सके. पश्चिमी देशों में AI स्टडी से पता चलता है कि यदि कैंसर डिटेक्ट करने के लिए AI सल्यूशन की अनुमति दी जाती है, तो स्क्रीनिंग प्रोग्राम के मामले में रेडियोलॉजिस्ट के समय को 62% कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा, 'इस तरह की स्टडी डेनमार्क में हुई थी, पता नहीं क्यों भारत में कोई अध्ययन नहीं किया गया'.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

स्कैनर का सवाल: अस्पतालों में बेहतर फैसलों के लिए क्यों जरूरी है वित्तीय समझ और चिकित्सकीय ज्ञान का तालमेल

वित्त टीम की शुरुआत लाभ-हानि विवरण से होती है. इससे पता चलता है कि परामर्श, प्रक्रियाओं, डायग्नोस्टिक्स और फार्मेसी से होने वाली आय अस्पताल चलाने की लागत को पूरा करती है या नहीं.

1 week ago

भारत में पहली बार WCOG, 61 देशों के 3,000 विशेषज्ञ जुटे; एआई और मेडिकल टेक्नोलॉजी पर मंथन

WCOG के उद्घाटन पर जेपी नड्डा बोले- पाचन और लिवर संबंधी बीमारियों से निपटने के लिए इलाज के साथ रोकथाम और शुरुआती जांच पर जोर जरूरी

01-October-2026

दिल्ली में 120 लोगों की हुई हृदय संबंधी जांच, विशेषज्ञों ने समय रहते जोखिम पहचानने पर दिया जोर

विश्व हृदय दिवस के अवसर पर आयोजित इस कैंप में क्लीनिकल जांच, लैब टेस्ट और कार्डियक इमेजिंग को एक साथ शामिल किया गया. इसका उद्देश्य लोगों को हृदय रोग के जोखिम के बारे में जागरूक करना और गंभीर हृदय संबंधी घटना से पहले बीमारी की पहचान तथा रोकथाम पर जोर देना था.

28-September-2026

भारत में बढ़ रहा अल्जाइमर का खतरा, 2036 तक दोगुने हो सकते हैं डिमेंशिया के मरीज

शुरुआती लक्षणों को उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, विशेषज्ञों ने समय पर जांच और डॉक्टर से सलाह लेने की दी सलाह

22-September-2026

IMA और Abbott ने शुरू किया इंडियन इम्यूनाइजेशन वीक, फ्लू वैक्सीनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर

इस अभियान के तहत स्वास्थ्य पेशेवरों को टीका लगाने से जुड़े व्यावहारिक दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इनमें खास तौर पर यह जानकारी शामिल है कि बुखार या किसी बीमारी से ठीक होने के दौरान या उसके बाद टीकाकरण कब कराया जा सकता है.

22-September-2026


बड़ी खबरें

SBI के मुनाफे में 14.28% की बढ़ोतरी, दूसरी तिमाही में ₹23,038 करोड़ का शुद्ध लाभ

नेट इंटरेस्ट इनकम में 14.69% का उछाल, बढ़कर ₹49,143 करोड़ हुई; बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार

9 hours ago

बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेटा के फेसबुक-इंस्टाग्राम पर उठे सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करते हैं. याचिकाकर्ता ने बच्चों की मानसिक सेहत, निजता और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है.

8 hours ago

टाटा ग्रुप के विवाद पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सलाह, आपसी बातचीत से सुलझाएं मतभेद

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ग्रुप के नेतृत्व से आंतरिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने और समूह में सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इस विवाद का सार्वजनिक रूप से जारी रहना ठीक नहीं है.

8 hours ago

2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य, 50 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर सरकार की नजर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर है जोर, रक्षा बजट बढ़कर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ

9 hours ago

रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन ने पकड़ी रफ्तार, 12 साल में तीन गुना बढ़ा आंकड़ा; 99.7% नेटवर्क हुआ इलेक्ट्रिक

आंकड़ों के मुताबिक, 1950 तक देश के केवल 0.7 फीसदी रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हुआ था. 1961 में यह आंकड़ा 1.3 फीसदी और 2001 तक 23.6 फीसदी पहुंचा. इसके बाद भी रफ्तार सीमित रही, लेकिन 2014 के बाद इलेक्ट्रिफिकेशन के काम में तेजी आई.

14 hours ago