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Modi@9: इस तरह से घूमा देश के आर्थिक विकास का पहिया

राष्ट्र की वृद्धि और विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रियाएं हैं, और इसका उद्देश्य अगले 20-25 वर्षों में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • एस रवि

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार के 9 साल पूरे हो गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) और उनकी टीम ने बेहतर गवर्नेंस, वित्तीय समावेशन, बैंकिंग के डिजिटलीकरण, मेक इन इंडिया, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, घरेलू एवं विदेशी निवेशों को आकर्षित करने और उच्च आर्थिक विकास दर हासिल करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. PM मोदी के नेतृत्व में सरकार, प्रधानमंत्री जनधन योजना के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंची है, जिसने जीरो मेंटेनेंस अमाउंट वाले बैंक खाते, बीमा सेवाओं, क्रेडिट और पेंशन की उपलब्धता को सक्षम किया है. हाल की रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना के तहत 47 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं.

ऐतिहासिक अप्रत्यक्ष कर सुधार
मोदी सरकार सबसे ऐतिहासिक अप्रत्यक्ष कर सुधारों में से एक को 2017 में - वन नेशन टैक्स - GST के तौर पर अमल में लेकर आई. ताकि टैक्स की चोरी को रोका जा सके और सिस्टम में सुधार किया जा सके. वित्त वर्ष 2022-23 के लिए कुल सकल संग्रह 18 लाख करोड़ रुपए से अधिक है. सरकार ने नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण या नोटबंदी (Demonetisation) की घोषणा की, जिसके लिए उसे आलोचनाओं का भी सामना करना. इस फैसले के तहत 500 और 1000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया. सरकार ने 2000 रुपए के नोटों को शैडो इकॉनमी से निपटने और कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए एक कदम के रूप में पेश किया. नोटबंदी के परिणामस्वरूप कार्ड और डिजिटल बैंकिंग के उपयोग में वृद्धि हुई, जो तब फायदेमंद साबित हुआ जब महामारी ने आर्थिक अराजकता पैदा कर दी. एक रिपोर्ट के अनुसार, UPI ने वर्ष 2022 में मात्रा के संदर्भ में 74 बिलियन से अधिक और मूल्य के संदर्भ में 126 ट्रिलियन रुपए का लेनदेन दर्ज किया. वित्त वर्ष 2022 में डिजिटल लेनदेन का मूल्य 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया. 

पूरी दुनिया से मिली सराहना
कोरोना महामारी के दौरान भी सरकार ने पूरी दक्षता और सूझबूझ के साथ काम किया, जिसे पूरी दुनिया ने सराहा. टीकाकरण अभियान के 9 महीने के भीतर अपनी पात्र आबादी को एक अरब से अधिक खुराक देना सरकार के थिंक-टैंक की दक्षता और प्रभावकारिता को प्रदर्शित करता है. कोरोना महामारी के दौर में हमारी 'मेक इन इंडिया' पहल की शक्ति भी पूरी दुनिया के सामने आई. हमारे द्वारा विकसित कोविशील्ड और कोवैक्सीन की आपूर्ति 100 से अधिक देशों को की गई. सरकार के अन्य उल्लेखनीय कार्यक्रमों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ह्यूमन कैपिटल को बढ़ाने के लिए डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया मिशन, बस्तियों में रहने वालों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पीएम आवास योजना, और गरीब परिवारों की भलाई पर ध्यान केंद्रित करने वाली आयुष्मान भारत योजना और 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज, शामिल हैं.

इन्फ्रास्ट्रक्चर को मिल रही मजबूती
इन्फ्रास्ट्रक्चर किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है और इसे मजबूत करना आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है. इस वर्ष घोषित बजट में पूंजीगत व्यय में 33 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के तहत, सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में 110 लाख करोड़ रुपए का निवेश करना है. अक्टूबर 2021 में शुरू किया गया 'गति शक्ति' राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उद्देश्य भारत के सभी आर्थिक क्षेत्रों को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करना है. कनेक्टिविटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ाने के लिए, सरकार ने रुपए सहित घरेलू इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजनाओं की घोषणा की है. जिसमें 76,000 करोड़ रुपए सेमीकंडक्टर और 40,995 करोड़ रुपए मोबाइल फोन एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए हैं.

सतत विकास की कुंजी
वर्तमान सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों को लागू किया है, जिसमें रियल एस्टेट के लिए रेरा अधिनियम, बैंकिंग प्रणाली में NPA से निपटने के लिए आईबीसी, निवेश आकर्षित करने के लिए FDI को उदार बनाना, और शहरी विकास के लिए गिफ्ट सिटी और स्मार्ट सिटी की शुरुआत शामिल है. राष्ट्र की वृद्धि और विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रियाएं हैं, और इसका उद्देश्य अगले 20-25 वर्षों में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है. सतत विकास की कुंजी विभिन्न नीतियों और योजनाओं के कार्यान्वयन में निहित है, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति, बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक सुधार, मेक इन इंडिया को गति प्रदान करना, एक शुद्ध निर्यातक बनना और निरंतर नियामक सुधारों के माध्यम से इज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग बेहतर बनाना, शामिल हैं.   

(लेखक पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और कई बड़ी सार्वजनिक कंपनियों के स्वतंत्र निदेशक हैं. उनके विचार नीति निर्माण में सहायक रहे हैं.) 

 


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