✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / भारत@80: वित्तीय स्वतंत्रता और धन सृजन का एक नया दौर

भारत@80: वित्तीय स्वतंत्रता और धन सृजन का एक नया दौर

लेखक एस रवि के अनुसार, भारत की वित्तीय यात्रा बुनियादी बैंकिंग से धन सृजन की ओर बढ़ रही है, जहां Gen Z, डिजिटल निवेश और उत्तराधिकार योजना अगले चरण को आकार दे रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

जैसे-जैसे भारत अपनी आजादी के 80 वर्ष पूरे करने के करीब पहुंच रहा है, हमारी राष्ट्रीय आर्थिक कहानी एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. अब हमारा ध्यान केवल अर्थव्यवस्था को स्थिर करने तक सीमित नहीं है; हम सक्रिय रूप से वैश्विक नेतृत्व और 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं. इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को एक शक्तिशाली ताकत आगे बढ़ा रही है: पूंजी का लोकतंत्रीकरण, जो 1.4 अरब लोगों को वास्तविक वित्तीय स्वतंत्रता की ओर ले जा रहा है.

इस आर्थिक स्वतंत्रता को वास्तव में हासिल करने के लिए हमें लोगों को केवल बैंक खातों तक पहुंच देने से आगे बढ़ना होगा. भविष्य धन सृजन, निवेश के तरीकों के आधुनिकीकरण, Gen Z को इस प्रक्रिया में शामिल करने और यह सुनिश्चित करने का है कि संपत्ति अगली पीढ़ी तक सुचारू रूप से पहुंच सके.

बुनियादी बैंकिंग से धन सृजन की ओर बदलाव

भारत में वित्तीय समावेशन की शुरुआती पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों को एक पहचान, बैंक खाता और डिजिटल लेनदेन करने का माध्यम उपलब्ध कराना था. जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) पहल इस दिशा में गेम-चेंजर साबित हुई, जिसने 54 करोड़ से अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा और UPI लेनदेन को हर महीने 20 लाख करोड़ रुपये से आगे पहुंचाने में मदद की. हालांकि, केवल लेनदेन करने की क्षमता से स्थायी संपत्ति का निर्माण अपने आप नहीं हो जाता. हम वर्तमान में अपने आर्थिक विकास के तीन प्रमुख चरणों से गुजर रहे हैं:

चरण 1 - बुनियादी ढांचा: जन धन और (Aadhaar Redacted) जैसी व्यवस्थाओं के जरिए सभी को औपचारिक बैंक खातों और बुनियादी बचत साधनों से जोड़ना.

चरण 2 - तेज लेनदेन: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मुफ्त और निर्बाध डिजिटल भुगतान, जैसे UPI, और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण का विस्तार करना.

चरण 3 - पूंजी वृद्धि: बुनियादी बचत से आगे बढ़कर परिवारों को बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों, जैसे सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs), म्यूचुअल फंड और कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करने में मदद करना.

GDP को 7 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ाने के लिए हमें घरेलू बचत को सक्रिय निवेश में बदलना होगा. क्रेडिट स्कोर के लिए वैकल्पिक डिजिटल डेटा का उपयोग करके वित्तीय क्षेत्र अनौपचारिक श्रमिकों और छोटे व्यवसायों (MSMEs) को आवश्यक ऋण उपलब्ध कराने में भी मदद कर रहा है, जिससे सूक्ष्म उद्यमी प्रभावी रूप से राष्ट्रीय विकास के प्रमुख इंजन बन रहे हैं. इसके अलावा, माइक्रोफाइनेंस संस्थान और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां शिकारी ऋण व्यवस्था की जगह ले रही हैं, जिससे कम आय वाले परिवारों को कर्ज के जाल से बचने और औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ने में मदद मिल रही है.

Gen Z कैसे बदल रही है "वित्तीय स्वतंत्रता" की परिभाषा

भारत की Gen Z (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग) अब कार्यबल में सबसे तेजी से बढ़ने वाला समूह है और उनका पैसे को देखने का नजरिया अपने माता-पिता से काफी अलग है. जहां पुरानी पीढ़ियों को रियल एस्टेट, भौतिक सोने और फिक्स्ड डिपॉजिट में सुरक्षा नजर आती थी, वहीं Gen Z खेल के नियम बदल रही है.

