✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / सुनक से पहले भी कई भारतीय मूल के लोगों ने रचा इतिहास, जानें उनके नाम

सुनक से पहले भी कई भारतीय मूल के लोगों ने रचा इतिहास, जानें उनके नाम

ब्रिटेन में पले-बढ़े और विंचेस्टर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फिर स्टैनफोर्ड जाने के बावजूद, ऋषि सुनक ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को कभी नहीं छोड़ा,

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

  • विवेक शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार 

ऐसे वक्त में जब ऋषि सुनक के ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारतीय उनके इंडियन कनेक्शन को लेकर खुश हैं, यह दुनियाभर में फैले भारतीयों के प्रवासी इतिहास के पन्नों को फिर से पलटकर देखने का समय है. गुयाना के एक टॉल और हैंडसम राजनेता छेदी जगन, जिनके पूर्वज यूपी के बस्ती जिले से थे, आजादी से पहले 1961 से 1964 तक ब्रिटिश गुयाना के प्रधानमंत्री चुने गए. बाद में उन्होंने 1992 से 1997 तक गुयाना के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया. इसके बाद सर शिव सागर रामगुलाम, नवीन रामगुलाम, सर अनिरुद्ध जगन्नाथ, प्रविंद जगन्नाथ, बासुदेव पांडे, चंद्रिका प्रसाद संतोखी सहित भारतीय मूल के कई राजनेता गुयाना, मॉरीशस, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम जैसे द्वीप राष्ट्रों में राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बने. इन देशों के शीर्ष पद पर इन नेताओं की मौजूदगी की सबसे बड़ी वजह यह रही कि वहां की बहुसंख्यक आबादी भारतीय मूल के लोगों की है. ये सभी वहां गिरमिटिया मजदूर के रूप में गए थे. कमला हैरिस तो अमेरिका की उपराष्ट्रपति भी बन गई हैं.

इसलिए अलग है सुनक का मामला
हालांकि, ऋषि सुनक का मामला थोड़ा अलग है. वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बन गए हैं और लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में रहेंगे, इसके बावजूद कि भारतीय ब्रिटेन में बहुसंख्यक समुदाय नहीं हैं. सुनक के दादा 1965 में पूर्वी अफ्रीका के केन्या से ब्रिटेन चले आए थे. यह उनका दूसरा प्रवास था. पहली बार वह 1930 के दशक में पंजाब के गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) से पूर्वी अफ्रीका में शिफ्ट हो गए थे. ऋषि सुनक के पीएम चुने जाने के बाद से भारतीय इसलिए भी खुश हैं, क्योंकि वह एक हिंदू हैं. सुनक पहले ऐसे हिंदू हैं, जो एक ऐसे राष्ट्र की अध्यक्षता करेंगे जिसका राजा चर्च ऑफ इंग्लैंड का रक्षक है. सुनक ने तब भी इतिहास बनाया जब उन्होंने 2017 के आम चुनाव में जीत के बाद भगवद गीता पर हाथ रखकर सांसद के रूप में शपथ ली. वह हिंदू त्योहार मनाने वाले ब्रिटेन के पहले पीएम भी बन गए हैं.

अपनी जड़ों को कभी नहीं छोड़ा 
ब्रिटेन में पले-बढ़े और विंचेस्टर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फिर स्टैनफोर्ड जाने के बावजूद, सुनक ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को कभी नहीं छोड़ा, उन्होंने गोमांस से दूरी बनाए रखी और हमेशा भगवान गणेश की स्तुति की. वह अपनी वर्किंग टेबल पर बप्पा की एक छोटी की मूर्ति रखते हैं. उन्होंने इंटरव्यू में कहा था, 'मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं एक हिंदू हूं और हिंदू होना मेरी पहचान है. मेरी श्रद्धा मुझे ताकत देती है, यह मुझे उद्देश्य प्रदान करती है. यह मेरा एक हिस्सा है'.

पूर्वी अफ्रीकी देश में भारतीयों का हाल
खैर, जबकि वेस्ट इंडीज में भारतीयों का जीवन संघर्ष अच्छी तरह से प्रलेखित है, यह उन भारतीयों के लिए सच नहीं है जो पूर्वी अफ्रीकी देश गए थे. पूर्वी अफ्रीका में भारतीयों को मुहिंदिस कहा जाता है. उनके पूर्वजों ने केन्या, तंजानिया और युगांडा के निर्माण के लिए अपना खून, पसीना, आंसू बहाए और जमकर मेहनत की. वर्ष 1896 में लगभग 32,000 भारतीय, मुख्य रूप से पंजाब से, केन्या-युगांडा रेलवे प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए केन्या गए थे. उन्होंने कुशल मजदूरों, कारीगरों, ईंट बनाने वालों, बढ़ई, प्लंबर, दर्जी, मोटर मैकेनिक और इलेक्ट्रिकल फिटर के रूप में काम किया. भारतीय 30 के दशक के मध्य तक वहां शिफ्ट होते रहे. बेशक, भारतीय काम, अवसरों और अपने परिवारों के लिए भोजन की तलाश में वहां गए और उन्होंने बहुत प्रतिकूल परिस्थितियों में काम किया. उनमें से कई बीमार पड़ गए, कई घायल हो गए, कई मर गए. लेकिन तमाम कठिनाइयों और कष्टों को सहते हुए, उन्होंने एक स्थायी विरासत भी छोड़ी. रेलवे प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद, कई भारतीयों ने वहीं रहने का फैसला किया और तब से वे केन्या या युगांडा को ही अपना मानते रहे. हालांकि सांस्कृतिक रूप से वे अभी भी भारत के साथ पहचान रखते हैं. लेकिन अपने शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद संबंधित देशों में उनकी वफादारी पर सवाल भी उठते रहे हैं.

