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जब कभी भी दुनिया में क्राइसेस आता है तो कस्‍टमर की पसंद में बदलाव आता है

पैनल में मौजूद ज्‍यादातर लोगों ने कहा कि ये साल 2022 से काफी बेहतर रहा है. इस साल में जहां रिकवरी देखने को मिल रही है वहीं दूसरी ओर आने वाले समय में सुधार भी देखने को मिल रहा है 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Disrupt के 40Under40 इवेंट के सबसे पहले पैनल The Outlook for 2024 के डिस्‍कसन में मौजूद सभी कंपनियों के प्रमुख लोगों ने अहम बात कही. इस पैनल में  Virohan के को फाउंडर और सीटीओ, नलिन सलूजा, Betterhalf.ai के को फाउंडर एंड सीईओ पवन गुप्‍ता, Smart Joules के फाउंडर एंड CEO, अर्जुन गुप्‍ता और Fitpass के को फाउंडर अक्षय वर्मा मौजूद रहे. सभी ने वर्ष 2023 और आने वाले साल 2024 को लेकर अपनी बात कही. 

आने वाला साल होगा और बेहतर 
Virohan के को फाउंडर और सीटीओ, नलिन सलूजा ने कहा कि जहां तक बात है विरोहन की बात करें तो मैं कहना चाहूंगा कि वर्ष 2023 एक रेजीलिएंस का साल रहा है. यूरोप और अमेरिका में हमें तनाव देखने को मिला है लेकिन भारत की अर्थव्‍यवस्‍था अच्‍छी स्थिति में देखने को मिली है. सबसे दिलचस्‍प बात ये है कि अब अगर आने वाले साल की स्थिति को देखें तो उसे लेकर मैं कहना चाहूंगा कि पिछले पांच सालों में जिस तरह से देश का मनी फ्लो बदला है,  जितनी उम्‍मीद की गई थी ये उससे बुरा नहीं था. मुझे उम्‍मीद है कि आने वाला साल एक अच्‍छा साल होगा, और ये पिछले साल से और बेहतर होगा. 

भारत की ग्रोथ की स्‍पीड बहुत तेज है
Betterhalf.ai के को फाउंडर एंड सीईओ पवन गुप्‍ता ने कहा कि हमारे आसपास जो स्‍टार्टटप हैं उनमें ज्‍यादातर लोग बहुत अच्‍छा कर रहे हैं उनमें जो मॉडरेट हैं वो अपने में सुधार कर रहे हैं, और जो खराब थे वो सिस्‍टम से हट चुके हैं. उन्‍होंने कहा कि अगर हम 2022 की स्थिति को हम देखें तो उसमें लगता ये था कि ये ग्रोथ 2025 तक पूरी हो पाएगी. लेकिन बीते एक से डेढ़ साल में भारत की ग्रोथ की जो स्‍पीड रही है वो बहुत अच्‍छी रही है.

हां 2022 एक कठिन साल था. जबकि 2023 एक रिकवरी साल की तरह सामने आया था. इस साल में हमने देखा कि प्रोडक्‍ट क्‍वॉलिटी में सुधार हुआ है. कंपनियों की बैलेंस शीट कमजोर थी तो ऐसे में उन्‍होंने कई प्‍वॉइंट पर काम किया है. कोविड के दौरान हमने देखा कि 50 प्रतिशत तक स्‍टार्टअप बंद हो गए थे. लेकिन अब हम देख रहे हैं कि स्थितियां सुधर रही हैं, फंडिंग सुधर रही हैं.

ज्‍यादातर बिजनेस हाउस डीकार्बनाइज होना चाहते हैं
Smart Joules के फाउंडर एंड CEO, अर्जुन गुप्‍ता ने कहा कि हम क्‍योंकि क्‍लाइमेट टेक को लेकर काम करते हैं तो ऐसे में मैं कहना चाहूंगा कि इस साल क्‍लाइमेट टेक को लेकर काम करने वाले स्‍टार्टअप की संख्‍या में अच्‍छी बढ़ोतरी हुई है. मैं इसे तीन पहलुओ पर देखना चाहूंगा जिसमें पहला है डिमांड, दूसरा है टैलेंट और तीसरा है इनवेस्‍टर. जहां तक बात करें डिमांड की तो वो इस क्षेत्र में जबर्दस्‍त है. सभी तरह के बिजनेस डी-कार्बनाइज होना चाहते हैं.

जहां तक बात करें टैलेंट की तो आज कई सारे लोग हॉट टैलेंट में जाने की सोचते हैं, तो ऐसे में हम देख रहे हैं कि कई दूसरी इंडस्‍ट्री से लोग हमारे वहां आ रहे हैं. जहां तक बात करें हमारे स्‍टार्टअप की तो इसे 9 साल हो गए हैं लेकिन इस साल के मुकाबले हायरिंग करना पहले कभी आसान नहीं रहा. जहां तक बात करें फंडिंग की तो इस साल मीडिल स्‍टेज को छोड़ दें तो बाकी स्‍टेज में बेहतरीन फंडिंग देखने को मिली है. 

क्राइसेस में बदलती पसंद को पहचानना अहम 
Fitpass के को फाउंडर अक्षय वर्मा ने कहा कि मैंने अपने करियर की शुरुआत 2008 में की थी जब पूरी दुनिया में बहुत बड़ा फाइनेंशियल क्राइसेस आया था. उस क्राइसेस के दौरान मैने देखा कि ऐसी स्थिति में कस्‍टमर अपनी प्रीफरेंस में बदलाव लाता है. उस दौरान हमने देखा कि कैडवरी से लेकर बॉनविले तक कई ऐसे ब्रैंड आए जो उससे पहले हमने नहीं देखे थे.

लोग क्‍योंकि घूमने नहीं जा सकते थे तो ऐसे में उन्‍होंने महंगी चॉकलेट और खाने पीने के सामान पर खर्च करना शुरू किया. जब कभी भी दुनिया में क्राइसेस आता है या इंटरेस्‍ट रेट महंगे होते हैं तो ऐसे में कस्‍टमर के टेस्‍ट में बदलाव को पहचानने की क्षमता रखने वाले ही लंबे समय तक आगे बढ़ सकते हैं. पोस्‍ट कोविड हम ये भी देख रहे हैं कि फिटनेस एंड वेलनेस सभी के लिए महत्‍वपूर्ण हो गया है. हमारी इकोनॉमी अकेली वो इकोनॉमी है जो एग्रीकल्‍चर से सीधे सर्विसेज में पहुंच गई है. इसे कभी भी इंडस्‍ट्रीलाइजेशन का सामना नहीं करना पड़ा. 
 


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