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GMR D2C Fest: कंज्यूमर रिटेंशन से लेकर प्रॉफिटेबिलटी तक एक्सपर्ट्स ने खुलकर रखी अपनी बात 

Sereko की फाउंडर एवं CEO मालविका जैन ने कहा कि बावजूद इसके कि हम केवल एक ही वेयरहाउस ऑपरेट कर रहे हैं, हमने सुनिश्चित किया कि इससे कंज्यूमर एक्सपीरियंस प्रभावित न हो.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW बिजनेसवर्ल्ड के एसोसिएशन में आयोजित GMR Aerocity D2C फेस्ट में बिजनेस से जुड़ी हास्तियों ने शिरकत की. इस दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा भी हुई, जिनमें एक्सपर्ट्स ने अपने विचार साझा किए. इसी कड़ी में 'Scaling it Right: The Pursuit of Profitability' विषय पर आयोजित लीडरशिप सेशन में Perfora के को-फाउंडर तुषार खुराना, Sereko की फाउंडर एवं CEO मालविका जैन, Phool.Co के मार्केटिंग हेड Apurv Misal, Vosmos के CEO पियूष गुप्ता और Noise के COO उत्सव मल्होत्रा ने भाग लिया. BW Businessworld की एडिटोरियल लीड Reema Bhaduri ने पैनलिस्ट से अलग-अलग सवाल पूछे और सभी ने प्रभावशाली ढंग से हर एक सवाल का जवाब दिया.       

एक्सपीरियंशल बनाने पर जोर
सेशन की शुरुआत Reema Bhaduri ने बिजनेस, प्रॉफिटेबिलिटी और लीन ऑपरेशन से जुड़े सवाल के साथ की. जिसका सभी ने बारी-बारी से जवाब दिया. VOSMOS के CEO Piyush Gupta ने कहा - हम D2C ब्रैंड नहीं हैं, लेकिन उन्हें सपोर्ट करते हैं. हमारा ध्यान प्रोडक्ट को एक्सपीरियंशल बनाने पर ज्यादा रहता है, ताकि ग्राहक बार-बार प्रोडक्ट को इस्तेमाल करे. D2C में हम जो सबसे बड़ी एडवांटेज देख रहे हैं वो ये है कि कई सप्लाई चेन कॉस्ट कम हुई हैं. क्योंकि जब ग्राहक सीधे आपसे खरीदता है, तो आपके पास व्यवसाय मालिक के रूप में काफी नियंत्रण होता है. 

Frugality एक माइंडसेट है
Noise के CEO उत्सव मल्होत्रा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज 11 से 1200 लोकप्रिय D2C ब्रैंड हैं, इनमें से स्केल हिट करने वाले ब्रैंड केवल 10 या उससे कम ही होंगे. स्केल से मतलब रोड इन्वेंट्री, बेंचमार्क इन्वेंटरी मिलाकर 100 मिलियन डॉलर रिवेन्यु वाला ब्रैंड. और जब बात प्रॉफिटेबिलिटी की आती है, तो उनमें से केवल 4 ही प्रॉफिट कमाने की स्थिति में होंगे. और उनमें से केवल एक ही है, जो लगातार बूटस्ट्रैप कर रहा है और वो नॉइज़ यानी हमारी कंपनी है. हम यह बारीकी समझ गए हैं कि आपको अगर बड़ा होना है, तो प्रॉफिट कमाना पड़ेगा. जब बात लीन ऑपरेशन की आती है, तो इस तरह के सवाल आपको बुनियादी स्तर पर पूछने होते हैं क्योंकि Frugality एक माइंडसेट है, आप ये नहीं कह सकते कि मैं इन इन चीजों पर कॉस्ट बचाने वाला हूं. Frugality का मतलब ये है कि आपको प्राथमिकता सेट करनी होगी कि बिजनेस को स्केल अप करने के लिए क्या आवश्यक है और किसे बाद में किया जा सकता है, जब आपके पास पर्याप्त पैसा होगा. आज सच्चाई ये है कि हर स्टार्टअप खुद सबकुछ करना चाहता है. सबसे जरूरी है बेहतरीन प्रोडक्ट मार्केट फिट और यह समझना कि ग्राहक वास्तव में क्या चाहता है. यदि आप ये दो चीजें सही से कर सकते हैं, तो आप अपना ऑपरेशन जारी रख पाएंगे और स्केल अप कर पाएंगे. और तब आप उस स्थिति में होंगे कि आप खुद क्या कर सकते हैं और क्या आउटसोर्स कर सकते हैं. 

