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कमोडिटीकरण से कैसे बचें कंपनियां? उत्पाद से आगे सोचने की जरूरत

अतुल जैन का तर्क है कि टिकाऊ अंतर पैदा करने के लिए मौजूदा उत्पादों को लगातार बेहतर बनाने के बजाय यह समझना जरूरी है कि ग्राहक आगे क्या चाहते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago

अतुल जैन

हर उद्योग को अंततः एक ही सवाल का सामना करना पड़ता है. जब ग्राहक आपके उत्पाद को दूसरे उत्पादों के समान और उनके स्थान पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले विकल्प के रूप में देखने लगते हैं, तो क्या होता है?

इस स्थिति में आमतौर पर कंपनियां वितरण, ब्रांडिंग या कीमत पर अधिक निवेश करने लगती हैं. ये सभी पहलू महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनसे शायद ही कभी मूल चुनौती का समाधान होता है. कमोडिटीकरण से विशेषज्ञता की ओर बदलाव तब शुरू होता है, जब कोई कारोबार यह पूछना बंद कर देता है कि उसी उत्पाद को अधिक कैसे बेचा जाए और इसके बजाय यह तलाशने लगता है कि ग्राहकों की ऐसी कौन-सी अधूरी जरूरत है, जिसके बारे में उन्होंने अभी तक बात भी नहीं की है.

सामान रखने वाले बैग और सूटकेस (लगेज) उद्योग पर गौर करें.

दशकों तक लगेज को मुख्य रूप से एक उपयोगी उत्पाद श्रेणी के रूप में देखा गया. लोग अपना सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए सूटकेस खरीदते थे. बिक्री का फैसला टिकाऊपन, कीमत और उपलब्धता के आधार पर होता था. उत्पाद का मूल उद्देश्य कभी बदलने वाला नहीं था. इस वजह से यह श्रेणी कमोडिटीकरण का एक आदर्श उदाहरण लगती थी.

इसके बावजूद, इस श्रेणी ने बार-बार खुद को नए सिरे से विकसित किया. हर बार सूटकेस सूटकेस ही रहा. बदलाव इस बात में आया कि ग्राहक किस चीज के लिए अधिक कीमत चुकाने को तैयार थे.

सामग्री का सवाल

अंतर पैदा करने की शुरुआती लहर सामग्री के जरिए आई. जैसे-जैसे यात्रा अधिक आम और विविध होती गई, उपभोक्ता हल्के लेकिन मजबूत लगेज की मांग करने लगे. इसका पहला जवाब कठोर प्लास्टिक के रूप में सामने आया. 1960 के दशक के आखिरी वर्षों में इंजेक्शन-मोल्डेड पॉलीप्रोपाइलीन के खोल वाले सूटकेस बाजार में आए. बाद में यह तरीका आधुनिक हार्ड लगेज बनाने के सबसे व्यापक रूप से स्वीकार किए जाने वाले तरीकों में शामिल हो गया. इसके बाद भी उद्योग में नवाचार जारी रहा. ध्यान उन्नत पॉलिमर, अधिक मजबूत बाहरी खोल और ऐसे पदार्थों पर केंद्रित हुआ, जो अधिक टूट-फूट सहन कर सकें. ग्राहकों ने इन बदलावों पर ध्यान दिया और इनके लिए अधिक कीमत चुकाई.

पहिए, हैंडल और आवाजाही

आवाजाही को आसान बनाने में सुधार एक और उल्लेखनीय बदलाव था. कंपनियों ने समझा कि यात्री केवल बैग और सूटकेस नहीं ले जा रहे हैं, बल्कि हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, फुटपाथों और भीड़भाड़ वाले टर्मिनलों से होकर गुजर रहे हैं. इसके जवाब में उद्योग ने चार पहियों वाले स्पिनर सूटकेस, बेहतर गतिशीलता, टेलीस्कोपिक हैंडल और वजन को बेहतर तरीके से वितरित करने वाली व्यवस्थाओं जैसे नवाचार पेश किए. इनमें से किसी ने भी लगेज के मूल काम को नहीं बदला. बदलाव इस बात में आया कि उपभोक्ताओं के लिए अपनी यात्रा के दौरान सामान ले जाना कितना आसान हो गया.

एक उत्पाद के रूप में मानसिक सुकून

यात्री यह भरोसा चाहते थे कि उनका सामान सुरक्षित रहेगा और सही सलामत पहुंचेगा. इसके जवाब में उद्योग ने एकीकृत लॉक, छेड़छाड़ से सुरक्षित जिपर, मल्टी-पॉइंट लॉकिंग सिस्टम, RFID-ब्लॉकिंग पॉकेट, स्मार्ट ट्रैकिंग सुविधाएं और हाल के वर्षों में बायोमेट्रिक एक्सेस जैसी सुविधाएं पेश कीं. तकनीकें बदलती रहीं, लेकिन उद्देश्य वही रहा- यात्रियों को अधिक मानसिक सुकून देना.