मूल देश के समर्थन में बुराई क्या है?
भले ही कई पीढ़ियां आपके मूल देश से दूर रहें, आप अपनी जड़ों को नहीं भूलते. उदाहरण के लिए, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा गर्व से अपनी केन्याई जड़ों के बारे में बात करते हैं, क्या इससे उनकी अमेरिका के प्रति देशभक्ति कम हो जाती है? नहीं, कदापि नहीं. उसी तरह, अगर कैरिबियाई द्वीपों या किसी अन्य देश में रहने वाले भारतीय इंडियन क्रिकेट/हॉकी टीमों या वहां के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के दौरों के समय उनके समर्थन में नारे लगाते हैं, तो इसमें बुरा क्या है? सुनक को अपनी भारतीय और हिंदू पृष्ठभूमि पर भी गर्व है. ऋषि सुनक का परिवार 1965 में बेहतर जीवन की तलाश में ब्रिटेन चला गया था और उनका जन्म एवं पालन-पोषण वहीं हुआ, लेकिन केन्या में अभी भी एक बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय है, जो उस सुंदर देश का निर्माण कर रहा है. कुछ साल पहले नैरोबी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए, केन्या के राष्ट्रपति Uhuru Kenyatta ने स्वीकार किया था कि केन्या के भोजन में भी भारतीय प्रभाव साफ नजर आता है, जैसे कि चपाती, समोसा, चाय और भुजिया. 

कई भारतीयों ने दिए बलिदान
अब जब ऋषि सुनक ब्रिटेन के पीएम बन गए हैं, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इस देश को अपना घर बनाने वाले भारतीय-केन्याई लोगों ने सिर्फ अपने और अपने परिवार के निर्माण के लिए काम नहीं किया. उन्होंने अधिक व्यापक रूप से इस देश की सेवा की और अपने अफ्रीकी साथियों का समर्थन किया. वास्तव में, वे स्‍वतंत्रता के प्रयासों के केंद्र में थे और उनमें से कई लोगों ने इस देश को आजाद होते देखने के लिए बलिदान दिए. उदाहरण के लिए, सरदार माखन सिंह, ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का आह्वान करने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने अश्वेत, यूरोपीय और भारतीय श्रमिकों के बीच समान वेतन के लिए लड़ाई लड़ी, और अपनी असहमति के लिए वर्षों जेल में बिताए. इसी तरह, जी.एल. विद्यार्थी ने अखबार-द कोलोनियल टाइम्स- की स्थापना की और इसे उपनिवेशवादियों के अफ्रीकियों के साथ क्रूर व्यवहार को चुनौती देने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. दीवान चमन लाल, एआर कपिला, फिट्ज डिसूजा और जसवंत सिंह जैसे वकीलों ने पूर्वी अफ्रीका के कानूनी ढांचे का निर्माण किया. निसंदेह, पूर्वी अफ्रीकी स्वतंत्रता सेनानियों को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री पं. नेहरू का समर्थन प्राप्त था.

अवतार सिंह को कौन भूल सकता है?
कई दशकों तक युगांडा, केन्या और तंजानिया की हॉकी टीमों में सिख खिलाड़ी हुआ करते थे और भारत के बाहर सबसे महान सिख खिलाड़ी माने जाने वाले अवतार सिंह सोहल तारी को कौन भूल सकता है. उन्होंने पहली बार रोम के 1960 के ओलंपिक खेलों में केन्या का प्रतिनिधित्व किया था. उन्होंने 1964 के टोक्यो ओलंपिक, मैक्सिको (1968) और म्यूनिख (1972) में केन्या टीम की कप्तानी की और 1971 में बार्सिलोना में हुए पहले विश्व कप में भी वह टीम के कप्तान थे. इस टूर्नामेंट में केन्या चौथे स्थान पर रही थी. वह अक्सर 'तीर्थयात्रा' पर भारत आते रहे. त्रिनिदाद और टोबैगो के पूर्व प्रधानमंत्री बासुदेव पांडे ने के बार कहा था, 'मैं पहली बार जब 60 के दशक की शुरुआत में भारत आया, तो हमारे जहाज के बॉम्बे के तट पर पहुंचते ही मेरी आंखों में आंसू थे. उस अहसास को मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता. हमारे लिए भारत तीर्थ स्थान के समान है. लेकिन, मेरे देश के लिए मेरी प्रतिबद्धता किसी भी सवाल से परे है'.

