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फुटवियर पर QCO अच्छा कदम, लेकिन कुछ सुधार भी जरूरी

केंद्र सरकार को इस मामले में स्पष्ट संदेश समय रहते देना होगा, ताकि असमंजस की स्थिति न रहे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • पूरन डावर, चेयरमैन डावर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज  

केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने फुटवियर पर QCO जारी किया है. सरकार अपने 5 ट्रिलियन की अर्थवावस्था और 1 ट्रिलियन के मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्य पर पहुंचने का हर सम्भव प्रयास कर रही है. इस QCO के माध्यम उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाकर उसके प्रति प्रति विश्वास जगाना होगा, ताकि लोग लोकल पर वोकल हो सकें. चीन से आने वाले सस्ते फुटवियर को रोकना होगा, वैश्विक बाज़ार में विश्वास जगाना होगा. भारत अब चीन की तरह सस्ते प्रोडक्ट नहीं, क्वालिटी प्रोडक्ट बनाने जा रहा है. इससे विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों यानी FTA में भी आसानी होगी. अभी कुल 24 प्रकार के विशेष प्रयोजन फुटवियर पर QCO आया है, जिनमें से 1 जुलाई 2023 से 19 प्रकार के विशेष प्रयोजन फुटवियर (परफॉरमेंस फुटवियर) पर यह लागू हो गया है. 5 प्रकार के फुटवियर पर अभी नॉर्म्स तय नहीं हो पाए हैं, उनके लिए पर 6 महीने का समय दिया गया. इसके 1 जनवरी 2024 से लागू होने की संभावना है.

पैनिक मोड में है बाजार
अभी तक इस QCO से स्मॉल एवं माइक्रो को दायरे से बाहर रखा गया है. 50 करोड़ तक टर्नओवर वाले इसकी जद में नहीं आते. उद्यमियों की मांग थी कि यह QCO व्यवस्था सबके लिए लागू की जानी चाहिए, अन्यथा उनका परफॉरमेंस प्रोडक्ट नहीं बिक पाएगा. उद्योग- व्यापार एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल ने उद्यमियों के समक्ष प्रेस वार्ता में बताया था कि 1 जनवरी 2024 से लघु उद्योग और 1 जुलाई 2024 से सूक्ष्म माइक्रो भी QCO के अंतर्गत लाए जाएंगे. यह आवश्यक भी है, क्योंकि परफॉरमेंस फुटवियर पर जीवन से समझौता नहीं किया जा सकता. अभी तक की सारी व्यवस्थाएं या घोषणाएं 24 प्रकार के परफॉरमेंस फुटवियर पर हैं, जिसमें आर्म्ड फोर्सेज़ के लिए, सिक्योरिटी के लिए और हर प्रकार के स्पोर्ट्स फुटवियर, मौल्डेड पीवीसी, मौल्डेड रबर आदि के फुटवियर शामिल हैं. इसमें रोजमर्रा के फुटवियर अभी तक नहीं रखे गये हैं. इसका किसी भी प्रकार की इकाइयों - लार्ज. मीडियम स्मॉल या माइक्रो पर अभी कोई प्रभाव नहीं होना चाहिए. कुछ भ्रांतियां अभी स्लीपर्स सैंडल पर हैं, जिसमें हर प्रकार के स्लीपर्स सैंडल लिख गया है, बाजार में पैनिक है और बड़ी कंपनियों ने बिना बीआईएस के खरीदना बंद कर दिया है. इसी तरह कैनवस फुटवियर भी QCO के दायरे में हैं जिन पर नॉर्म्स ब्रिटिश आर्मी पीटी शूज़ के लगाए गए हैं जिससे स्कूल पीटी शू भ्रम की स्थिति में हैं और उत्पादन रुका हुआ है. इन दोनों स्लीपर्स सैंडल और पीटी शूज़ पर भ्रम को दूर करना होगा.

अब किस बात का शोर?  
पीयूष गोयल ने उद्यमियों के साथ बैठक में चिंता जतायी थी कि भारत में बनने और बिकने वाली क्वालिटी और एक्सपोर्ट क्वालिटी में अंतर क्यों होना चाहिए. जिन मानकों और टेस्ट से निर्यात के जूते बनते हैं, डोमेस्टिक भी बनने चाहिये.. और आने वाले समय में रोजमर्रा के फुटवियर भी QCO के दायरे में लाए जा सकते हैं. अच्छी बात, भारत में रहने वाला व्यक्ति विभिन्न ब्रांड के भारत में बने जूते अमेरिका या इटली या लंदन से क्यों खरीद कर लाए? भारत में बनने और बिकने वाला जूता और निर्यात की क्वालिटी एक हो, यह बहुत अच्छी सोच है और आगे जो विश्व उत्पादन के लिये भारत की ओर देख रहा है उससे एक बड़ा बेस मिलेगा. हर फैक्ट्री निर्यात क्वालिटी बना सकेगी. जूते में लगने वाले हर प्रकार के चमड़े, पीयू पीवीसी या टेक्सटाइल बेस सिंथेटिक हानिकारक कैमिकल मुक्त होंगे और सोल क्रैक नहीं होंगे, खुलेंगे नहीं और घिसने के भी फिजिकल टेस्ट वाले जूते होंगे.

समय रहते कदम उठाना जरूरी
लघु एवं सूक्ष्म इकाइयों को इससे बाहर रखना होगा. सरकार को स्पष्ट संदेश समय रहते देना होगा ताकि असमंजस की स्थिति न रहे या कुछ तत्व जो छोटे-छोटे उद्यमियों को किनारे रख कर अपने दूसरे उद्देश्य पूरा करना चाहते हैं या चीन से आयात करते रहना चाहते हैं या QCO के दायरे से बाहर होने के तरीके ढूंढ  रहे हैं, उन्हें खेलने का मैदान न मिले. भारत में बड़ी आबादी निर्यात वाली क्वालिटी नहीं खरीद सकती, उसे भविष्य का जूता नहीं आज जो पैसे जेब में हैं उससे अपनी आज की आवश्यकता को पूरा करना है. परफॉरमेंस फुटवियर निश्चित रूप से मेंडेटरी होने चाहिए, लेकिन रोजमर्रा के जूते पर यह व्यवस्था मेंडेटरी नहीं, वैकल्पिक होनी चाहिए.

 


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