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कोयले से बनेगी गैस और केमिकल्स: सरकार ने लॉन्च की ₹37,500 करोड़ की मेगा योजना

कोयला गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदला जाता है. इस गैस का उपयोग ईंधन, मेथेनॉल, यूरिया और विभिन्न केमिकल्स के उत्पादन में किया जा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ₹37,500 करोड़ की एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत देश में कोयले से गैस और उससे जुड़े अन्य रासायनिक उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य महंगे आयातित एलएनजी, यूरिया और अन्य रसायनों पर निर्भरता को कम करना है.

क्या है कोयला गैसीफिकेशन तकनीक?

कोयला गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदला जाता है. इस गैस का उपयोग ईंधन, मेथेनॉल, यूरिया और विभिन्न केमिकल्स के उत्पादन में किया जा सकता है. सरकार का मानना है कि भारत के पास विशाल कोयला भंडार है, जिसका उपयोग देश को आत्मनिर्भर बनाने में किया जा सकता है.

सरकार का आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगी, निवेश को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी. यह हमारी तकनीक और नवाचार प्रणाली को सशक्त बनाने के प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करेगी.'

वहीं, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दे रही है जिससे देश की आयात निर्भरता घटे और घरेलू उत्पादन बढ़े. इस योजना को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

आयात बिल में भारी कमी का लक्ष्य

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत ने LNG, यूरिया, अमोनिया, मेथेनॉल और कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर लगभग ₹2.77 लाख करोड़ खर्च किए. नई योजना का लक्ष्य इन वस्तुओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयात खर्च को कम करना है.

कंपनियों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

इस योजना के तहत कोयला गैसीफिकेशन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी. किसी भी प्रोजेक्ट को मशीनरी और प्लांट लागत पर अधिकतम 20 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिल सकता है, जबकि एक परियोजना को अधिकतम ₹5,000 करोड़ तक की सहायता दी जा सकती है. साथ ही कंपनियों को 30 साल तक कोयला आपूर्ति की गारंटी भी दी जाएगी.

निवेश और रोजगार की संभावनाएं

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से देश में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश आ सकता है. इससे लगभग 50,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है. यह परियोजनाएं मुख्य रूप से कोयला-समृद्ध राज्यों में स्थापित की जा सकती हैं.

देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा फायदा

सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर गैस और रसायनों का उत्पादन बढ़ने से विदेशी बाजारों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा. इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा.

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

इस योजना में घरेलू तकनीक के उपयोग को भी प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि देश में इस क्षेत्र की पूरी औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को विकसित करना भी है.
 


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