भारतीय वाकई बेजोड़ हैं
जहां तक बात राजनीति की है, तो भारतीय जो कहते हैं, वो करते हैं - वो वाकई बेजोड़ हैं. दुनिया भर में रहने वाले 20 मिलियन से अधिक भारतीय केवल पैसा कमाने के लिए संघर्ष नहीं कर रहे. वे दो दर्जन से अधिक देशों की संसद में हैं. वे अपने दत्तक देशों के लिए कड़ी मेहनत, ईमानदारी और प्यार के बिना इन ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच सकते थे. बेशक, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के रूप में ऋषि सुनक अपने देश के हितों के साथ समझौता नहीं करेंगे, लेकिन भारत उनके दिल में हमेशा धड़कता रहेगा, इतना तय है.


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कविता में एक शोकगीत: मेरे मित्र और बैचमेट, हेमचंद सिरोही, IAS

केजे अल्फोंस लिखते हैं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और बिहार के पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में, हेमचंद सिरोही को प्रशासनिक कुशलता, जन-केंद्रित शासन और जनसेवा में योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त था. उनके योगदानों में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की मान्यता दिलाना और जमीनी स्तर पर विकास की पहल शामिल थीं.

5 days ago

दो दुनियाओं के बीच जिंदगी: उथल-पुथल भरे समय की चुनौती

लेखक के अनुसार, हमारे आसपास की दुनिया उतनी नहीं बदली है, जितनी हमारे दिमाग के भीतर की दुनिया बदल गई है. लगातार आती खबरों, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाली चिंताओं के इस दौर में चुनौती है अपना ध्यान फिर से अपने नियंत्रण में लेना और उन चीजों पर फोकस करना, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.

5 days ago

कलाकार की अनंत रेखाएं: जोगेन चौधरी को श्रद्धांजलि

87 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रख्यात कलाकार अपने पीछे ऐसी विशिष्ट कला छोड़ गए हैं, जो उनकी खास क्रॉस-हैचिंग शैली, असामान्य रेखाओं और गहराई से मानवीय चित्रों के लिए पहचानी जाती है.

6 days ago

समुद्र मंथन का अर्थशास्त्र: समृद्धि के लिए विरोधी शक्तियों की जरूरत क्यों है

लेखिका प्रियंका शर्मा कैंतुरा इस लेख में बताती हैं कि देवताओं, असुरों और लक्ष्मी के प्राकट्य की प्राचीन कथा प्रतिस्पर्धा, सहयोग और धन सृजन के बारे में क्या सीख देती है.

1 week ago

जेमी बीटन: असाधारण दिमाग और अरबों डॉलर के कारोबार के पीछे ज्योतिषीय गणना

क्रिमसन एजुकेशन के संस्थापक की शैक्षणिक महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता में उभार और 2027 की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण

1 week ago


बड़ी खबरें

डेटा सेंटर कारोबार पर अडानी ग्रुप का बड़ा दांव, 1.5 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज जुटाने की तैयारी

गौतम अडानी के नेतृत्व वाला अडानी ग्रुप अब ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर डिजिटल क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर जोर दे रहा है. प्रस्तावित फंडिंग इसी रणनीति का हिस्सा है.

55 minutes ago

डिज्नी में फिर होगी छंटनी! खर्च में 20% तक कटौती की तैयारी, हजारों कर्मचारियों की जा सकती है नौकरी

डिज्नी पिछले कई वर्षों से लागत घटाने और कारोबार के पुनर्गठन की प्रक्रिया में जुटी है. इस दौरान कंपनी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है और अरबों डॉलर के खर्च में कटौती की है.

1 hour ago

NTT DATA मंगलुरु में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 2027 तक 2,500 करेगी, AI और क्लाउड पर रहेगा फोकस

कंपनी ने बताया कि विस्तार के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा के क्षेत्र में विशेष क्षमताएं विकसित की जाएंगी. इसके अलावा हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज, हाईटेक, ऑटोमोटिव और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा.

2 hours ago

सेंसेक्स-निफ्टी की शानदार रिकवरी के बाद आज भी तेजी की उम्मीद, जानें बाजार के लिए बड़े ट्रिगर्स

सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 1,233.25 अंक यानी 1.66 फीसदी की बढ़त के साथ 75,692.78 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 387.70 अंक यानी 1.68 फीसदी चढ़कर 23,440.80 के स्तर पर पहुंच गया.

3 hours ago

मेनबोर्ड IPO से फंड जुटाने में 30% की बढ़ोतरी, सितंबर में ही आए 94% फंड; 71 कंपनियों ने शेयर बाजार में रखा कदम

अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 84,400 करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जुटाए गए 64,900 करोड़ रुपये के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है.

2 hours ago