बेहतर रिश्ते रखना जरूरी
Sereko की फाउंडर एवं CEO मालविका जैन ने कहा - मेरा मानना है कि लीन ऑपरेशन को फंडामेंटली ब्रैंड में बिल्ड किया जाना चाहिए. हमें केवल 5 महीने हुए हैं, लेकिन लगभग सभी मार्केटप्लेस पर मौजूद हैं जैसे कि नायका, मिन्त्रा, फ्लिपकार्ट आदि. बावजूद इसके कि हम केवल एक ही वेयरहाउस ऑपरेट कर रहे हैं, हमने सुनिश्चित किया कि इससे कंज्यूमर एक्सपीरियंस प्रभावित न हो. हमने रिश्तों पर काफी निवेश किया है. लॉजिस्टिक टीम और शिफ्टिंग पार्टनर के साथ हमारे संबंध बहुत मजबूत हैं, हम देश के सभी पिन कोड कवर कर रहे हैं. हम बूटस्ट्रैप स्टार्टअप हैं, इसलिए हमें लीन ऑपरेशन शुरू करना था. हम सिस्टम में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं. जैसे-जैसे हम विकसित होंगे कॉस्ट भी ऑप्टिमाइज होगी. एक अन्य सवाल के जवाब में मालविका ने कहा कि यह जरूरी है कि ग्राहक ब्रैंड को समझें. ग्राहक को साथ जोड़े रखना केवल प्रोडक्ट के फिजिकल एक्सपीरियंस से ही संभव नहीं है. फिजिकल एक्सपीरियंस बेशक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्पाद को छूकर देखना ग्राहक के लिए काफी मायने रखता है, इसलिए हम छोटे ऑफलाइन इवेंट करते हैं. लेकिन Product Efficacy, प्रोडक्ट डिफरेंशियस, प्रोडक्ट ऑफरिंग भी महत्वपूर्ण है. अपनी बात बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि आज Psychodermatology  ऐसी समस्या से जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता. आज भारत को स्ट्रेस कैपिटल कहा जाता है, भारत की कामकाजी आबादी सबसे जायदा तनावग्रस्त है, तनाव का असर हमारी त्वचा पर भी पड़ता है, जब हम यही बात विज्ञापनों, सोशल मीडिया के जरिये समझाते हैं, तो ग्राहक जुड़ाव महसूस करते हैं.  इसलिए अलग तरह के प्रोडक्ट जरूरी हैं.

खुद के लिए निर्धारित करें टारगेट 
Apurv Misal ने एक्सेस डिमांड से जुड़े सवाल पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा - यह आपकी अभिलाषा है कि आप किस गति से आगे बढ़ना है, क्या हासिल करना है. आपकी समझ स्पष्ट होनी चाहिए कि आपको वहां जितनी जल्दी पहुंचना है. खुद के लिए एक टारगेट सेट करें. क्योंकि डिमांड कभी ज्यादा होगी, कभी कम इसलिए मुझे लगता है कि इसके बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है. आपको तय करना चाहिए कि हम इतनी यूनिट बनाएंगे, अगर अतिरिक्त डिमांड होती भी है, तो यहां आपके अपने वेंडर्स के साथ अच्छे संबंध काम आ सकते हैं. मेरा मानना है कि एक्सेस डिमांड एक दिन में नहीं आती, आपकी कुछ दिन पहले ही पता चल जाता है कि ऐसा हो सकता है. इसलिए मुझे लगता है कि रिलेशनशिप बहुत अच्छे होने चाहिए. 

फिजिकल स्टोर का अनुभव ऑनलाइन
कंज्यूमर को साथ रखने और पैसा कमाने के बीच के बैलेंस से जुड़े सवाल पर उत्सव ने कहा - इसके तीन-चार पार्ट हैं. पहला वो इंडस्ट्री कौनसी है जिसमें आप काम कर रहे हैं. क्योंकि कुछ ऐसी इंडस्ट्री होती हैं, जिनमें हायर इन-टेक मार्जिन होता है. दूसरा आपको प्रोडक्ट की समझ होनी चाहिए. जैसे कि आपका प्रोडक्ट non differentiate है या कमोडिटी. इसी आधार पर बहुत कुछ तय होगा. इसके अलावा, जिस मार्केट में आप काम कर रहे हैं उसकी समझ. आपको पता होना चाहिए कि क्या आप आज मुनाफा कमा रहे हैं या स्केल हिट करके प्रॉफिट कमाएंगे. प्रोडक्ट की कीमत निर्धारित करते समय बातें दिमाग में रखनी चाहिए. क्योंकि प्राइसिंग अकेले आप ही निर्धारित नहीं करते, कई अन्य कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं. वहीं, पियूष ने कहा कि हर स्टार्टअप फिजिकल स्टोर चाहता है, लेकिन कॉस्ट के चलते ये आसान नहीं है, हम वही अनुभव ऑनलाइन प्रदान करते हैं. हमारे साथ जुड़कर ब्रैंड वर्चुअल स्टोर बना सकते हैं, जहांग्राहक आपसे कनेक्ट होते हैं. कॉस्ट बेनिफिट भी मिलता है. 2 से 3 हजार में वर्चुअल स्टोर बन जाता है. हम ब्रैंड को शक्ति दे रहे हैं.  

ग्राहक को वैल्यू दिखनी चाहिए
Perfora के को-फाउंडर तुषार खुराना ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत प्राइस सेंसिटिव मार्किट है, लेकिन वैल्यू कांसियस मार्किट भी है. ग्राहक वैल्यू के लिए भुगतान करने को तैयार है, लेकिन चुनौती ये है कि आप उसे वैल्यू कैसे दिखाते हैं. वो कनवेंस होना चाहिए कि प्रोडक्ट में वैल्यू है. ये एक यात्रा है. आगे बढ़ने के लिए प्रॉब्लम स्टेटमेंट बेहद सिम्पल होना चहिये. ब्रैंड प्रोफिस महत्वपूर्ण है.


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