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केरल 2026: शशि थरूर और यूडीएफ का राजनीतिक पुनरुत्थान

थरूर 2009 से संसद में तिरुवनंतपुरम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी के सबसे पहचानने योग्य राष्ट्रीय चेहरों में से एक बने हुए हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

केरल का आगामी विधानसभा चुनाव देश की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली राजनीतिक प्रतिस्पर्धाओं में से एक बनने जा रहा है. कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाता हुआ दिखाई दे रहा है और उसके विजयी होने की संभावना है. इस राजनीतिक बदलाव के केंद्र में शशि थरूर खड़े हैं, जिनकी चुनाव अभियान में भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है.

केरल का राजनीतिक परिदृश्य लंबे समय से भारत की सबसे संरचित चुनावी प्रणालियों में से एक के रूप में जाना जाता है. दशकों से राज्य की राजनीति दो प्रमुख गठबंधनों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, जिसका नेतृत्व कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) करती है, और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, जिसका नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस करती है.

कई अन्य राज्यों के विपरीत, केरल में ऐतिहासिक रूप से इन दोनों गठबंधनों के बीच बारी-बारी से सरकार बनने का पैटर्न रहा है. कई वर्षों तक मतदाता हर पांच साल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सत्ता बदलते रहे. हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव ने इस लंबे समय से चले आ रहे पैटर्न को तोड़ दिया, जब मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की.

विजयन सरकार ने स्थिरता और प्रशासनिक निरंतरता की छवि पेश करने का प्रयास किया है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास, कल्याणकारी पहलों और संकट प्रबंधन पर जोर दिया गया है. बड़े बाढ़ संकटों और कोविड-19 महामारी से निपटने को अक्सर प्रशासनिक क्षमता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया. वहीं दूसरी ओर, सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपों से लेकर वित्तीय दबाव और प्रशासनिक विवादों तक कई मुद्दों पर विपक्षी दलों की आलोचना का सामना भी करना पड़ा है.

कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बना हुआ है. कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से केरल में गहरे संगठनात्मक आधार बनाए रखे हैं, जिन्हें प्रभावशाली सामुदायिक नेटवर्क और अनुभवी क्षेत्रीय नेताओं का समर्थन प्राप्त है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यूडीएफ के भीतर सबसे महत्वपूर्ण सहयोगियों में से एक बनी हुई है, खासकर उत्तरी केरल में, जबकि केरल कांग्रेस के विभिन्न गुट राज्य के मध्य हिस्सों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहते हैं.

इस व्यापक राजनीतिक ढांचे के भीतर शशि थरूर आगामी चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक के रूप में उभर रहे हैं. थरूर 2009 से संसद में तिरुवनंतपुरम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी के सबसे पहचानने योग्य राष्ट्रीय चेहरों में से एक बने हुए हैं. उनकी स्पष्ट और प्रभावशाली संवाद शैली, अंतरराष्ट्रीय प्रोफाइल और सार्वजनिक बुद्धिजीवी के रूप में उनकी प्रतिष्ठा ने उन्हें एक विशिष्ट राजनीतिक पहचान दी है.

उनकी बढ़ती भूमिका का महत्व पहले की घटनाओं के संदर्भ में और भी स्पष्ट होता है. ऐसा होने से कई महीने पहले मैंने भविष्यवाणी की थी कि शशि थरूर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल किया जाएगा. बाद में यह भविष्यवाणी सच साबित हुई जब उन्हें वास्तव में पार्टी की सर्वोच्च निर्णय-निर्माण संस्था में शामिल किया गया. पिछले वर्ष मैंने यह भी भविष्यवाणी की थी कि जनवरी 2026 थरूर के राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा.

घटनाएँ ठीक उसी दिशा में आगे बढ़ीं. इस वर्ष जनवरी में थरूर ने राहुल गांधी से मुलाकात की, जिसे व्यापक रूप से पार्टी के भीतर पहले के मतभेदों को दूर करने के प्रयास के रूप में देखा गया. ऐसा प्रतीत होता है कि शेष तनाव भी समाप्त हो गया है और इसके बाद थरूर को केरल में कांग्रेस अभियान में केंद्रीय भूमिका सौंपी गई है. अब वे प्रभावी रूप से राज्य में पार्टी की चुनावी रणनीति के समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

हाल के वर्षों में कांग्रेस नेतृत्व के कुछ वर्गों के साथ थरूर के संबंधों में कभी-कभी मतभेद भी दिखाई दिए. कई मौकों पर उन्होंने ऐसे विचार व्यक्त किए जो आधिकारिक पार्टी लाइन से अलग थे, और कभी-कभी उन्होंने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की कुछ नीतिगत पहलों की सराहना भी की. इन टिप्पणियों की कुछ कांग्रेस नेताओं ने आलोचना की, क्योंकि उनका मानना था कि ऐसे बयान पार्टी के विपक्षी रुख को कमजोर करते हैं.

