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सेबी ने बदले क्लोजिंग ऑक्शन के नियम, 7 दिसंबर से लागू होंगे नए प्रावधान; जानें ट्रेडिंग और सेटलमेंट पर क्या होगा असर
नए नियमों के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है. इसका उद्देश्य ऑर्डर दर्ज करने और कीमत तय करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
बाजार नियामक सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के तहत एक्सपायरी वाले दिन डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस का निर्धारण कैश मार्केट में दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे तक के कारोबार के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर किया जाएगा. इसके अलावा क्लोजिंग ऑक्शन का समय, ऑर्डर दर्ज करने की प्रक्रिया और अधूरे ऑर्डर के निपटान के नियम भी बदले गए हैं. ज्यादातर बदलाव 7 दिसंबर, 2026 से लागू होंगे, जबकि अधूरे लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर से जुड़े नए प्रावधान 8 फरवरी, 2027 से प्रभावी होंगे.
VWAP के आधार पर तय होगा सेटलमेंट प्राइस
सेबी के नए नियमों के अनुसार, इंडेक्स डेरिवेटिव्स का सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए संबंधित इंडेक्स में शामिल शेयरों के दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे तक के VWAP को आधार बनाया जाएगा. वहीं, शेयर डेरिवेटिव्स के मामले में संबंधित शेयर का इसी अवधि का VWAP इस्तेमाल होगा. इस गणना में सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर हुए कारोबार को शामिल किया जाएगा.
VWAP यानी वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस एक ऐसा औसत भाव है, जिसमें अधिक मात्रा में कारोबार होने वाली कीमतों को ज्यादा महत्व दिया जाता है. एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन इस दौरान संबंधित शेयरों के औसत भाव और कारोबार की मात्रा की जानकारी उपलब्ध कराएंगे. साथ ही, बाजार के प्रतिभागियों को संभावित सेटलमेंट प्राइस के संकेत भी मिलते रहेंगे.
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की टाइमिंग में बदलाव
नए नियमों के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है. इसका उद्देश्य ऑर्डर दर्ज करने और कीमत तय करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है.
दोपहर 3:30 से 3:31 बजे तक रेफरेंस प्राइस की गणना की जाएगी और सामान्य कारोबार से CAS में बदलाव की प्रक्रिया पूरी होगी. इसके बाद 3:31 से 3:36 बजे तक निवेशक लिमिट और मार्केट, दोनों तरह के ऑर्डर दर्ज कर सकेंगे.
शाम 3:36 बजे के बाद ऑर्डर एंट्री बंद होने तक केवल लिमिट ऑर्डर दर्ज किए जा सकेंगे. इस अवधि में मार्केट ऑर्डर में बदलाव करने या उन्हें रद्द करने की अनुमति नहीं होगी. ऑर्डर दर्ज करने की प्रक्रिया शाम 3:38 से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय बंद की जा सकती है.
इंडेक्स और शेयर डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय क्या होगा?
नए प्रावधानों के तहत सामान्य कारोबारी दिनों में इंडेक्स डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी. हालांकि, जिन इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी उसी दिन होगी, उनमें कारोबार दोपहर 3:30 बजे बंद हो जाएगा.
शेयर डेरिवेटिव्स में एक्सपायरी वाले दिन भी ट्रेडिंग शाम 3:45 बजे तक जारी रह सकेगी. दूसरी ओर, कैश मार्केट का पोस्ट-क्लोजिंग सेशन शाम 3:50 से 4 बजे तक चलेगा. इस दौरान शेयरों के निर्धारित क्लोजिंग प्राइस पर सौदे किए जा सकेंगे.
अधूरे लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर के लिए क्या बदलेगा?
सामान्य कारोबारी सत्र में पूरे नहीं हो पाए लिमिट ऑर्डर को आम तौर पर CAS में आगे बढ़ाया जाएगा. हालांकि, स्टॉप-लॉस ऑर्डर और CAS के निर्धारित प्राइस बैंड से बाहर के ऑर्डर इस व्यवस्था में शामिल नहीं होंगे.
आइसबर्ग ऑर्डर ऐसे बड़े ऑर्डर होते हैं, जिनकी पूरी मात्रा एक साथ सार्वजनिक ऑर्डर बुक में दिखाई नहीं देती. नए नियमों के तहत निर्धारित प्राइस बैंड के भीतर ऐसे अधूरे ऑर्डर CAS में पूरी मात्रा दिखाने वाले लिमिट ऑर्डर में बदल जाएंगे. निवेशकों को मूल ऑर्डर दर्ज करते समय इस व्यवस्था से बाहर रहने का विकल्प भी मिलेगा.
इन ऑर्डर को प्राथमिकता देने का क्रम भी निर्धारित किया गया है. सामान्य कारोबारी सत्र से आगे बढ़ाए गए दूसरे लिमिट ऑर्डर के बाद, लेकिन CAS में नए दर्ज किए गए लिमिट ऑर्डर से पहले इन्हें समय की प्राथमिकता मिलेगी. इन प्रावधानों को 8 फरवरी, 2027 से लागू किया जाएगा.
सेबी ने क्यों बदले क्लोजिंग ऑक्शन के नियम?
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी. इसके बाद बाजार के प्रतिभागियों ने कम लिक्विडिटी, कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव और सेटलमेंट प्राइस को लेकर चिंताएं जताई थीं. सेबी के परामर्श पत्र पर 20,000 से अधिक सुझाव मिले थे.
ट्रेडर्स और ब्रोकर्स ने बाजार के आखिरी 30 मिनट के VWAP के आधार पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के विकल्प का समर्थन किया. उनका तर्क था कि बाजार के प्रतिभागी इस व्यवस्था से पहले से परिचित हैं और इसे समझना तथा लागू करना अपेक्षाकृत आसान है.
सेबी ने सामान्य कारोबारी सत्र और ऑक्शन को मिलाकर सेटलमेंट प्राइस तय करने के विकल्प पर भी विचार किया था. हालांकि, अंतिम व्यवस्था में 30 मिनट के VWAP को चुना गया. इसके अलावा, रेफरेंस प्राइस से एक फीसदी के दायरे से बाहर रखे गए लिमिट ऑर्डर को रद्द करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव अंतिम सर्कुलर में शामिल नहीं किया गया है.
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