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नई EV पॉलिसी किस तरह TATA, Mahindra की बढ़ा सकती है परेशानी, समझिए पूरा गणित

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (EV Policy) को मंजूरी दे दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के इस्तेमाल में पिछले कुछ समय में तेजी आई है. केवल टू-व्हीलर ही नहीं, चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज भी बढ़ा है. ऐसे में ऑटो कंपनियां EV पर ज्यादा फोकस कर रही हैं. हालांकि, कुछ दूसरे देशों के मुकाबले हमारा EV एडॉप्शन रेट कम है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन हमारे यहां EV कारों की सेल महज 2 प्रतिशत है. इस बीच, नई EV पॉलिसी को मंजूरी मिल गई है. सरकार का मानना है कि नई नीति से देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाया जा सकेगा. इससे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी तक पहुंच प्रदान करने, ईवी इकोसिस्टम को बढ़ाने और मेक इन इंडिया इनिशिएटिव को सपोर्ट करने में मदद मिलेगी. हालांकि, इस नीति को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं. सबसे पहला तो यही कि क्या इससे घरेलू कंपनियों की चुनौतियों में इजाफा होगा?   

कई कंपनियों की होगी एंट्री 
इस पॉलिसी में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क घटाकर 15 प्रतिशत किया जा सकता है, यदि उनकी कीमत 35,000 डॉलर (लगभग 29 लाख रुपए) से ज्यादा नहीं है. मौजूदा व्यवस्था के तहत भारत में लाई जाने वाली इलेक्ट्रिक कारों पर 60 से 100 प्रतिशत तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. हालांकि, ये छूट केवल उन्हीं कंपनियों को मिलेगी जो भारत में प्लांट लगाएंगी और कम से कम 4150 करोड़ रुपए का निवेश करेंगी. टेस्ला सहित कई EV निर्माता इस शर्त को पूरा करने के लिए आसानी से तैयार हो जाएंगे, क्योंकि उन्हें भारतीय बाजार में मौजूद संभावनाओं का इल्म है. ऐसे में आने वाले समय में भारत में कई विदेशी कंपनियों की मौजूदगी से इंकार नहीं किया जा सकता.    

बढ़ जाएगी प्रतियोगिता
फिलहाल भारत के EV कारों के बाजार में टाटा मोटर्स का दबदबा है. महिंद्रा भी इस दिशा में तेजी से काम कर रही है. टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड (TPEML) की देश के EV मार्केट में 73 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. इस वित्त वर्ष में कंपनी 53,000 से अधिक EV बेच चुकी है. वैसे, टाटा मोटर्स के पोर्टफोलियो में ईवी की हिस्सेदारी केवल 12 फीसदी है, लेकिन इसमें तेजी से विस्तार हो रहा है. टाटा और महिंद्रा दोनों ने EV पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए योजनाएं तैयार की हैं. फिलहाल, उनके सामने ज्यादा प्रतियोगिता नहीं है. लेकिन नई EV नीति का फायदा उठाने के लिए जब Tesla जैसी विदेशी कंपनियां भारत में कदम रखेंगी, तो निश्चित तौर पर उन्हें कड़ी टक्कर मिलेगी. उनकी बाजार हिस्सेदारी भी प्रभावित होगी.

टेस्ला को ऐसे होगा फायदा   
भारत अब तक इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर भारी-भरकम आयात शुल्क लेता रहा है. कुछ वक्त पहले आई एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 30 लाख रुपए तक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर 60% तक टैक्स लगता है. कीमत ज्यादा होने पर टैक्स की दर भी बढ़ जाती है. अमेरिकी बाजार में Tesla की कारों के मॉडल की प्राइज रेंज करीब 27 लाख से 2 करोड़ रुपए तक हैं. इसमें कंपनी के मॉडल 3, मॉडल Y, मॉडल X और मॉडल S शामिल हैं. मॉडल 3 की कीमत सबसे कम है. यदि इम्पोर्ट ड्यूटी के हिसाब से देखें, तो टेस्ला की कुछ कारों के बेस मॉडल पर ही 60% टैक्स लगता. इस तरह कारों की कीमत भारत में काफी ज्यादा हो जाती, लेकिन अब टेस्ला को इतनी इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं देनी होगी.  

इस मामले में है एडवांटेज 
अब तक Tesla जैसी विदेशी कंपनियां केवल इसलिए अपनी कारों को भारत लाने से बचती रही थीं कि इम्पोर्ट ड्यूटी काफी ज्यादा थी. इस वजह से भारतीय कंपनियों के सामने चुनौतियां कम थीं, लेकिन आने वाले समय में तस्वीर पूरी तरह से बदल जाएगी. चीनी कंपनी BYD भारत में पहले ही एंट्री कर चुकी है. अब Tesla के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है. इसी तरह कुछ और कंपनियां भी भारत में अपनी कारों को उतारने का फैसला ले सकती हैं. जिसका सीधा असर टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों पर होगा. इसी वजह से ये कंपनियां आयात शुल्क में राहत का विरोध कर रही थीं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि Tesla के आने से घरेलू कंपनियों को चुनौती मिलना लाजमी है, लेकिन कीमत के मामले में उनके पास एडवांटेज रहेगी. टाटा या महिंद्रा जितनी सस्ती EV तैयार कर रही हैं, उसे मैच करना फिलहाल टेस्ला के लिए संभव नहीं होगा. हां, इतना जरूर है कि समय के साथ यह एडवांटेज कम हो सकती है.


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