कभी-कभी ये मतभेद सार्वजनिक रूप से भी सामने आए, और कुछ पार्टी नेताओं ने तो थरूर से कुछ संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की मांग तक कर दी. इस वर्ष की शुरुआत में राहुल गांधी के साथ हुई बैठक ने इन तनावों को समाप्त कर दिया प्रतीत होता है, जिससे पार्टी को एक महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले से पहले एकजुट होने का अवसर मिला.

ज्योतिषीय दृष्टि से, थरूर इस समय अपनी बुध दशा और राहु भुक्ति में हैं, यह संयोजन उनके लिए बढ़ी हुई दृश्यता, रणनीतिक प्रभाव और करियर में महत्वपूर्ण विकास ला सकता है. बुध बुद्धि, संचार और राजनीतिक रणनीति का प्रतिनिधित्व करता है, वे गुण जो लंबे समय से थरूर की सार्वजनिक छवि का हिस्सा रहे हैं. राहु अक्सर महत्वाकांक्षा को बढ़ाता है और व्यक्तियों को जटिल राजनीतिक परिस्थितियों में आगे धकेलता है, जहाँ उनका प्रभाव तेजी से बढ़ सकता है.

उनकी जन्म कुंडली उनके सार्वजनिक जीवन में दिखाई देने वाले कई गुणों को दर्शाती है. सिंह लग्न होने के कारण नेतृत्व, दृश्यता और सार्वजनिक प्रमुखता की स्वाभाविक प्रवृत्ति दिखाई देती है. सिंह लग्न वाले लोग अक्सर आत्मविश्वास और अधिकार का प्रदर्शन करते हैं, ऐसे गुण जो राजनीति में अच्छी तरह काम आते हैं.

कुंभ राशि में सूर्य और बुध उनके व्यक्तित्व के बौद्धिक और वैचारिक आयाम को मजबूत करते हैं. कुंभ सुधारवादी सोच, वैश्विक दृष्टिकोण और नीतिगत बहसों से जुड़ी होती है. यही कारण है कि थरूर की राजनीतिक पहचान अक्सर एक लेखक, टिप्पणीकार और सार्वजनिक विचारक के रूप में उनके काम से जुड़ी रही है.

मकर राशि में चंद्रमा अनुशासन और रणनीतिक सोच जोड़ता है. मकर चंद्र वाले लोग सार्वजनिक जीवन को गंभीरता और दीर्घकालिक योजना के साथ देखते हैं. यह स्थिति अक्सर उन व्यक्तियों की कुंडली में दिखाई देती है जो अंतरराष्ट्रीय संगठनों या राष्ट्रीय राजनीति जैसे जटिल संस्थागत वातावरण में सहजता से काम कर सकते हैं.

धनु राशि में मंगल वैचारिक दृढ़ता और सिद्धांतों तथा विचारों पर बहस करने की इच्छा जोड़ता है. यह दर्शन, शासन और राजनीतिक दृष्टि के मामलों में मजबूत आवाज प्रदान करता है.

उनकी कुंडली में दो शक्तिशाली पहलू विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं. बुध का प्लूटो के साथ विपक्ष अक्सर गहरी विश्लेषण क्षमता और तीक्ष्ण बुद्धि देता है. इस पहलू वाले लोग शायद ही कभी सतही ढंग से सोचते हैं और अक्सर उनके पास प्रभावशाली वाद-विवाद कौशल होते हैं. वहीं बृहस्पति का प्लूटो के साथ युति अक्सर उन व्यक्तियों से जुड़ी होती है जो शक्तिशाली संस्थानों के भीतर प्रभाव रखते हैं और बड़े राजनीतिक कथानकों को आकार देते हैं.

वृश्चिक में शनि और राहु तीव्रता और रणनीतिक प्रवृत्ति जोड़ते हैं. ये स्थितियाँ अक्सर शक्ति संरचनाओं और राजनीतिक गतिशीलताओं की गहरी समझ का संकेत देती हैं.

इन सभी ग्रह संयोजनों को एक साथ देखें तो वे ऐसे व्यक्तित्व का चित्रण करते हैं जो बौद्धिक परिष्कार और राजनीतिक सहज प्रवृत्ति का मिश्रण है. एक प्रभावशाली वक्ता, लेखक और नीतिगत विचारक के रूप में थरूर की प्रतिष्ठा इन ज्योतिषीय संकेतों से काफी मेल खाती है.

