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World Health Day: आर्थिक विकास से इस तरह संवर रहा हेल्थकेयर सेक्टर 

भारतीय हेल्थकेयर बाजार 2022 में 8.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था और 2023 से 2030 के बीच 19.29% CAGR से बढ़ने की उम्मीद है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

हेल्थकेयर भारत के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक के रूप में विकसित हुआ है. बढ़ती हुई सेवाओं और खर्च के परिणामस्वरूप भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है. 2022 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 2021-22 में स्वास्थ्य पर भारत का सार्वजनिक व्यय सकल घरेलू उत्पाद का 2.1% था, जो 2020-21 के 1.8% की तुलना में अच्छी बढ़ोतरी थी. आर्थिक विकास स्वास्थ्य देखभाल उपयोग सहित कई पहलुओं में भारतीय लोगों के बीच अंतर को कम कर रहा है. इस तथ्य को देखते हुए कि भारत स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक उभरते हुए देश के रूप में विकसित हो रहा है. हमने कई उल्लेखनीय परिवर्तन देखे, जो उद्योग के आसपास हो रहे हैं. चाहे वह चिकित्सा उपचार में प्रौद्योगिकी को अपनाना हो या पारंपरिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना. भारतीय हेल्थकेयर बाजार 2022 में 8.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था और 2023 से 2030 के बीच 19.29% की संचयी वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने का अनुमान है.

पेशंट केयर में आई क्रांति 
डॉ हिमांशु गुप्ता, MS. MCh Orth ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, AmiCare Hospital के आर्थोस्कोपी और स्पोर्ट्स इंजरी स्पेशलिस्ट के अनुसार, "आर्थिक विकास ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को एक ऐसे स्थान पर पहुंचने की अनुमति दी है जहां हम उन बीमारियों के लिए उपचार प्रदान कर सकते हैं, जो कुछ दशक पहले तक नामुमकिन लगती थीं. आज, हम गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों का आसानी से इलाज कर सकते हैं. चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी विकास के परिणामस्वरूप रोगी देखभाल (पेशंट केयर) में एक क्रांति आई है. हमने देखा है कि अब हम इतनी सटीकता के साथ ऑपरेशन और उपचार कर सकते हैं कि वे अन्य अंगों को हानि  नहीं पहुंचाते और मरीज बहुत जल्दी ठीक हो जाते हैं.

आयुर्वेद उद्योग में आई तेजी
Royal Bee Natural Products के MD, अंजने अग्रवाल ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा उद्योग आज के समय में उभरती नई चिकित्सा संस्थाओं के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है. आज के समय में ज्यादा से ज्यादा लोग आयुर्वेद के अनेक लाभों के कारण पुराने चिकित्सा उपचारों की ओर अपना रुख मोड़ रहे है. आयुर्वेद ने दुनिया भर में पहचान हासिल की है, आयुर्वेद उद्योग COVID-19 महामारी के बाद से लगभग 90% तक बढ़ गया है. हर साल, 78 विभिन्न देशों के लगभग 20 लाख रोगी चिकित्सा देखभाल के लिए भारत आते हैं, जो की केवल आर्थिक विकास के द्वारा संभव हो पाया है”. उन्होंने आगे कहा, "मेरी राय में आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोगकर्ताओं का अनुपात एलोपैथिक दवाओं के समान हो गया है  और यह आर्थिक विकास और आयुर्वेद के बारे में लोगों की समझ में वृद्धि के कारण ही संभव हो पाया है."

मेडिकल इंडस्ट्री को मिलेगा लाभ
धारिशा आयुर्वेदा के को-फाउंडर और मार्केटिंग डायरेक्टर, नमन धमीजा कहते हैं, “भारत के लोगों में स्वास्थ्य परिणामों में बहुत सुधार हुआ है, आर्थिक प्रगति ने इसे सभी के लिए संभव बना दिया है. बाजारों में दवाओं की एक बड़ी श्रृंखला मौजूद है, जो हर किसी के लिए आसानी से उपलब्ध है. चाहे वे गांवों में रहते हों या शहर में. भारत ने स्वास्थ्य सेवा की पहुंच और सामर्थ्य में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है. राष्ट्रीय स्तर की पहल के शुभारंभ के साथ, हमारे देश ने कुछ घातक बीमारियों को कम करने व उन्हें नियंत्रित और उन्मूलन करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है. महामारी से भारत में आयुर्वेदिक उत्पादों के इस्तेमाल में वृद्धि आई है, जिससे लोगों को अपनी बीमारियों को दूर करने का एक सुरक्षित तरीका मिल गया है. लोग अब ऐसी दवाओं पर भरोसा करते हैं, जो न केवल उनकी बीमारियों का इलाज करे बल्कि उन्हें पूरी तरह से ठीक भी करे. यह पारंपरिक भारतीय दवाओं को वैश्विक स्तर पर एक बाजार विकसित करने में भी सक्षम बनाता है, जिससे भारत के चिकित्सा उद्योग को लाभ होगा”.

चिकित्सा क्षेत्र में नए अवसर
वेस्टा एल्डर केयर के फाउंडर, राहुल मिश्रा ने कहा, “भारत वर्तमान में चिकित्सा उद्योग के एक बड़े दौर से गुजर रहा है. हम देख रहे हैं कि लोग लाइलाज बीमारियों पर जीत हासिल कर रहे हैं और लोग लंबा जीवन जी रहे हैं. लोग कह सकते हैं कि भारत जैसे देश के लिए यह चुनौतीपूर्ण है लेकिन मैं देखता हूं कि इस स्थिति ने चिकित्सा क्षेत्र के लिए भी एक अवसर पैदा किया है. जिसकी वजह से बुजुर्ग स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी अधिक निवेश किया जाता है. हर कुछ समय बाद, उनकी सहायता करने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए नई स्वास्थ्य-तकनीक सेवाएं विकसित की जाती हैं. यह सब केवल  देश के आर्थिक विकास द्वारा संभव हो पाया है. हम एक ऐसे राष्ट्र के रूप में विकसित हुए हैं जो हमारी अपनी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है”. उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य उद्योग में महत्वपूर्ण प्रगति होती है. सुदूर क्षेत्रों के लोगों को अब अपनी बीमारियों का इलाज कराने के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं है. ई-स्वास्थ्य उद्योग के 2025 तक 10.6 अरब डॉलर मूल्य का होने की उम्मीद है”.


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