माइक्रो-इन्वेस्टिंग ऐप्स और कम लागत वाली ब्रोकरेज सेवाओं की बदौलत युवा निवेशक बहुत कम उम्र में ही इक्विटी बाजार में उतर रहे हैं और SIP को एक सामान्य मासिक आदत बना रहे हैं. वे FIRE (Financial Independence, Retire Early) आंदोलन से काफी प्रभावित हैं और जीवनभर एक ही नौकरी में बने रहने के बजाय व्यक्तिगत लचीलापन, करियर में गतिशीलता और नकदी की उपलब्धता को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, एल्गोरिदम और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर उनकी निर्भरता उन्हें बाजार की अस्थिरता के प्रति भी संवेदनशील बनाती है.

पीढ़ियों के बीच धन प्रबंधन की आदतों में बदलाव

पुराने दौर का वेल्थ मैनेजमेंट इस डिजिटल-फर्स्ट पीढ़ी के लिए अब कारगर नहीं है. वित्तीय संस्थानों को अत्यधिक व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप टूल्स, स्वचालित जोखिम प्रबंधन और बेहतर वित्तीय शिक्षा के साथ आगे आना होगा, ताकि Gen Z की अल्पकालिक ट्रेडिंग आदतों को दीर्घकालिक धन सृजन की रणनीतियों में बदला जा सके.

बाजारों का विस्तार और विरासत का हस्तांतरण

भारत के वित्तीय बाजार तेजी से बढ़ रहे हैं और हैरानी की बात यह है कि इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा—नए डीमैट खातों का 40 प्रतिशत से अधिक—केवल बड़े शहरों से नहीं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है. SIP के जरिए निवेश करने वाले स्थानीय और आम निवेशकों की इस बढ़ती संख्या ने एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है, जो घरेलू बाजारों को विदेशी निवेश के अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव से बचा रहा है.

हालांकि, इस स्थिरता को बनाए रखने के लिए निवेशकों को केवल शेयरों से अधिक विकल्प देने होंगे. लोगों को सुरक्षित और संतुलित निवेश विकल्प उपलब्ध कराने के लिए कॉरपोरेट डेट, ग्रीन बॉन्ड और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) तक पहुंच का विस्तार करना जरूरी है.

आने वाला विशाल धन हस्तांतरण

हम तेजी से एक बड़े वित्तीय पड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं: अगले एक दशक में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की निजी संपत्तियां और पारिवारिक व्यवसायों की इक्विटी Gen Z और मिलेनियल्स को हस्तांतरित की जाएगी. ऐतिहासिक रूप से भारत में औपचारिक एस्टेट प्लानिंग की कमी के कारण जटिल कानूनी विवाद और संपत्तियों का बंटवारा देखने को मिला है.

इससे बचने के लिए परिवारों को आधुनिक उत्तराधिकार योजना की जरूरत है. इसका मतलब है कानूनी ट्रस्ट बनाना, वैश्विक कर रणनीतियों में तालमेल स्थापित करना और पुरानी पीढ़ी के संस्थापकों की पारंपरिक सोच तथा उनके तकनीक-प्रेमी, ESG-केंद्रित Gen Z उत्तराधिकारियों की मानसिकता के बीच संतुलन बनाना. हमें डिजिटल संपत्तियों और बौद्धिक संपदा के हस्तांतरण के लिए भी स्पष्ट नियमों की जरूरत है.

2027 का रोडमैप

2027 में आजादी के 80 वर्ष पूरे होने के करीब पहुंचते समय यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारी आर्थिक वृद्धि मजबूत और समावेशी बनी रहे, वित्तीय क्षेत्र को तीन मुख्य बातों पर ध्यान देना होगा:

1. बेहतर ग्रामीण ऋण: हमें केवल ग्रामीण जमाओं को रखने से आगे बढ़कर अनौपचारिक व्यवसायों और किसानों को नकदी प्रवाह के आधार पर बिना संपार्श्विक ऋण देना शुरू करना होगा.

2. मजबूत साइबर सुरक्षा: लाखों लोग डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में धोखाधड़ी का पता लगाने के लिए AI का उपयोग करना होगा और संस्थागत भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत उपभोक्ता संरक्षण कोष स्थापित करने होंगे.

3. बाजारों को परिपक्व बनाना: दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू बीमा और पेंशन पूल को मजबूत करना होगा तथा युवा निवेशकों को शिक्षित करना होगा ताकि बाजार में गिरावट के दौरान वे घबराकर फैसले न लें.

