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HDFC बैंक के पहले बाहरी CEO होंगे अनूप बागची, सामने होंगी ये 6 बड़ी प्राथमिकताएं
जैसे-जैसे अनूप बागची 27 अक्टूबर को एचडीएफसी बैंक की कमान संभालने की तैयारी कर रहे हैं, भरोसा बहाल करना, विकास और लाभप्रदता को मजबूत करना, ग्राहक अनुभव में सुधार करना और प्रतिभाओं को एक दिशा में लाना उनके शुरुआती एजेंडे को परिभाषित करेगा.
डॉ. अनुराग बत्रा 1 hour ago
एचडीएफसी बैंक (HDFC) में इंतजार खत्म हो गया है. सशिधर जगदीशन का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसको लेकर कई हफ्तों की अटकलों के बाद देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक ने आईसीआईसीआई समूह के अनुभवी अनूप बागची को अपना अगला प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चुना है.
भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 अक्टूबर को 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले तीन साल के कार्यकाल के लिए बागची की नियुक्ति को मंजूरी दे दी. एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने भी 2 अक्टूबर से उन्हें अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया है, जो शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है.
यह नियुक्ति एक और कारण से महत्वपूर्ण है: बागची एचडीएफसी बैंक के शीर्ष पद पर पहुंचने वाले पहले बाहरी व्यक्ति होंगे.
जिस संस्थान का नेतृत्व परंपरागत रूप से आंतरिक प्रतिभाओं से उभरता रहा है, वहां आईसीआईसीआई के माहौल में ढले एक अनुभवी व्यक्ति का चयन पुरानी परंपरा से एक महत्वपूर्ण बदलाव है. यह ऐसे समय में भी हुआ है जब एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय के बाद काफी बड़े पैमाने पर संचालन की चुनौतियों से निपट रहा है और विकास, लाभप्रदता तथा निवेशकों के भरोसे से जुड़े सवालों का समाधान कर रहा है.
आईसीआईसीआई का अनुभव
बागची के पास बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है. 1992 से आईसीआईसीआई समूह से जुड़े उनके करियर में ट्रेजरी, रिटेल और होलसेल बैंकिंग, निवेश बैंकिंग, पूंजी बाजार, वेल्थ मैनेजमेंट, बीमा और डिजिटल वित्तीय सेवाएं शामिल रही हैं.
उन्होंने 2017 से 2023 के बीच आईसीआईसीआई बैंक के कार्यकारी निदेशक के रूप में काम किया, जहां उन्होंने रिटेल, बिजनेस और ग्रामीण बैंकिंग तथा बाद में होलसेल बैंकिंग की जिम्मेदारी संभाली. वह आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का भी नेतृत्व कर चुके हैं और वर्तमान में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ हैं.
यह व्यापक अनुभव एचडीएफसी बैंक में उपयोगी हो सकता है, जहां चुनौती अब केवल पैमाने की नहीं है. काम यह है कि इस पैमाने को मजबूत विकास, लाभप्रदता और बेहतर ग्राहक परिणामों में बदला जाए.
बागची की नियुक्ति इस बात को भी रेखांकित करती है कि आईसीआईसीआई समूह के माहौल ने वर्षों में कितनी नेतृत्व क्षमता तैयार की है. समूह से जुड़े कई अधिकारी आगे चलकर प्रमुख वित्तीय संस्थानों का नेतृत्व कर चुके हैं. बागची अब इस सूची में शामिल हो गए हैं, लेकिन उनके सामने आईसीआईसीआई बैंक के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के प्रतिद्वंद्वी का नेतृत्व करने की विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है.
पहला, संस्थान को समझना
किसी बाहरी सीईओ की नियुक्ति के साथ तुरंत व्यापक बदलावों की तलाश करने का स्वाभाविक आकर्षण होता है. हालांकि, एचडीएफसी बैंक में यह समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है कि पहले से क्या अच्छा काम कर रहा है.
बैंक के पास मजबूत फ्रेंचाइजी, विशाल ग्राहक आधार, व्यापक वितरण नेटवर्क और भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के सबसे पहचाने जाने वाले ब्रांडों में से एक है. एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय ने अभूतपूर्व पैमाने का संस्थान बनाया, लेकिन विकास, लाभप्रदता और ग्राहक भरोसा बनाए रखते हुए दो बड़े संगठनों को एकीकृत करना हमेशा जटिल होने वाला था.
इसलिए बागची को ऐसी संस्था विरासत में मिल रही है, जिसमें काफी मजबूती है, साथ ही कुछ ऐसे स्पष्ट क्षेत्र भी हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है.
भरोसा बहाल करना
प्राथमिकताओं में निवेशकों, ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच भरोसा मजबूत करना शामिल होगा. किसी वित्तीय संस्थान के लिए भरोसा एक परिचालन संपत्ति है. इसे केवल संचार के जरिए मजबूत नहीं किया जा सकता; अंततः यह लगातार प्रदर्शन, कॉरपोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर निर्भर करता है.
नेतृत्व परिवर्तन एचडीएफसी बैंक को अपने अगले चरण के लिए स्पष्ट दिशा तय करने का अवसर देता है. बागची इस दिशा को आंतरिक और बाहरी तौर पर किस तरह स्पष्ट करते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा, लेकिन उसके बाद आने वाले आंकड़े कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे.
जमा और विकास
केंद्रीय चुनौतियों में से एक जमा कारोबार होगा. टिकाऊ ऋण वृद्धि के लिए मजबूत फंडिंग आधार की जरूरत होती है, जिससे जमा जुटाना और देनदारी पक्ष की गुणवत्ता महत्वपूर्ण हो जाती है. एचडीएफसी बैंक का व्यापक शाखा नेटवर्क उसे काफी पहुंच प्रदान करता है. अवसर यह होगा कि भौतिक वितरण को मजबूत डिजिटल जुड़ाव के साथ जोड़ते हुए इस नेटवर्क को अधिक उत्पादक बनाया जाए.
