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महंगाई के डर से खर्च घटा रहे भारतीय उपभोक्ता, जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा: सर्वे

सर्वे में यह भी सामने आया कि उपभोक्ता अब एहतियात के तौर पर जरूरी वस्तुओं का ज्यादा स्टॉक जमा कर रहे हैं. एलपीजी सिलेंडर, आटा, खाद्य तेल, चीनी, दवाइयां और ईंधन जैसी वस्तुओं की खरीद सामान्य से करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शहरी भारतीय उपभोक्ता अब अपने घरेलू खर्चों में कटौती करने लगे हैं. एक नए सर्वे में सामने आया है कि लोग गैर-जरूरी खर्च टाल रहे हैं, जरूरी सामान का स्टॉक बढ़ा रहे हैं और तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं. इप्सोस इंडिया के “कंज्यूमर पल्स सर्वे” के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता ने उपभोक्ताओं के बीच आर्थिक चिंता बढ़ा दी है.

10 में से 9 उपभोक्ता खर्च घटाने को तैयार

सर्वे के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत शहरी उपभोक्ता महंगाई बढ़ने की स्थिति में अपने घरेलू बजट को और सख्त करने की तैयारी कर रहे हैं. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं ने लोगों को लंबे समय तक महंगाई बने रहने का संकेत दिया है. करीब दो-तिहाई लोगों ने कहा कि वे बड़े खर्च और महंगी खरीदारी फिलहाल टाल देंगे. वहीं, 60 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने यात्रा और छुट्टियों पर होने वाला खर्च कम करने की बात कही. इसके अलावा, आधे से ज्यादा लोगों ने बाहर खाना खाने, समारोहों और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्चों में कटौती की योजना बनाई है.

जरूरी सामान का बढ़ा स्टॉक

सर्वे में यह भी सामने आया कि उपभोक्ता अब एहतियात के तौर पर जरूरी वस्तुओं का ज्यादा स्टॉक जमा कर रहे हैं. एलपीजी सिलेंडर, आटा, खाद्य तेल, चीनी, दवाइयां और ईंधन जैसी वस्तुओं की खरीद सामान्य से करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है. लोग अब कम कीमत वाले विकल्प, छोटे पैक और डिस्काउंट ऑफर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. उपभोक्ताओं के बीच “वैल्यू फॉर मनी” सोच तेजी से बढ़ रही है.

पेट्रोल महंगा होने पर बढ़ेगी EV की मांग

ईंधन महंगाई का असर अब लोगों की वाहन खरीद पसंद पर भी दिखाई देने लगा है. सर्वे के मुताबिक, अगले छह महीनों में दोपहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हर दो में से एक उपभोक्ता इलेक्ट्रिक मॉडल पर विचार कर रहा है. करीब दो-तिहाई संभावित खरीदारों ने कहा कि अगर पेट्रोल की कीमतों में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है, तो वे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदना पसंद करेंगे. दिलचस्प बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत 5,000 से 8,000 रुपये तक बढ़ने के बावजूद आधे से ज्यादा लोग EV खरीदने का फैसला नहीं बदलेंगे.

कंपनियों से कीमतें स्थिर रखने की उम्मीद

सर्वे में शामिल लगभग तीन-चौथाई उपभोक्ताओं का मानना है कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में कंपनियों को कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से बचना चाहिए. लोगों की अपेक्षा है कि कंपनियां जरूरी सामान की सप्लाई बनाए रखें और सस्ते विकल्प उपलब्ध कराएं. इप्सोस India के CEO सुरेश रामालिंगम ने कहा कि वैश्विक संघर्ष अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की आर्थिक चिंताओं को प्रभावित कर रहे हैं. इससे महंगाई, आय सुरक्षा और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कंपनियों को उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं और “किफायती खरीदारी” की बढ़ती मांग के अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी.

ब्यूटी और फिटनेस पर खर्च बरकरार

हालांकि, खर्च में कटौती के बीच कुछ लाइफस्टाइल श्रेणियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं. सर्वे के अनुसार, ब्यूटी और पर्सनल केयर उत्पाद लोगों की पसंदीदा “सेल्फ-इंडल्जेंस” कैटेगरी बनी हुई है. इसके बाद कैफे बेवरेज, स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन और फिटनेस मेंबरशिप जैसी सेवाओं पर लोग अब भी खर्च कर रहे हैं.

रामालिंगम ने कहा कि फिलहाल सरकार द्वारा खुदरा ईंधन कीमतों को स्थिर रखने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है. हालांकि, कमर्शियल एलपीजी की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में बाहर खाना खाने और फूड डिलीवरी को महंगा बना सकती हैं.


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