अब जब थरूर अभियान में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं, तो 2026 उनके लिए राजनीतिक रूप से एक उल्लेखनीय वर्ष बनता हुआ दिखाई दे रहा है. पार्टी और चुनाव अभियान के भीतर उनका प्रभाव काफी बढ़ गया है.

चुनाव नजदीक आने के साथ कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट अन्य गठबंधनों पर बढ़त बनाए हुए दिखाई देता है और उसके विजयी होने की संभावना है. ऐसी स्थिति में शशि थरूर से सरकार के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है.

थरूर स्वयं सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे केरल के मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा नहीं रखते. फिर भी, अभियान में उनकी प्रमुखता उन्हें उन नामों में शामिल कर देती है जिन पर नेतृत्व की संभावनाओं के संदर्भ में चर्चा होती है.

केरल में कांग्रेस के भीतर संभावित नेतृत्व भूमिकाओं को लेकर जिन प्रमुख व्यक्तियों के नाम अक्सर चर्चा में आते हैं, उनमें वी. डी. सतीशन केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता, रमेश चेन्निथला वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री,  शशि थरूर तिरुवनंतपुरम से सांसद और के. सी. वेणुगोपाल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के एक प्रमुख संगठनात्मक नेता शामिल हैं.

इनमें से कुछ नेताओं की तुलना में, जो राज्य की राजनीति में अधिक गहराई से जमे हुए हैं, थरूर को अक्सर एक तरह का डार्क हॉर्स माना जाता है. उनका करियर मुख्यतः राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केंद्रित रहा है, और उनका बौद्धिक प्रोफाइल उन्हें कई पारंपरिक क्षेत्रीय राजनेताओं से अलग करता है.

फिर भी यही विशिष्ट प्रोफाइल उनकी ताकत भी साबित हो सकती है. भले ही थरूर मुख्यमंत्री पद का दावा न करें, लेकिन यूडीएफ की मजबूत जीत उनके राजनीतिक कद को काफी बढ़ा सकती है. कांग्रेस के भीतर और केरल की राजनीति में उनकी स्थिति यहाँ से काफी मजबूत हो सकती है.

विस्तृत रूप से देखें तो जिस राजनीतिक वातावरण में ये चुनाव हो रहे हैं, वह स्वयं असामान्य रूप से अस्थिर है. मैंने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि 2026 ऐसा वर्ष होगा जिसमें अचानक नेतृत्व परिवर्तन होंगे और कई लंबे समय से चले आ रहे दौर समाप्त होंगे. वर्ष के दौरान यह पैटर्न दुनिया के विभिन्न हिस्सों में दिखाई भी देने लगा है.

वेनेजुएला और ईरान जैसे देशों में अचानक नेतृत्व परिवर्तन हुए हैं. देश के भीतर भी भारतीय राजनीति में नाटकीय घटनाएँ हुई हैं, जिनमें इस वर्ष की शुरुआत में बिहार के मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार का इस्तीफा और जनवरी 2026 में विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की दुखद मृत्यु शामिल है.

इन सभी घटनाओं से अचानक राजनीतिक बदलाव और अप्रत्याशित नेतृत्व परिवर्तनों का व्यापक विषय और भी मजबूत होता है, जो 2026 के बाकी हिस्से में भी राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करते रह सकते हैं. इसी पृष्ठभूमि में केरल का चुनाव एक निर्णायक राजनीतिक परिणाम दे सकता है.

ज्योतिषीय दृष्टि से, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट राज्य में सत्ता में वापसी करता हुआ दिखाई देता है और उसे अपने प्रतिद्वंद्वियों पर स्पष्ट बढ़त मिल सकती है. इसके बाद बनने वाली सरकार में शशि थरूर सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक के रूप में उभर सकते हैं. भले ही वे मुख्यमंत्री की कुर्सी का दावा न करें, जैसा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनकी ऐसी कोई आकांक्षा नहीं है, लेकिन कांग्रेस के भीतर और केरल की राजनीति में उनका कद यहाँ से काफी बढ़ सकता है.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं और आवश्यक नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को दर्शाते हों.)

अतिथि लेखक : विक्रम चन्दीरमानी 

(विक्रम चन्दीरमानी, 2001 से ज्योतिषाचार्य, वेदिक और पश्चिमी ज्योतिष के सिद्धांतों को अपनी सहज अंतर्दृष्टि के साथ मिलाकर भविष्य के गहन विश्लेषण प्रदान करते हैं.)
 


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