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सालभर में 80% महंगी हुई हल्दी, ₹24,500 के पार पहुंचे वायदा भाव; आगे भी तेजी के आसार
हल्दी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच जिन किसानों ने अपनी उपज का भंडारण कर रखा है, वे आगे और ऊंचे भाव मिलने की उम्मीद में फिलहाल बिक्री से बच रहे हैं. इससे बाजार में उपलब्ध आपूर्ति सीमित रह सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
हल्दी की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है. बीते एक महीने में इसके दाम 18% से अधिक और एक साल में करीब 80% बढ़ चुके हैं. मांग में मजबूती, सीमित आपूर्ति और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की आशंका से कीमतों को सहारा मिल रहा है. उत्पादन में संभावित गिरावट और पुराने स्टॉक में कमी के चलते किसानों और स्टॉकिस्टों ने भी बिक्री सीमित कर दी है. ऐसे में आने वाले हफ्तों में हल्दी की कीमतों में और तेजी आने की आशंका जताई जा रही है.
सालभर में 80% बढ़े हल्दी के दाम
हल्दी की कीमतों में आई तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक महीने में इसके दाम 18% से अधिक बढ़ गए हैं, जबकि सालभर में कीमतों में करीब 80% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाजिर बाजार में तमिलनाडु की पेरुंदुरई मंडी में हल्दी के भाव ₹23,000 प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए हैं. वहीं, वायदा बाजार में नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर इसके भाव ₹24,500 प्रति क्विंटल से ऊपर निकल गए हैं.
बाजार में हल्दी की सीमित आवक, प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी और अगली फसल पर मौसम के संभावित असर से कीमतों को समर्थन मिल रहा है. बाजार में तेजी की उम्मीद के कारण किसान और स्टॉकिस्ट अपनी उपज बेचने में भी सावधानी बरत रहे हैं.
पुराने स्टॉक में कमी से बढ़ी चिंता
हल्दी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह पुराने स्टॉक में कमी भी है. पिछले सीजन में 20 लाख से अधिक बोरों के मुकाबले इस बार करीब 15 लाख बोरे कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक के रूप में उपलब्ध रहने का अनुमान है. कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक का मतलब पिछले सीजन से बचा हुआ माल है, जिसका इस्तेमाल नए सीजन में आपूर्ति के लिए किया जाता है.
कर्नाटक में सूखे को लेकर किए गए संयुक्त सर्वे के अनुसार, राज्य में हल्दी की खेती के कुल लगभग 18,000-20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में से 13,446 हेक्टेयर में फसल को नुकसान पहुंचा है. इससे हुए नुकसान का मूल्य ₹188.24 करोड़ आंका गया है.
पुराने स्टॉक में कमी से बाजार में आपूर्ति का अतिरिक्त बफर कमजोर हुआ है. ऐसे में यदि नई फसल का उत्पादन प्रभावित होता है, तो कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है.
वैश्विक बाजार में भारतीय हल्दी की मांग
मौसम संबंधी चिंताओं के बीच विदेशी खरीदारों की हल्दी में दिलचस्पी बनी हुई है. हालांकि, भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी मांग को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है. जुलाई 2026 में भारत से हल्दी का निर्यात पिछले साल के 15,071 टन से 10% घटकर 13,489 टन रह गया. हालांकि, अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान कुल निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस अवधि में निर्यात पिछले साल के 63,020 टन से 4% बढ़कर 65,476 टन पहुंच गया.
कुछ देशों में भारतीय हल्दी की मांग में तेज वृद्धि देखने को मिली. तुर्की को निर्यात 431% बढ़कर 3,007 टन, श्रीलंका को 644% बढ़कर 156 टन और नाइजीरिया को 983% बढ़कर 69 टन हो गया.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हल्दी की मांग मजबूत बनी हुई है. हालांकि, कुल निर्यात और कीमतों की दिशा पर घरेलू उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और वैश्विक मांग का असर बना रहेगा.
सूखे से अगली फसल पर खतरा
इरोड हल्दी मर्चेंट्स एंड गोडाउन ओनर्स एसोसिएशन के सचिव एम. सत्यमूर्ति के अनुसार, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, तेलंगाना के निजामाबाद और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति हल्दी की कीमतों को ऊपर धकेल रही है.
उन्होंने बताया कि पानी की कमी के कारण कुछ क्षेत्रों में हल्दी की बुवाई का रकबा पहले ही 20-30% तक घट चुका है. आने वाले महीनों में खेती का क्षेत्र और कम होने की आशंका है. यदि सूखे का असर लंबे समय तक बना रहता है, तो अगले साल हल्दी के उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है.
हालांकि, वर्ष 2026 में भारत में हल्दी उत्पादन करीब 15% बढ़ने का सरकारी अनुमान भी है. इसके पीछे खेती के रकबे में लगभग 20% की बढ़ोतरी को प्रमुख वजह बताया गया है, खासकर महाराष्ट्र में.
महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक में मानसून की बेहतर स्थिति के साथ तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के जलाशयों में पानी भरने से फसल को लेकर तत्काल चिंताएं कुछ कम हुई हैं. बारिश के बाद उत्तरी कर्नाटक में दोबारा बुवाई भी पूरी हो चुकी है. फिर भी अच्छी पैदावार के लिए आने वाले समय में मौसम का अनुकूल रहना जरूरी होगा.
आगे भी तेजी की उम्मीद, किसान बिक्री से बच रहे
हल्दी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच जिन किसानों ने अपनी उपज का भंडारण कर रखा है, वे आगे और ऊंचे भाव मिलने की उम्मीद में फिलहाल बिक्री से बच रहे हैं. इससे बाजार में उपलब्ध आपूर्ति सीमित रह सकती है.
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, तकनीकी रूप से हल्दी का बाजार अभी भी मजबूत तेजी के रुझान में है. कम उत्पादन की आशंका, पुराने स्टॉक में कमी, किसानों की सीमित बिक्री और घरेलू व निर्यात मांग में मजबूती जैसे कारक कीमतों को समर्थन दे रहे हैं.
हल्दी की खेती मुख्य रूप से तमिलनाडु के इरोड और धर्मपुरी जिलों के अलावा कर्नाटक के कुछ हिस्सों में होती है. इसकी खरीद-बिक्री इरोड और पेरुंदुरई की मंडियों के साथ करंगलपलायम और गोबिचेट्टीपलायम की कृषि उत्पादक सहकारी विपणन समितियों में भी होती है.
आने वाले समय में हल्दी की कीमतों की दिशा काफी हद तक मौसम, नई फसल की पैदावार, उपलब्ध पुराने स्टॉक और निर्यात मांग पर निर्भर करेगी. यदि आपूर्ति में कमी आती है और मांग मजबूत बनी रहती है, तो कीमतों में तेजी जारी रह सकती है.
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