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बजट से कहीं हुई है निराशा तो कुछ योजनाएं बदल सकती हैं गेम 

केन्‍द्र सरकार ने 1 करोड़ घरों में सोलर इंस्‍टाल करके 300 यूनिट बिजली फ्री करने की बात कही है. इसके बाद जो बिजली बचेगी उससे आमदनी भी की जा सकती है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमरण ने वर्ष 2024-25 के लिए अंतरिम बजट को पेश कर दिया है. चुनावी साल होने की वजह से उम्‍मीद जताई जा रही थी कि सरकार हो सकता है पिछले साल की तरह इस बार भी कई तोहफों का ऐलान करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस बजट ने सबसे ज्‍यादा आयकर वर्ग को निराश किया है. हालांकि सरकार की ओर से कई अन्‍य योजनाओं को लेकर बड़े ऐलान किए गए हैं जिनमें इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को लेकर खर्च बढ़ाने और सोलर योजना लाने जैसे ऐलान हैं. 

 आयकरदाता हुआ है निराश 
 इस बजट ने सबसे ज्‍यादा आयकर वर्ग को निराश किया है. वो भी तब जब इस देश में इस साल बंपर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर का संग्रह हुआ है. बावजूद इसके वेतनभोगी व्यक्तियों और व्यापारियों को कोई राहत   नहीं दी गई. स्टैंडर्ड डिडक्शन और मेडिक्लेम में राहत की उम्मीद थी. टीडीएस तंत्र के सरलीकरण और युक्तिसंगत होने की भी उम्मीद थी, लेकिन उम्मीदें  टूट गईं. जीएसटी कर प्रक्रियाओं और प्रशासन को सरल बनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया. जीएसटी भारत में सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है.

  एमएसएमई सेक्टर को भी कोई राहत नहीं मिली
 प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर केवल एक राहत का स्वागत है, वह भी साल भर में कर प्रशासन की अक्षमता और अनावश्यक और गैर-सुधारित मांगों के कारण जमा हुई है. ‘बड़ी संख्या में छोटी, गैर-सत्यापित, गैर-समाधान या विवादित प्रत्यक्ष कर मांगें हैं, उनमें से कई वर्ष 1962 से पहले की हैं, जो अभी भी बही-खातों में बनी हुई हैं, जिससे ईमानदार करदाताओं को चिंता हो रही है और उससे आगामी वर्षों के रिफंड में बाधा पैदा हो रही है. मैं वित्तीय वर्ष 2009-10 तक की अवधि के लिए पच्चीस हजार रुपये (₹25,000) तक और वित्तीय वर्ष 2010-11 से 2014-15 तक की अवधि के लिए दस हजार रुपये (₹10,000) तक की ऐसी बकाया प्रत्यक्ष कर मांगों को वापस लिया जाना चाहिए था.  इससे लगभग एक करोड़ करदाताओं को लाभ होने की उम्मीद है. 

हम निम्नलिखित 5 घोषणाओं का स्वागत करते हैं, हालाँकि योजनाओं की बारीकियाँ और समयबद्ध तरीके से उनका कार्यान्वयन हमारी अर्थव्यवस्था और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. ऐसा न हो कि ये बजट में पिछली कई घोषणाओं की तरह सिर्फ कागजी शेर बनकर न रह जाएं. 

● पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में अगले 5 वर्षों में दो करोड़ और घरों का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और बुनियादी ढांचे पर खर्च को बढ़ावा देगा.
● एक करोड़ घरों के लिए छत पर सोलराइजेशन और हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली की योजना प्रभावशाली है. वैकल्पिक ऊर्जा का दोहन समय की मांग है. यह हरित क्रांति के अनुरूप भारत में सौर क्रांति ला सकता है. इससे देश के फ्यूल खपत में भी कमी आ सकती है. 
● महिलाओं के स्वयं सहायता समूह विशेष रूप से पहाड़ी और रेतीले क्षेत्रों में परिवारों के जीवन को बदल रहे हैं. 2 करोड़ से 3 करोड़ लखपति दीदी का सरकार का संकल्प भारत में प्राप्त करने योग्य है और यह ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता के साथ लाएगा.
● अनुसंधान और नवाचार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को लंबी अवधि के वित्तपोषण या पुनर्वित्त और कम या शून्य ब्याज दरों के साथ पचास साल के ब्याज मुक्त ऋण के साथ एक लाख करोड़ रुपये के कोष की घोषणा का स्वागत किया जाना चाहिए. 
● बुनियादी ढांचे के विकास, 3 रेलवे कॉरिडोर, विमानन, मेट्रो आदि पर पूंजीगत व्यय को 11.1% बढ़ाकर ग्यारह लाख, ग्यारह हजार, एक सौ ग्यारह करोड़ रुपये (`11,11,111 करोड़) करने की घोषणा की गई है.  यह जीडीपी का 3.4 फीसदी होगा.

ये विचार लेखक संजय गुप्‍ता के हैं. वो पेशे से चार्टेड एकाउंटेट हैं और इनकम टैक्‍स के एक्‍सपर्ट हैं


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