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चीनी मोबाइल कंपनी Vivo कैसे बन रही है देश की अखंडता-संप्रभुता के लिए खतरा?

ED ने 3 हफ्ते पहले Vivo के करीब 44 दफ्तरों, ठिकनों पर छापेमारी की थी, कंपनी पर टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का शक था. इस कहानी की शुरुआत दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने की थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: भारत में काम कर रही चीन की मोबाइल कंपनी Vivo India से देश की अखंडता और संप्रभुता को खतरा है, ये आरोप प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने लगाए हैं. ED ने पिछले हफ्ते दिल्ली हाई कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल किया था, जिसमें उसने कहा था कि भारत में काम कर रहीं 22 कंपनियों के चीन को संदेहास्पद ट्रांसफर की जांच की जा रही है. 
ED का कहना है कि ये 22 कंपनियां हॉन्ग कॉन्ग में विदेशी कंपनियों द्वारा चलाई जा रही हैं. इसमें बड़े पैमाने पर पैसा चीन भेजा गया है जो कि संदेह पैदा करता है और जिसकी जांच की जा रही है.  ईडी को संदेह है कि वीवो ने भारत में नियमों के खिलाफ जाकर अवैध रूप से बिजनेस करके पैसा कमाया और विदेशों में भेजकर दूसरे बिजनेस में लगाया.

कैसे शुरू हुआ मामला
आपको बता दें कि ED ने 3 हफ्ते पहले Vivo के करीब 44 दफ्तरों, ठिकनों पर छापेमारी की थी, कंपनी पर टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का शक था. इस कहानी की शुरुआत दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने की थी. EOW ने जम्मू-कश्मीर में मौजूद वीवो के एक डिस्ट्रीब्यूटर्स Grand Prospect International Communication Pvt Ltd (GPICPL) के खिलाफ केस दर्ज किया था. इसमें आरोप लगाया गया था कि इस कंपनी के कुछ चीनी शेयरहोल्डर्स ने फर्जी तरीके से अपनी पहचान के दस्तावेज तैयार किए हैं, EOW की शिकायत पर ईडी ने वीवो के खिलाफ एक्शन शुरू किया और PMLA के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी. ईडी को शक है कि यह फर्जीवाड़ा शेल या फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल करके अवैध रूप से कमाए गए धन की हेराफेरी करने के लिए की गई थी. 

22 फर्जी कंपनियों से जुड़े तार 
ED ने इस कंपनी GPICPL और 22 चीनी कंपनियों के बीच तार जोड़े, जिसने फर्जी तरीके से खुद को Vivo India का डिस्ट्रीब्यूटर बनाकर पेश किया था. ED ने बताया है कि  GPICPL के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोप में पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है. ED ने बताया कि ये जांच के दौरान निकलकर आया कि करीब 22 कंपनियों के साथ कई राज्यों में वीवो ने इसी तरह का तानाबाना बुन रखा था. ED ने ये भी बताया कि नई दिल्ली स्थित चार्टर्ड एकाउंटेंट, जिसने GPICPL को शामिल करने में मदद की थी, उसने अगस्त 2014 में वीवो के लिए भी ठीक यही काम किया था. इसके अलावा GPICPL ने कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय में संपर्क के लिए जिस ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया वो भी peter.ou@vivoglobal.com है, जिससे ये साफ हो जाता है कि Vivo और GPICPL में कनेक्शन है. 

जांच से पहले ही भाग खड़े हुए चीनी अफसर
इससे तस्वीर साफ हो जाता ही कि GPICPL को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाया गया था जिसका वीवो से गहरा रिश्ता है. ED ने हाई कोर्ट में ये भी दावा किया कि GPICPL के 
के दो डायरेक्टर्स जेंगशेन ओऊ और जैंग जी  Zhengshen Ou और Zhang Jie ने दिल्ली पुलिस के FIR दर्ज करने के 10 दिन बाद ही भारत छोड़ दिया. दिल्ली पुलिन ने FIR 
5 दिसंबर 2021 को दर्ज की थी जबकि ये दोनों डायरेक्टर 15 दिसंबर 2021 को देश छोड़कर भाग खड़े हुए, जबकि उन्हें जांच में सहयोग देना चाहिए था. इसके बाद ED ने 3 फरवरी को मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया. जब GPICPL के बैंक अकाउंट को खंगाला गया तो सामने आया कि उसके दो बैंकों के तीन अकाउंट्स में 1487 करोड़ रुपये थे, जिसमें 1200 करोड़ रुपये Vivo Mobile India Pvt Ltd को ट्रांसफर किए गए. 

कई और कंपनियों पर भी एक्शन
इससे पहले भी जांच एजेंसी ED ने चीनी स्मार्टफोन कंपनी Xiaomi के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई करते हुए 5551 करोड़ रुपये जब्त किए थे. Xiaomi के अलावा 2020 से लेकर अब तक 500 से ज्यादा चीनी कंपनियों के अकाउंट्स की जांच की गई है, इसमें ZTE, Vivo, OPPO, Huawei, Alibaba Group की कई भारतीय यूनिट्स हैं.

VIDEO: भारतीय तेजी से छोड़ रहे अपनी नागरिकता

 


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