उद्देश्य केवल आकार बढ़ाने के लिए विकास नहीं हो सकता. एचडीएफसी बैंक जैसे पहले से बड़े पैमाने पर काम कर रहे बैंक के लिए विकास की गुणवत्ता और लाभप्रदता लगातार अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है.
लाभप्रदता फिर से केंद्र में
बाजार अंततः प्रदर्शन के आधार पर नेतृत्व परिवर्तन का आकलन करेगा. मार्जिन, रिटर्न अनुपात, परिचालन दक्षता, कर्ज की गुणवत्ता और टिकाऊ विकास यह तय करेंगे कि एचडीएफसी बैंक अपने पैमाने को अधिक मूल्य में बदल पाता है या नहीं. विभिन्न वित्तीय सेवा कारोबारों में बागची का अनुभव उन्हें इस समीकरण को देखने के लिए व्यापक दृष्टिकोण देता है.
उनका काम केवल एचडीएफसी बैंक को बड़ा बनाना नहीं होगा. उनका काम पहले से विशाल संस्थान को अधिक उत्पादक और कुशल बनाना होगा.
तकनीक से ग्राहक अनुभव में सुधार जरूरी
तकनीक और ग्राहक अनुभव भी एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. बड़े पैमाने पर ग्राहकों को सेवाएं देने वाले बैंक के लिए डिजिटल क्षमता तभी मायने रखती है, जब वह बैंकिंग को आसान बनाए. ग्राहकों में बिखरे हुए अनुभव, जटिल प्रक्रियाओं या धीमी सेवा के प्रति धैर्य लगातार कम हो रहा है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा और ऑटोमेशन उत्पादकता और व्यक्तिगत सेवाओं में सुधार कर सकते हैं, लेकिन अंतिम कसौटी यह होगी कि ग्राहकों को एचडीएफसी बैंक का अनुभव अधिक सरल, तेज और भरोसेमंद मिलता है या नहीं.
कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी
दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष संगठन के भीतर है. नेतृत्व परिवर्तन से स्वाभाविक रूप से अनिश्चितता और उम्मीदें पैदा होती हैं. बागची को वरिष्ठ नेतृत्व टीम के भीतर भरोसा कायम करना होगा, मजबूत प्रतिभाओं को बनाए रखना होगा और यह स्पष्ट करना होगा कि संस्थान किस दिशा में आगे बढ़ रहा है.
एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े संगठन को एक व्यक्ति के जरिए नहीं बदला जा सकता. सीईओ की भूमिका ऐसा माहौल तैयार करने की होगी, जिसमें बैंक के हजारों कर्मचारी उसकी दिशा को समझें और उसके अनुरूप काम कर सकें.
बाहरी व्यक्ति, लेकिन बैंकिंग के लिए बाहरी नहीं
बागची का बाहरी दृष्टिकोण विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकता है. वह एचडीएफसी बैंक के हालिया निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा रहे बिना आ रहे हैं, जबकि भारतीय बैंकिंग, नियमन, ग्राहकों और प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों की उन्हें गहरी समझ है.
इससे उन्हें ऐसे सवाल पूछने की क्षमता मिलती है, जो आंतरिक रूप से विकसित नेतृत्व टीम शायद न पूछे. साथ ही, एचडीएफसी बैंक की पहचान भी महत्वपूर्ण है. उद्देश्य आईसीआईसीआई के तरीके को पूरी तरह से यहां लागू करना नहीं हो सकता. बागची के सामने चुनौती उन खूबियों को बनाए रखने की होगी, जिन्होंने एचडीएफसी बैंक को भारत के सबसे सफल बैंकिंग फ्रेंचाइजी में से एक बनाया है, और साथ ही यह पहचानना होगा कि उसके अगले चरण के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं.
तत्काल एजेंडे को अंततः पांच प्राथमिकताओं में समेटा जा सकता है: भरोसा मजबूत करना, जमा में तेजी लाना, लाभप्रदता में सुधार करना, ग्राहक अनुभव को सरल बनाना और नए नेतृत्व के पीछे संगठन को एक दिशा में लाना.
बागची अपने साथ अनुभव लेकर आ रहे हैं. एचडीएफसी बैंक अपने साथ मजबूत फ्रेंचाइजी और व्यापक पैमाना लेकर चल रहा है.
उत्तराधिकार का सवाल अब हल हो चुका है. 27 अक्टूबर के बाद क्या होता है, यह तय करेगा कि यह नेतृत्व परिवर्तन एचडीएफसी बैंक के अगले विकास अध्याय की शुरुआत भी बनता है या नहीं.
डॉ. अनुराग बत्रा, BW रिपोर्टर्स
(डॉ. अनुराग बत्रा BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा एक्सचेंज4मीडिया समूह के संस्थापक हैं. पहली पीढ़ी के उद्यमी और मीडिया लीडर के रूप में वह एंजेल निवेशक, लेखक, टेलीविजन होस्ट और उद्यमियों तथा मीडिया पेशेवरों के मेंटर भी हैं. वह कई कॉरपोरेट और संस्थागत बोर्डों में काम करते हैं और प्रबंधन शिक्षा से उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है. एमडीआई गुरुग्राम के पूर्व छात्र बत्रा इसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में रह चुके हैं और एमडीआई एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे हैं. वह इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज के सदस्य भी हैं. एक उत्साही पाठक डॉ. बत्रा का मानना है कि जब जुनून किसी व्यक्ति का पेशा बन जाता है, तो काम एक गहरे उद्देश्य से जुड़ जाता है.)
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