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मेडिकल टूरिज्म में भारत की वैश्विक उड़ान, बजट 2026 से नेतृत्व की मजबूत नींव

सही नीतियों, वैश्विक सहयोग और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ भारत मेडिकल टूरिज्म को आर्थिक अवसर से आगे बढ़ाकर विश्व स्वास्थ्य नेतृत्व का सशक्त माध्यम बना सकता है.

डॉ. दीपक अरोड़ा 8 months ago

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र को जिस प्राथमिकता के साथ स्थान दिया गया है, वह भारत की चिकित्सा व्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है. एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHPs) और केयरगिवर्स की ट्रेनिंग, मेडिकल टूरिज्म हब्स का विकास, बायोफार्मा अनुसंधान को बढ़ावा, आयुर्वेद एवं योग को समर्थन तथा AI आधारित स्वास्थ्य उपकरणों पर जोर, ये सभी पहलें एक व्यापक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र (Healthcare Ecosystem) की ओर इशारा करती हैं.

एक ऑर्थोपेडिक एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन के रूप में मेरा अनुभव है कि सर्जरी जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण है पोस्ट-ऑपरेटिव केयर, प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और केयरगिवर्स ही मरीज की सफल और तेज रिकवरी सुनिश्चित करते हैं. यदि इन क्षेत्रों में संरचित और उच्च गुणवत्ता वाली ट्रेनिंग को बढ़ावा मिलता है, तो भारत उपचार की गुणवत्ता में विश्व स्तर पर और मजबूत स्थिति प्राप्त कर सकता है.

मेडिकल टूरिज्म, अवसर से नेतृत्व तक

भारत पहले से ही किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली सर्जरी के लिए वैश्विक पहचान बना चुका है. घुटना और हिप जॉइंट रिप्लेसमेंट, स्पाइन सर्जरी तथा एडवांस ऑर्थोपेडिक उपचारों के लिए बड़ी संख्या में विदेशी मरीज भारत आते हैं.

आज मरीज Ethiopia, Myanmar, Uzbekistan, Kazakhstan, Saudi Arabia, Qatar तथा South Africa जैसे देशों से भारत उपचार हेतु आ रहे हैं. अब समय है कि हम मेडिकल टूरिज्म को केवल ‘इलाज के लिए आने वाले मरीज’ की अवधारणा से आगे बढ़ाकर एक संगठित वैश्विक मॉडल में परिवर्तित करें.

1. विदेशों में OPD सेंटर की स्थापना
जिन देशों से बड़ी संख्या में मरीज भारत आते हैं, वहां भारतीय अस्पतालों एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों के OPD सेंटर स्थापित किए जा सकते हैं. इन केंद्रों पर प्रारंभिक जांच, परामर्श और सर्जरी के बाद फॉलो-अप की सुविधा उपलब्ध हो सकती है. यदि मरीज अपने देश में ही भारतीय डॉक्टर से प्रारंभिक रूप से मिल चुके हों, तो उनका विश्वास और सुविधा दोनों बढ़ेंगे. इससे उपचार की पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी.

2.‘Doctor Without Borders’ की नीति
भारत के डॉक्टर आज विश्व स्तर की शिक्षा, तकनीकी दक्षता और अनुभव रखते हैं. हमें एक ऐसी नीति पर विचार करना चाहिए, जिसमें भारतीय डॉक्टर संसाधन-विहीन या युद्ध प्रभावित देशों में समय-समय पर जाकर सेवा दे सकें. यह केवल चिकित्सा विस्तार नहीं होगा, बल्कि भारत की मानवीय प्रतिबद्धता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना का व्यावहारिक स्वरूप होगा. मेडिकल डिप्लोमेसी आने वाले समय में भारत की सॉफ्ट पावर का महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकती है.

3. मेडिकल टूरिज्म इंटरप्रेटर और भाषा की निर्णायक भूमिका
मेडिकल टूरिज्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखा पहलू है भाषा, इलाज के दौरान मरीज की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है स्पष्ट संवाद, यदि मरीज अपनी मातृभाषा में अपनी पीड़ा, आशंका और प्रश्न व्यक्त कर सके, तो उसका आत्मविश्वास और उपचार के प्रति विश्वास कई गुना बढ़ जाता है. अभी तक हम जर्मन और फ्रेंच जैसी यूरोपीय भाषाओं तक सीमित सोचते रहे हैं. लेकिन वास्तविकता यह है कि हमें अरबी, बर्मी (Burmese) और मध्य एशियाई एवं अफ्रीकी देशों की भाषाओं में प्रशिक्षित मेडिकल इंटरप्रेटर तैयार करने की आवश्यकता है. विशेष रूप से मेडिकल टर्मिनोलॉजी में प्रशिक्षित भाषा विशेषज्ञों का एक समर्पित ढांचा तैयार किया जाए, तो भारत मेडिकल टूरिज्म में एक संगठित, पेशेवर और वैश्विक मानक स्थापित कर सकता है.

निष्कर्ष, आर्थिक अवसर से आगे
मेडिकल टूरिज्म केवल विदेशी मुद्रा अर्जित करने का माध्यम नहीं है. यह भारत की चिकित्सा क्षमता, करुणा, तकनीकी दक्षता और वैश्विक नेतृत्व को स्थापित करने का अवसर है. यदि बजट में घोषित पहलों को दीर्घकालिक नीति, संरचना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़ा जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में केवल मेडिकल टूरिज्म हब नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व का केंद्र बन सकता है.

अतिथि लेखक-डॉ. दीपक अरोड़ा


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