होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / कोई ऐसे ही नहीं बन जाता शिव नादर: जोश, जुनून, जिद ने दिया ये आयाम

कोई ऐसे ही नहीं बन जाता शिव नादर: जोश, जुनून, जिद ने दिया ये आयाम

शिव नादर को पता था कि अगर वे हिन्दी ना जानते तो शायद अपने हिस्से के आसमान को ना छू पाते. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • विवेक शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार

शिव नादर की शख्सियत कुछ इस तरह की है कि वे जब कहीं बोलते हैं तो उन्हें सुनना पड़ता है. वे हर बात तर्क और अनुभव के साथ रखते हैं. वे उस दिन साउथ दिल्ली में दिलों को जोड़ने वाले प्रख्यात डॉ.आलोक चोपड़ा के पंचशील एनक्लेव के आशियाने में कुछ दोस्तों से बातें कर रहे थे. उनमें कुछ बड़े नामवर नेता भी थे, पर सब उन्हें कायदे से सुन रहे थे. वहां पर बात से बात निकली तो शिव नादर बताने लगे थे कि वे 1974 में तमिलनाडु एक्सप्रेस से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उतरे थे. महीना था नवंबर का. उनके पास एक छोटी सी अटैची थी. उसमें कुछ कपड़े, एक अदद इंजीनियरिंग की डिग्री और कुछ रुपए थे. वे पहली बार दिल्ली आए थे. उनकी डीसीएम डाटा प्रोड्क्ट्स नाम की कंपनी में नौकरी लगी थी. दफ्तर था झंडेवालान में. यह डीसीएम समूह की कंपनी थी और इसके चेयरमेन थे डॉ. चरत राम.

देश के सबसे बड़े परोपकारी
बेशक, 1974 से 2022 के दौरान शिव नादर और दिल्ली बहुत बदल गए. झंडेवालान में कुछ सालों तक नौकरी और एचसीएल टेक्नॉलोजीज की स्थापना करने के बाद अब 75 साल के हो चुके शिव नादर की नेटवर्थ- 20.4 अरब रुपए से अधिक है. यह कहना है फोर्ब्स पत्रिका का. राजधानी के फ्रेंड्स कॉलोनी में रहने वाले शिव नादर ने कुछ समय पहले एचसीएल टेक्नॉलोजीज के मैनेजिंग डायरेक्टर पद को छोड़ दिया. अब वे इसके बोर्ड के चेयरमैन एमिरेट्स (मानद अध्यक्ष) पद पर रहेंगे. अब उनका स्थान लिया है उनकी पुत्री रोशनी नादर मल्होत्रा ने. शिव नादर 1974 से 2022 तक आते-आते भारत के सबसे बड़े परोपकारी व्यक्ति ही बन गए. वे हर रोज 3 करोड़ रुपया परोपकार से जुड़े कार्यों में दान करते हैं. इसे एक साल के हिसाब से जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा होगा 1,161 करोड़ रुपए होगा. 

सबसे धनी अडानी 7वें नंबर पर
एडलगिव हुरुन इंडिया परोपकार सूची 2022 के मुताबिक, शिव नादर के बाद आईटी कंपनी विप्रो के 77 वर्षीय अजीम प्रेमजी पिछले दो वर्षों से लगातार शीर्ष स्थान पर रहने के बाद इस साल दूसरे स्थान पर खिसक गए. उन्होंने 484 करोड़ रुपए का वार्षिक दान दिया. भारत के सबसे धनी इंसान गौतम अडानी शिखर दानवीरों की सूची में सातवें स्थान पर रहे. उन्होंने 100 करोड़ रुपया परोपकारी कार्यों के लिए दान दिया. इस सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमेन मुकेश अंबानी और लार्सन एंड टुब्रो के चेयरमेन एएम नाईक भी रहे. 80 वर्षीय एएम नाइक ने 142 करोड़ रुपए का दान दिया और वह देश के सबसे उदार पेशेवर प्रबंधक हैं. ये सूची दानवीरों के 1 अप्रैल 2021 से 30 मार्च, 2022 के बीच परोपकार के लिए दिए गए धन के आधार पर बनी.

