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जीवाश्‍म ईंधन का हिसाब किताब रखने के लिए बनी ग्लोबल रजिस्ट्री, जानिए इससे क्या होगा

फिलहाल इस रजिस्ट्री में 89 देशों में 50,000 से ज्यादा क्षेत्रों का डेटा लिया गया है, जो वैश्विक उत्पादन का 75% है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: जीवाश्म ईंधन आपूर्ति पर पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है, क्योंकि पहली बार उत्पादन और भंडार से उत्सर्जन को सार्वजनिक डेटाबेस के रूप में प्रकाशित किया गया है. कार्बन ट्रैकर और ग्‍लोबल एनर्जी मॉनिटर ने पहली बार इस तरह के डेटा को प्रकाशित किया है. इस ट्रैकर से ये फायदा होगा कि हमें अबतक ये नहीं मालूम था कि दुनिया में कहां पर कितना फॉसिल फ्यूल या जीवाश्म ईंधन मौजूद है, लेकिन अब इसकी जानकारी मुहैया है. 

जीवाश्म ईंधन की ग्लोबल रजिस्ट्री में क्या है? कार्बन ट्रैकर और ग्‍लोबल एनर्जी मॉनिटर की ओर से जारी नए डेटा से पता चलता है कि दुनिया के भंडार के उत्पादन और दहन से 3.5 ट्रिलियन टन से ज्यादा ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होगा, यह वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये निर्धारित कार्बन बजट के बचे हुए हिस्‍से के सात गुना से भी ज्‍यादा होने के साथ-साथ औद्योगिक क्रांति से लेकर अब तक उत्‍पन्‍न हर तरह के प्रदूषण से ज्यादा है. कार्बन ट्रैकर और ग्‍लोबल एनर्जी मॉनिटर की ओर से जारी ग्‍लोबल रजिस्‍ट्री ऑफ फॉसिल फ्यूल्‍स में उपलब्ध ताजा डेटा से ये जानकारी मिली है. 

जलवायु परिवर्तन की नीति में बदलाव आएगा 
दरअसल, अबतक जलवायु परिवर्तन नीतियों का फोकस सिर्फ तेल, गैस और कोयले की मांग और खपत को कम करने पर ही रहा है. लेकिन उन ईंधन की आपूर्ति को नजरअंदाज कर दिया है. उदाहरण के लिए, पेरिस समझौता में जीवाश्म ईंधन उत्पादन का भी जिक्र नहीं है, इस तथ्य के बावजूद कि इस तरह के ईंधन वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 75% से अधिक हिस्सा हैं. UNEP प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट ने शेष कार्बन बजट के संबंध में एक बड़े जीवाश्म ईंधन की व्यापकता के तथ्य को स्थापित किया है, जबकि IEA ने दिखाया है कि अगर हमें ग्‍लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है तो कोई नया फील्‍ड विकसित नहीं किया जा सकता है और कुछ मौजूदा फील्‍ड्स को समय से पहले ही सेवा से बाहर करना होगा.

जलवायु नीति निर्माण प्रक्रिया में होगी शामिल 
हालांकि नीति निर्माताओं और सिविल सोसाइटी के पास मौजूदा फील्‍ड्स को चरणबद्ध ढंग से बाहर करने के तरीकों के लिए असेट लेवल डेटा की कमी थी. इसके अलावा बाजारों के पास भी ऐसी सूचना की कमी थी जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि कौन सा असेट सम्‍पत्ति इस्तेमाल से बाहर होने वाला है.
डेटा के इस अंतर की भरपाई करने के लिए जीवाश्‍म ईंधनों की ग्‍लोबल रजिस्‍ट्री बनाई गई है. यह दुनिया भर में जीवाश्म ईंधन के उत्पादन और भंडार का पहला सार्वजनिक डेटाबेस है जो कार्बन बजट पर उनके प्रभाव पर नजर रखता है. रजिस्ट्री अपनी धारणाओं और गणनाओं में पूरी तरह से नीति तटस्थ और पारदर्शी है, और ऐसी संभावना है कि आने वाले समय में यह अंतरराष्ट्रीय जलवायु नीति निर्माण प्रक्रिया के भीतर औपचारिक रूप से शामिल हो जाएगी.

