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जब हम दुनिया को ज्ञान कीआंख से देखते हैं तो वो और भी व्‍यापक नजर आती है : सिस्‍टर जयन्‍ती 

उन्‍होंने प्रदूषण पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आखिर प्रदूषण हमें कैसे नुकसान पहुंचाता है. जो पक्षी हवा में उड़ रहे हैं उन्‍हें भी उसका सामना करना पड़ रहा है. उन्‍होंने कहा कि इसकी कोई सीमा नहीं है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Wellbeing के मुंबई में हो रहे इवेंट में The Brahmkumari's की एडिशनल एडमिनिस्‍ट्रेटिव हेड सिस्‍टर जयंती ने कई अहम बातें कहीं. उन्‍होंने कहा कि जब कभी हम जीवन में किसी समस्‍या को या अलग-अलग चीजों को दो आंखों से देखते हैं तो हमें सीमित चीजें नजर आती हैं. लेकिन जब हम उन्‍हीं चीजों को अपने ज्ञान की आंखों से या तीसरी आंख से देखते हैं तो ज्‍यादा व्‍यापक नजर आती हैं. इसलिए हमें हमेशा इसका इस्‍तेमाल करना चाहिए. उन्‍होंने अपनी स्‍पीच के दौरान वसुधैव कुटुंबकम से लेकर कई और चीजों के बारे में विस्‍तार से चर्चा की. 

 हमारे Disconnect होने से हो रही है समस्‍या 
The Brahmkumari's की एडिशनल एडमिनिस्‍ट्रेटिव हेड सिस्‍टर जयंती ने कहा, जैसा कि आप लोग जानते हैं अब से कुछ दिन बाद दुबई में क्‍लाइमेट चेंज को लेकर कांफ्रेंस होने जा रही है. 2009 से ये कांफ्रेंस हर साल हो रही है. मुझे लगता कि दुनिया की सारी समस्‍यायें एक तरह से Disconnect (अलग होने के कारण) हो रही हैं. हम खुद से डिसकनेक्‍ट हो चुके हैं, नेचर से डिसकनेक्‍ट हो चुके हैं. यहां तक कि हम अपने परिवार के या सगे संबंधियों से लेकर दोस्‍तों तक से खुद को डिसकनेक्‍ट समझ रहे हैं.

वहीं अगर हम अर्थव्‍यवस्‍था की बात करें तो भारत उसमें बहुत अच्‍छा कर रहा है लेकिन लंदन जहां मैं रहती हूं वहां मीडिल क्‍लॉस परिवारों के लिए फूड बैंक बने हुए हैं. आज वहां सड़कों पर भिखारी दिखाई दे रहे हैं, जिन्‍हें मैने आज से 5 या 7 साल पहले कभी नहीं देखा. लेकिन वहीं भारत की बात करें तो यहां लोग जो कनेक्‍ट हैं वहां इकोनॉमिक समृद्धी दिखाई देती है. मुझे इसकी जो सबसे बड़ी वजह दिखाई देती है वो ये है कि इंडिया की जड़ों में आज भी आध्‍यात्मिकता बसी हुई है. एक ऐसे पीएम हैं जो देश से बुहत गहराई से जुड़े हुए हैं.

डायवर्सिटी शब्‍द तो अच्‍छा है लेकिन इसकी अपनी चुनौतियां हैं
The Brahmkumari's की एडिशनल एडमिनिस्‍ट्रेटिव हेड सिस्‍टर जयंती ने कहा कि डायवर्सिटी एक शब्‍द जो सुनने में तो बहुत अच्‍छा लगता है लेकिन जब ये एक टीम के सामने आता है तो जिसमें अलग रंग, अलग भाषा, अलग बोली, जैसी चीजें सामने आती हैं तो ऐसे में काम करना आसान नहीं होता है. हमने 100 से ज्‍यादा देशों के लोगों से ये पूछा कि उनके अनुसार आखिर एक अच्‍छी दुनिया कौन सी है. मुझे लगता है कि ये किसी भी एनजीओ के द्वारा किया गया सबसे बड़ा सर्वे होगा.