ऐसे साकार किया सपना
फिर लौटते हैं शिव नादर पर. उनके चेहरे का तेज और आंखों की चमक से आप प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते. वे सुनते अधिक और बोलते कम हैं. उनके उत्तर छोटे पर साफ-सटीक होते हैं. उन्हें अपनी उपलब्धियों को महिमामंडित करने या उस पर प्रवचन देने का भी शौक नहीं है. वे मीडिया को बात-बात पर अपने पास इंटरव्यू देने के लिए नहीं बुलाते. शिव नादर दिल्ली में आए तो वेस्ट पटेल नगर की एक बरसाती में रहने लगे. उनके पास काम और काम के अलावा दूसरी किसी बात के लिए वक्त नहीं था. डीसीएम डाटा प्रोड्क्टस की नौकरी में काम करन में अच्छा लग रहा था. वे डॉ. चरत राम से लीडरशिप के गुण सीख रहे थे. पर उनके दिल के किसी कोने में कुछ अपना करने की इच्छा थी. ये उन दिनों की बातें हैं जब स्टार्ट अप जैसे शब्दों को किसी ने सुना नहीं था. अपने सपनों को साकार करने के लिए शिव नादर ने 1976 में पक्की नौकरी छोड़ दी. उनके दोस्तों ने उन्हें लाख समझाया पर वे नहीं माने. उन्होंने अपने उन्हीं दोस्तों को अपने साथ काम करने के लिए कन्वेंस किया. फिर शुरू की एचसीएल इंटरप्राइजेज. गोल्फ लिंक के एक गैराज से केलकुलेटर और माइक्रोप्रोसेसर बनाने शुरू किए. फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

ये है शिव नादर का लक्ष्य 
शिव नादर एक बार कह रहे थे, 'मैं नेतृत्व के अवसर नहीं देता, बल्कि उन लोगों पर निगाह रखता हूं, जो कमान संभाल सकते हैं'. जब 1982 में आईबीएम ने एचसीएल को कंप्यूटर मुहैया कराना बंद कर दिया तब नादर और उनके साथियों ने पहला कंप्यूटर भी बना लिया. फिलहाल, एचसीएल टेक्नोलॉजी की 80 फीसदी आमदनी कंप्यूटर और ऑफिस इक्विपमेंट्स से होती है. ज्ञान की ‘रोशनी’ दूर तक फैले और उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति को भी मिले, ये शिव नादर का लक्ष्य रहता है. गरीब बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना उनकी शीर्ष प्राथमिकता है. उन्होंने गरीबी देखी है. वे जानते हैं कि गरीब का जीवन कितना कठिन होता है. वे ओबीसी समाज से हैं. शिव नादर ग्रामीण भारत के सबसे गरीब गांवों से प्रतिभाशाली बच्चों को चुनकर बोर्डिंग स्कूल भेजते हैं. अब तक शिव नादर शिक्षण संस्थाओं के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपए दान दे चुके हैं. यह राशि उनके द्वारा संचालित शिव नादर फाउंडेशन के तहत खर्च की गई. इसके साथ ही शिव नादर का लंबी अवधि में फाउंडेशन की गतिविधियों के विस्तार पर एक अरब डॉलर का निवेश करने का मन है.

