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Pre Pack वस्तुओं पर GST के बाद मिडिल क्लास का क्या होगा हाल, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन वस्तुओं पर जीएसटी लगाना मीडिल क्लास के लिए एक अभिशाप से कम नहीं होगा.

अभिषेक शर्मा 3 years ago

नई दिल्लीः हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल ने प्री पैक होने वाले कई आइटम्स जैसे कि मीट (फ्रोजन छोड़कर), मछली, दही, पनीर, शहद, सूखी फलीदार सब्जियां, सूखे मखाने, गेहूं, अन्य अनाज और प्री-पैक और लेबल वाली वस्तुओं पर 5 फीसदी वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लगाने का फैसला किया है. इस फैसले का विरोध होने लगा है क्योंकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन वस्तुओं पर जीएसटी लगाना मीडिल क्लास के लिए एक अभिशाप से कम नहीं होगा.

होने लगा है विरोध

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा कि व्यापारी जीएसटी काउंसिल के हालिया फैसले के खिलाफ हैं, जिसमें प्री-पैक और प्री-लेबल वाले खाद्यान्न, दही, बटर मिल्क आदि पर 5 फीसदी जीएसटी लगाया गया है. व्यापारियों के इस बड़े संगठन ने जीएसटी काउंसिल, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ-साथ राज्यों के वित्त मंत्रियों से इस फैसले को वापस लेने की अपील की है CAIT ने आगे बढ़ने के लिए स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा करने का प्रस्ताव रखा है.

खाद्य पदार्थों को 5 फीसदी के टैक्स स्लैब के तहत लाने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए CAIT ने आरोप लगाया कि इस निर्णय से छोटे निर्माताओं और व्यापारियों की कीमत पर बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा होगा. व्यापारी संगठन ने कहा कि इसका न केवल व्यापार बल्कि कृषि क्षेत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

निर्णय की निंदा करते हुए  बीसी भरतिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवीण खंडेलवाल, महासचिव, CAIT ने एक संयुक्त बयान में कहा कि इस कदम का खाद्यान्न व्यापारियों पर कई प्रभाव पड़ेगा और नागरिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा.  

विशेषज्ञों ने कहा कि गैर-ब्रांडेड उत्पादों पर जीएसटी वृद्धि निश्चित रूप से उन उत्पादों की कीमत बढ़ाने जा रही है जो सबसे निचले स्तर पर मौजूद व्यक्ति द्वारा प्रयोग किए जाते हैं. इससे इन उत्पादों की खपत को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है.

इन पर लगेगा 18 फीसदी जीएसटी

इसी तरह काउंसिल ने बैंकों द्वारा जारी की जाने वाली चेक बुक पर 18 फीसदी जीएसटी लगाने की बात कही है. एटलस सहित मानचित्र और चार्ट पर 12 फीसदी का शुल्क लगेगा. हालांकि अनपैक्ड, अनलेबल और अनब्रांडेड सामान जीएसटी से मुक्त रहेगा.

महंगाई बढ़ जाएगी

यस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट इंद्रनील पान ने कहा कि, "हालांकि इस नीति की घोषणा से सरकार की टैक्स से होने वाली कमाई बढ़ जाएगी, लेकिन आम जनता के लिए यह सबसे खराब समय में आ सकता है जब आबादी का एक बड़ा वर्ग उच्च मुद्रास्फीति से लड़ रहा है.”

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुख्य अर्थशास्त्री प्रसेनजीत के बसु ने कहा कि, "5 फीसदी जीएसटी दर से इन उत्पादों की कीमतों में एकमुश्त वृद्धि होगी, हालांकि 5 फीसदी से भी कम के बाद से निर्माता और विक्रेता भी इनपुट क्रेडिट का दावा करने में सक्षम होंगे."

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष प्रदीप मुल्तानी ने कहा कि कुछ बुनियादी खाद्य पदार्थों पर जीएसटी दर, जिन्हें शुरू में जीएसटी से छूट दी गई थी, यानी 'जीरो टैक्स' के तहत रखा गया था, से बुनियादी खपत की लागत में वृद्धि होने की संभावना है.  इससे इकोनॉमी में डिमांड पर असर पड़ेगा और महंगाई बढ़ने की संभावना है.

बढ़ गया है टैक्स कलेक्शन

केंद्र सरकार के लिए हाल के दिनों में जीएसटी फलदायी रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क था कि आवश्यक खाद्य पदार्थों को ऐसे समय में जीएसटी के तहत लिया गया है जब हर महीने सरकारी संग्रह बढ़ रहा है. जून महीने के लिए जीएसटी राजस्व 56 फीसदी सालाना आधार पर बढ़कर लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि मई में यह 1.4 लाख करोड़ रुपये था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जून के आंकड़ों का खुलासा करते हुए कहा कि मासिक संग्रह अब 1.4 लाख करोड़ के आंकड़े से नीचे नहीं जा रहा है.

इसमें सीजीएसटी 25,306 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 32,406 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 75,887 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजा उपकर 11,018 करोड़ रुपये रहा है. नियमित और तदर्थ निपटान के बाद जून में केंद्र और राज्यों का कुल सीजीएसटी 68,394 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 70,141 करोड़ रुपये रहा.

सरकार ने मजबूत संग्रह के लिए आर्थिक सुधार, चोरी-रोधी गतिविधियों और विशेष रूप से नकली बिलर्स के खिलाफ कार्रवाई से इजाफा होने की बात कही है.


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