जब स्मार्ट तकनीक का सामना हकीकत से हुआ

2015 से 2020 के बीच कनेक्टेड लगेज के क्षेत्र में उद्योग के प्रयोग इसके विकास का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहे. ऐसे सूटकेस बाजार में आए, जिनमें फोन चार्ज करने के लिए इनबिल्ट पावर बैंक, चेक-इन काउंटर पर वजन का अनुमान लगाने की जरूरत खत्म करने वाले सेंसर और ऐप से जुड़ी सुविधाएं थीं. इनका उद्देश्य लगेज को यात्रियों के साथ रहने वाले अन्य उपकरणों जितना स्मार्ट बनाना था. इनमें से कुछ विचार ज्यादा समय तक नहीं टिके, जबकि कुछ ने यह समझने में मदद की कि यात्री वास्तव में किन सुविधाओं को महत्व देते हैं.

उपयोगिता से पहचान तक

लगेज तेजी से आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम बन रहा है. उपभोक्ता अब यात्रा से जुड़े उत्पाद केवल सामान रखने की क्षमता या टिकाऊपन के आधार पर नहीं चुनते. डिजाइन, सुंदरता, शिल्प कौशल, व्यक्तिगत पसंद के अनुसार बदलाव और ब्रांड से जुड़ाव भी खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करते हैं. कई श्रेणियों में लगेज की स्थिति घड़ियों या जूतों जैसी हो गई है, जो कार्यात्मक और भावनात्मक, दोनों तरह की जरूरतें पूरी करते हैं. कभी केवल उपयोगिता के लिए की जाने वाली खरीदारी अब व्यक्तिगत पहचान का विस्तार बन गई है.

अगला पड़ाव

स्थिरता अब एक बार फिर मूल्य की परिभाषा का विस्तार कर रही है. वैश्विक ब्रांडों ने रिसाइकिल किए गए प्लास्टिक कचरे, जैसे दही के कप और प्लास्टिक की बोतलों से बने उत्पादों की श्रृंखलाएं पेश करना शुरू कर दिया है. इन उत्पादों को विशेषज्ञ रिसाइक्लिंग भागीदारों के साथ कई वर्षों के विकास के बाद तैयार किया गया है. ग्राहक अब केवल यह नहीं पूछ रहे कि कोई उत्पाद कैसा प्रदर्शन करता है, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि इस्तेमाल के बाद वह क्या पीछे छोड़ता है. जो ब्रांड इस सवाल का विश्वसनीय जवाब देंगे, वे ग्राहकों की पसंद में एक नई जगह बना सकेंगे.

हर उद्योग के लिए सीख

मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से किसी भी बदलाव ने लगेज के मूल काम को नहीं बदला. इन बदलावों ने केवल यह बदला कि ग्राहक किस चीज को महत्व देते हैं.

यह अंतर हर उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है. सबसे सफल उत्पाद श्रेणियां शायद ही कभी वे होती हैं, जो अपने मूल उद्देश्य तक सीमित रहती हैं. उदाहरण के लिए, एथलेटिक परिधान कभी मुख्य रूप से खेल प्रदर्शन को ध्यान में रखकर बनाए जाते थे. आज एथलीजर (Athleisure) के बढ़ते चलन से उपभोक्ताओं की कहीं व्यापक जरूरत का पता चलता है, जिसमें आराम, बहुउपयोगिता और आत्म-अभिव्यक्ति उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितना कि खेल के लिए उपयोगी होना.

गद्दे भी घर की जरूरत के लिए खरीदे जाने वाले उत्पाद से बदलकर वेलनेस श्रेणी का हिस्सा बन गए हैं, जहां नींद की गुणवत्ता, शरीर की रिकवरी और स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाता है. यहां तक कि पैकेज्ड पानी भी केवल प्यास बुझाने तक सीमित नहीं रहा. अब इसकी अलग-अलग श्रेणियां शुद्धता, खनिजों की मात्रा, सुविधा और प्रीमियम अनुभव के आधार पर तय होती हैं.

कमोडिटीकरण से बाहर निकलने वाले संगठन अपने प्रतिस्पर्धियों से पहले इस बदलाव को समझ लेते हैं. वे उत्पाद को लगातार बेहतर बनाने के बजाय उसके इर्द-गिर्द मिलने वाले मूल्य का विस्तार करके अलग पहचान बनाते हैं.

एक बार यह बदलाव हो जाए, तो नए अवसरों को पहचानना आसान हो जाता है. बातचीत का केंद्र उत्पाद की विशेषताओं से हटकर ग्राहक के अनुभव पर आ जाता है. अपने कारोबार को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे नेतृत्वकर्ताओं के लिए शायद यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है- ग्राहक को अगली जरूरत क्या है और उसे पूरा करने के लिए हम ही सही विकल्प क्यों हैं?

डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं और जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को दर्शाते हों.

अतिथि लेखक: अतुल जैन, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) VIP Industries 


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