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BW WEISA: महिलाओं का अनपेड केयर जीडीपी में निभा सकता है एक अहम भूमिका: सुधा शिवकुमार

सुधा ने कहा कि घर पर एक महिला मसाला बनाती है. उसे अपने घर के आसपास उसे बेचती है और वो वहां से अच्‍छा कमाने लगती है. अब वो अपने कारोबार को आगे ले जाना चाहिए. इसके लिए उसे मेंटर की जरूरत होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Business world के Women Entrepreneur in Rappenrurs Summit and Award कार्यक्रम में कई महिला आंत्रप्रेन्योरशिप महिलाओं ने भाग लिया. इस कार्यक्रम में Ficci की FLO की प्रेसीडेंट सुधा शिवकुमार ने कई अहम बातें कहीं. उन्‍होंने पेड और अनपेड महिलाओं के रिप्‍लेसमेंट से लेकर उनके जीडीपी में योगदान को लेकर कई अहम बातें कहीं. उन्‍होंने कहा कि अगर हम इस क्षेत्र में काम करते हैं तो हम उसका असर अपनी जीडीपी ग्रोथ में देख सकते हैं. उन्‍होंने महिलाओं के आगे बढ़ने को मेंटरशिप की अहमियत पर भी बात की. 

आखिर क्‍या है पेड और अनपेड वर्किंग 
Ficci की FLO की प्रेसीडेंट सुधा शिवकुमार ने कहा कि आज हमें ये समझना होगा कि जब तक देश की पेड महिलाओं को अनपेड महिलाओं के साथ रिप्‍लेस नहीं किया जाएगा तब तक हम और तेजी से आगे नहीं बढ़ सकते हैं. मैं आप लोगों को अनपेड केयर के बारे में बताना चाहती हूं कि अनपेड केयर वो केयर होती है जहां एक वर्किंग वुमन अपने 80 प्रतिशत समय को अनपेड केयर में बिताती है. जबकि अनपेड केयर में एक पुरुष 20 प्रतिशत समय बिताता है.

अगर हम उस 80 प्रतिशत समय को इस्‍तेमाल करते हैं तो हम जीडीपी को 8 से 10 प्रतिशत तक ले जा सकते हैं.  आज दुनिया का हर देश अपनी जीडीपी को तेजी से आगे ले जाना चाहता है. इसका एकमात्र तरीका ये है कि आप इस अनपेड केयर को क्‍वांटीफाइड कीजिए और इसका इस्‍तेमाल किजिए. इसे या तो अपॉर्चुनिटी बेस पर किया जा सकता है या इसे रिप्‍लेसमेंट बेस पर किया जा सकता है. 

महिला आंत्रप्रेन्योरशिप से कैसे पैदा होते हैं अवसर?  
Ficci की FLO की प्रेसीडेंट सुधा शिवकुमार ने कहा कि अगर अपार्चुनिटी बेस पर देखें तो एक न्‍यक्लियर फैमिली जहां तीन से चार लोग होते हैं. वहां मदर और फादर दोनों लोग कमाते हैं. अगर उनके पास स्‍कूटर होता है तो वो कार के लिए प्‍लान करते हैं अगर उनके पास कार होती है तो वो उससे आगे की सोचते हैं. लेकिन सोचिए अगर उनके साथ उनके माता पिता आ जाते हैं जो अलजाइमर से पीडि़त होते हैं तो घर पर कौन रहेगा. सामान्‍य तौर पर ऐसे में महिलाएं ही घर पर रहती हैं. इस तरह की परिस्थिति को अपार्चुनिटी लॉस कहा जाता है. अगर इस अपार्चुनिटी लॉस को हम मापें तो ये हमारी जीडीपी का 6.5 प्रतिशत बनता है. इसलिए महिलाएं जो भूमिका निभाती हैं वो बेहद महत्‍वूपर्ण होती है.

आंत्रप्रेन्योरशिप से पैदा होने वाले अवसर 
 अगर आज किसी तरह की आंत्रप्रेन्योरशिप शुरू होती है तो उससे कई तरह के अवसर पैदा होते हैं. इससे इंश्‍योरेंस, अपस्किलंग, जॉब से लेकर कई और तरह के अवसर पैदा होते हैं. बतौर एक आंत्रप्रेन्योरशिप हम लोग एक नए आईडिया की ओर देखते हैं. हम कोशिश करते हैं कि कैसे एक स्‍टार्टअप को बीट किया जाए. मेरा मानना है कि एक महिला का दिमाग कई तरह के अवसरों को खोलता है. मैं मानती हूं कि मेंटरशिप भी अपनी एक अहम भूमिका निभाता है. आपने देखा होगा कि घर पर एक महिला मसाला बनाती है. वो अपने घर में मसाला बनाती है और अपनने घर के आसपास उसे बेचती है और वो वहां से अच्‍छा कमाने लगती है. अब वो अपने कारोबार को आगे ले जाना चाहिए. उसे ऑनलाइन ले जाना चाहिए. ये यात्रा कई महिलाओं की है. महिलाएं को अगर एक लंबा रास्‍ता तय करना है तो उसके लिए आपको मेंटरशिप की जरूरत है. 

ये भी पढ़ें: BW Weisa: डॉ. बत्रा ने समझाया कैसे आंत्रप्रेन्योरशिप महिलाओं के लिए कठिन है और आसान भी
 


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