अंततः, भारत की सफलता को केवल शेयर बाजार के रिकॉर्ड स्तर या GDP के आंकड़ों से नहीं मापा जाएगा. वास्तविक स्वतंत्रता तब हासिल होगी, जब ग्रामीण इलाके के एक सड़क विक्रेता से लेकर बड़े शहर के Gen Z उद्यमी तक, हर नागरिक के पास अपने वित्तीय भविष्य पर पूरी तरह नियंत्रण रखने के लिए आवश्यक साधन और ज्ञान होगा.

(अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं और जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करें.)

एस रवि, स्तंभकार

(लेखक एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. इसके अलावा वह रवि राजन एंड कंपनी एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर, टूरिज्म फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन  और बीएसई के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं. उनके विचारों और सुझावों ने नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.)

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कविता में एक शोकगीत: मेरे मित्र और बैचमेट, हेमचंद सिरोही, IAS

केजे अल्फोंस लिखते हैं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और बिहार के पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में, हेमचंद सिरोही को प्रशासनिक कुशलता, जन-केंद्रित शासन और जनसेवा में योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त था. उनके योगदानों में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की मान्यता दिलाना और जमीनी स्तर पर विकास की पहल शामिल थीं.

4 days ago

दो दुनियाओं के बीच जिंदगी: उथल-पुथल भरे समय की चुनौती

लेखक के अनुसार, हमारे आसपास की दुनिया उतनी नहीं बदली है, जितनी हमारे दिमाग के भीतर की दुनिया बदल गई है. लगातार आती खबरों, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाली चिंताओं के इस दौर में चुनौती है अपना ध्यान फिर से अपने नियंत्रण में लेना और उन चीजों पर फोकस करना, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.

4 days ago

कलाकार की अनंत रेखाएं: जोगेन चौधरी को श्रद्धांजलि

87 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रख्यात कलाकार अपने पीछे ऐसी विशिष्ट कला छोड़ गए हैं, जो उनकी खास क्रॉस-हैचिंग शैली, असामान्य रेखाओं और गहराई से मानवीय चित्रों के लिए पहचानी जाती है.

5 days ago

समुद्र मंथन का अर्थशास्त्र: समृद्धि के लिए विरोधी शक्तियों की जरूरत क्यों है

लेखिका प्रियंका शर्मा कैंतुरा इस लेख में बताती हैं कि देवताओं, असुरों और लक्ष्मी के प्राकट्य की प्राचीन कथा प्रतिस्पर्धा, सहयोग और धन सृजन के बारे में क्या सीख देती है.

1 week ago

जेमी बीटन: असाधारण दिमाग और अरबों डॉलर के कारोबार के पीछे ज्योतिषीय गणना

क्रिमसन एजुकेशन के संस्थापक की शैक्षणिक महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता में उभार और 2027 की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण

1 week ago


बड़ी खबरें

दिल्ली में 1 नवंबर से BS-6 से पुराने वाहनों की नो एंट्री, जानें किन गाड़ियों को मिलेगी छूट

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा.

1 day ago

सरदार पटेल के विचारों पर आगे बढ़ रहा भारत, रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये के पार: राजनाथ सिंह

सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर भारत-भारती ने दिल्ली में आयोजित किया राष्ट्रीय समारोह, रक्षा मंत्री ने कहा- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश एकजुट रहेगा

18 hours ago

तमिलनाडु में 5 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिलेगा ब्रॉडबैंड कनेक्शन, केंद्र ने दी सब्सिडी को मंजूरी

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के 4,767 गांवों तक मांग के आधार पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी. केंद्र की वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी.

1 day ago

सोना 4,200 रुपये और चांदी 10 हजार रुपये टूटी, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचे भाव; जानें गिरावट की वजह

MCX पर चांदी करीब 5 फीसदी और सोना 3 फीसदी तक टूट गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

1 day ago

IDBI बेच रही थी LIC, उसी दौरान Fairfax की कंपनी के बोर्ड में भी रहे LIC के निदेशक

पूर्व नीति आयोग प्रमुख, RBI के डिप्टी गवर्नर, SEBI बोर्ड के सदस्य, रक्षा सचिव और LIC के चेयरमैन जैसे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोगों को Fairfax की भारतीय कंपनियों ने अपने साथ जोड़ा.

1 day ago