जाते-जाते बची थी जान
शिव नादर फाउंडेशन तहत उत्तर प्रदेश में विद्या ज्ञान स्कूल व शिव नादर यूनिवर्सिटी और तमिलनाडु में एसएसएन इंस्टीट्यूशन चला रहा है. शिव नादर की बेटी रोशनी नादर मल्होत्रा बताती हैं कि फाउंडेशन की फंडिंग एचसीएल समूह की कंपनियों के शेयरों पर मिलने वाले लाभांश की राशि से की जाती है. शिव नादर आगे की योजनाएं बनाते हुए अपने गुजरे दौर को भूले नहीं हैं. उन्हें याद है जब लगभग साढ़े पांच दशक पहले उनके राज्य में हिंदी विरोधी आंदोलन के दौरान उनकी जान जाते-जाते बची थी. वे बताते हैं- 'हिंदी विरोधी आंदोलन के दौरान तमिलनाडु में हालात काफी बदले हुए थे. 25 जनवरी, 1965 को जब आंदोलन चरम पर था तब पोस्ट आफिस के निकट पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिससे बहुत से छात्र परेशान हो उठे थे. अगले दिन अफवाह फैली की मदुरई मेडिकल कॉलेज के दो छात्रों को गोली मार दी गई है. उसके बाद लगभग सभी कॉलेजों के पांच हजार छात्रों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और इस मुद्दे को उठाया था. इसमें मैं भी शामिल था. तब अधिकारियों ने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों को देखते ही गोली मारने के आदेश हैं. जैसे ही छात्रों ने वहां से हटना शुरू किया किसी ने कहा कि दो तीन बसों में आग लगाते हैं, लेकिन मैंने यह खतरनाक काम करने से इन्कार कर दिया'. उन्होंने कहा कि उस समय राह चलते यह डर समाया रहता था कि बंदूक लिए कोई आदमी हमें गोली न मार दे।. शिव नादर ने इसी कॉलेज से स्नातक किया था. अब वे तमिलनाडु में जाकर भी नौजवानों को हिन्दी पढ़ने-सीखने की नसीहत देते हैं. उन्हें पता था कि अगर वे हिन्दी ना जानते तो शायद अपने हिस्से के आसमान को ना छू पाते. 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

14 hours ago

3C फ्रेमवर्क से बंगाल की आर्थिक पुनर्बहाली को मिलेगी नई दिशा

बंगाल की चुनौती संसाधनों की कमी नहीं है. वास्तविक समस्या यह है कि राज्य अपनी मौजूदा संपत्तियों को एक प्रभावी आर्थिक रणनीति में बदलने में विफल रहा है.

21 hours ago

भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

5 days ago

ईरान को ‘अनफ्रीज’ करना: असली चुनौती अब शुरू होगी

सिद्धार्थ अरोड़ा लिखते हैं, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार 60 दिनों की अवधि में लगभग 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह पैसा जब ईरान पहुंचेगा, तब उसका क्या होगा?'

6 days ago

2026 की तीसरी तिमाही का ज्योतिष: एआई, संघर्ष और वैश्विक परिवर्तन

ज्योतिषाचार्य विक्रम चन्दीरमानी लिखते हैं कि 2026 के पहले छह महीनों के दौरान इनमें से कई विषय पहले ही उभरने लगे हैं. प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएँ लगातार अधिक स्पष्ट होती जा रही हैं. यह चिंता केवल AI से जुड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की कुछ सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों, जैसे स्पेसएक्स, के उच्च मूल्यांकन को लेकर भी देखी जा रही है.

1 week ago


बड़ी खबरें

₹860 करोड़ का कोहिनूर सौदा, राज ठाकरे की चुप्पी

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.

14 hours ago

मिडिल ईस्ट प्रैक्टिस के लिए प्राइमस पार्टनर्स ने मोहन दोईफोडे को बनाया MD

पूर्व डेलॉइट कंसल्टिंग लीडर GCC क्षेत्र में कंपनी के विस्तार और क्लाइंट संबंधों को देंगे नई दिशा

13 hours ago

GDP से आगे: क्यों भारत की प्रगति का पैमाना सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि खुशहाली और जीवन गुणवत्ता भी होना चाहिए

पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव और लेखक आलोक रंजन का मानना है कि भारत की विकास यात्रा को केवल आर्थिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनके अनुसार, खुशहाली, जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास को भी प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना बनाया जाना चाहिए.

18 hours ago

Truhome Finance को 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी

कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

14 hours ago

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

14 hours ago