89 देशों का डेटा लिया गया
फिलहाल इस रजिस्ट्री में 89 देशों में 50,000 से ज्यादा क्षेत्रों का डेटा लिया गया है, जो वैश्विक उत्पादन का 75% है. एक जरूरी बात ये सामने आई है कि अमेरिका और रूस के पास पूरे वैश्विक कार्बन बजट को खत्म करने के लिए पर्याप्त जीवाश्म ईंधन भंडार है, भले ही दुनिया के बाकी देश अपना उत्पादन तुरंत ही बंद कर दें. रजिस्ट्री में शामिल किए गए 50,000 क्षेत्रों में से, उत्सर्जन का सबसे शक्तिशाली स्रोत सऊदी अरब में गावर ऑयल फील्ड है. जो हर साल लगभग 525 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन का उत्पादन करता है. 

'गैस उत्पादन को खत्म करने में मदद मिलेगी'
तुवालु के न्‍याय, संचार और विदेश मामलों के मंत्री साइमन कोफे ने कहा “अब हमारे पास एक ऐसा औजार है जिससे हमें कोयले, तेल और गैस के उत्‍पादन का प्रभावी ढंग से खात्‍मा करने में मदद मिल सकती है. ग्‍लोबल रजिस्‍ट्री से सरकारों, कंपनियों और निवेशकों को वैश्विक तापमान में वृद्धि को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये अपने जीवाश्‍म ईंधन उत्‍पादन को नियंत्रित करने संबंधी फैसले लेने में मदद मिलेगी. इस तरह से हमें अपनी वैश्विक बिरादरी के सभी देशों के साथ-साथ द्विपीय आवासों को खत्म होने से रोकने में मदद मिलती है. हम यहां प्रशांत क्षेत्र में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के केवल 0.03% के लिए जिम्मेदार हैं और फिर भी, हम अपने ग्रह और आने वाली पीढ़ियों की भलाई के लिए अपना हिस्से का काम करने के लिए. सरकारों के रूप में, हम केवल अपनी प्रतिबद्धताओं के साथ जवाबदेही, सुसंगतता और संरेखण का प्रदर्शन करके वास्तविक जलवायु नेतृत्व दिखा सकते हैं. पेरिस समझौते ने अंतर्राष्ट्रीय जलवायु शासन में एक महत्वपूर्ण मोड़ को चिह्नित किया। वैश्विक रजिस्ट्री एक और कदम है.”

'जोखिम का सटीक आंकलन होगा'
कार्बन ट्रैकर के संस्‍थापक और रजिस्‍ट्री स्‍टीयरिंग कमेटी के अध्‍यक्ष मार्क कैम्‍पानेल ने कहा कि ग्‍लोबल रजिस्ट्री, राष्ट्रीय जलवायु नीतियों के साथ उत्पादन निर्णयों को जोड़ने के लिए सिविल सोसाइटी को सक्षम करके जीवाश्म ईंधन के विकास के लिए सरकारों और कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाएगी. समान रूप से, यह बैंकों और निवेशकों को विशेष संपत्तियों के फंसे होने के जोखिम का अधिक सटीक आंकलन करने में सक्षम करेगी. 

'सरकारें जिम्मेदार ठहराई जाएंगी'
नेचुरल रिसोर्स गवर्नेंस इंस्‍टीट्यूट की अध्‍यक्ष और चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर सुनीता कैमल ने कहा ने कहा कि रजिस्ट्री जीवाश्म ईंधन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी के लिए खुली पहुंच की दिशा में एक बढ़िया कदम है. एक निष्पक्ष वैश्विक ऊर्जा रूपांतरण के लिए अधिक पारदर्शिता, राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और जीवाश्म ईंधन उत्पादन के लिए मजबूत जवाबदेही की जरूरत होती है. अब नागरिकों और निवेशकों के पास सरकारों और कंपनियों को उनके निर्णयों के लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए एक हथियार है.

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