इस सर्वे में हमने हर देश से एक मिलियन लोगों से सवाल पूछा और कहा कि आखिर आप एक बेहतर दुनिया को कैसे देखते हैं. ये प्रोजेक्‍ट तीन साल तक चला और इसे कंपाइल करने में ही 6 महीने से ज्‍यादा लग गए. मैं उसका सार पांच शब्‍दों में बताना चाहूंगी, जिसमें लोगों ने कहा कि वो सच की दुनिया चाहते हैं, प्‍यार की दुनिया चाहते हैं, आनंद की दुनिया, शांति की दुनिया, प्‍योरिटी की दुनिया, इसका मतलब है कि मन की शुद्धता, तन की शुद्धता. हम लोग खुशी की तलाश में बहुत सा पैसा खर्च करते हैं लेकिन कुछ समय बाद फिर महसूस करते हैं कि इससे तो खुशी आई ही नहीं.

कलयुग की अपनी पहचान और अपनी सोच है
 द ब्रहमकुमारी की एडिशनल एडमिनिस्‍ट्रेटिव हेड सिस्‍टम जयंती ने कलयुग के बारे में बात करते हुए कहा कि इसे सभी लोग जानते हैं इसे नकारात्‍मकता के सेंस में भी जाना जाता है. हो क्‍या रहा है कलयुग की चीजें हमारे अंदर आ रही हैं. एक बार मुझे यूरोपीय संसद में जाने का मौका मिला, जहां इस बात पर चर्चा हो रही है थी कि आखिर प्रदूषण हमें कैसे नुकसान पहुंचाता है. जो पक्षी हवा में उड़ रहे हैं उन्‍हें भी उसका सामना करना पड़ रहा है. उन्‍होंने कहा कि इसकी कोई सीमा नहीं है. ये पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है. जैसे सूर्य पूरी दुनिया को रौशनी को देता है उसी तरह से हमारे अंदर भी एक ऊर्जा है जो सभी को रौशनी देती है.

कोविड में ये देखने को मिला बेहतर 
The Brahmkumari's की एडिशनल एडमिनिस्‍ट्रेटिव हेड सिस्‍टर जयंती ने कहा कि कोविड के समय हमने कुछ चीजों को देखा, टाटा संस, इंफोसिस और दूसरी कई कंपनियों ने मेडिकल इक्‍विपमेंट के लिए काफी हद तक डोनेट किया सिर्फ अपने कर्मचरियों के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए भी किया. जमशेद जी टाटा ने इस कंपनी की स्‍थापना के वक्‍त जो प्रिंसिपल बनाए थे वो आज तक चले आ रहे हैं. हम लोग वसुधैव कुटुंबकम के बारे में बात करते हैं, सभी हमारे परिवार का हिस्‍सा हैं. 1937 में एक शख्‍स ने कुछ महिलाओं को अपनी सारी संपत्ति इसलिए दे दी क्‍योंकि वो मानता था कि महिलाएं ही समाज की लीडर हैं. तब से शुरू हुआ ब्रह्रमकुमारी का सफर आज भी जारी है. उन्‍होंने कहा कि कंपेसन हमें एक तरह की ताकत देता है कि हम खुद से कनेक्‍ट हों और और अपने अंदर छिपे ज्ञान को और बढ़ा सके. 
BW Healthcare और BW Wellbeing के CEO हरबिंदर नरुला के सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि जब कभी भी हम किसी चीज को अपनी दो आंखों से देखते हैं तो हमें सीमित चीजें ही नजर आती हैं. लेकिन जब हम उन्‍हीं चीजों को तीसरी आंख से देखते हैं तो उसमें हमें व्‍यापक चीजें नजर आती हैं. जब हम अपनी तीसरी आंख से दुनिया को देखते हैं तो हम उसे और बेहतर तरीके से देख पाते हैं. 


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