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नकली करेंसी के बढ़ते चलन से टूट रहा अर्थव्यवस्था का भरोसा!

नकारात्मक आर्थिक माहौल के बीच अर्थव्यवस्था के लिए पिछला माह राहत भरा रहा है, क्योंकि सितंबर में त्योहारी मांग के चलते कोर सेक्टर का उत्पादन बढ़ा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • अजय शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए नकली करेंसी फिर चुनौती बन गई है. दो दिन पहले महाराष्ट्र के ठाणे में 2000 के 8 करोड़ नकली नोट बरामद किए गए हैं. पिछले माह गुजरात के सूरत में 317 करोड़ 98 लाख के नकली नोट जब्त किए गए थे. संसद के पिछले सत्र में सरकार ने एक जवाब में बताया था कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, देश में जब्त किए गए 2,000 रुपए के नकली नोटों की संख्या 2016 और 2020 के बीच 2,272 से बढ़कर 2,44,834 हो गई है. यानी 2000 का नया नोट बाजार में आते ही नकली नोट भी आ गए थे, जो लगातार बढ़ते रहे. यह स्थिति तब है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तवर्ष 2016-17 में 2,000 रुपए के 3,5429.91 करोड़ नोट छापे थे, जो 2017-18 में 1115.07 करोड़ नोट और 2018-19 में मात्र 466.90 करोड़ नोट छापे थे.

2000 के नोट बाजार से गायब

पिछले तीन वित्तवर्षों 2019-20, 2020-21 और 2021-22 में 2,000 रुपए मूल्यवर्ग के एक भी नोट नहीं छापे गए. नोटबंदी के बाद छह सालों में 2000 के 79836 और 500 के 1.81 लाख नकली नोट बैंकों ने पकड़े हैं. 31 मार्च 2017 को 2000 रुपए के नोट की कुल हिस्सेदारी 50.2 फीसदी थी, जो 31 मार्च 2022 को बाजार में कुल हिस्सेदारी 13.8 फीसदी रह गई थी. अब 4 लाख 28 हजार करोड़ कीमत के 2000 के नोट बाजार से गायब हो चुके हैं. इसकी जगह नकली नोट बढ़ रहे हैं.

नकली नोटों का बढ़ता चलन
आरबीआई के मुताबिक पकड़े गए नकली नोटों में 500 और 2000 रुपए के नोट ही सबसे अधिक हैं और इनकी हिस्सेदारी 87.1 फीसदी है. पिछले साल इन नोटों की हिस्सेदारी 85.7 रही थी. कुल नकली नोटों की संख्या में 101.9 फीसदी रही, जिसमें 2000 रुपए के नकली नोटों में 54 फीसदी और 500 रुपए के नकली नोटों में दोगुनी बढ़ोत्तरी हुई है. आंकड़े बताते हैं कि 500 और 2000 के नकली नोटों का चलन लगातार बढ़ना चिंताजनक है. इसके लिए  लगातार दिशानिर्देश जारी होते रहते हैं. साल 2020 और 2021 में आरबीआई और बैंकों को कुल 5.45 करोड़ रुपए से ज्यादा के नकली नोट मिले थे. बैंकों में सबसे अधिक 96 फसदी नकली नोट पकड़े गए थे. नए डिजाइन वाले 500 रुपए के नकली नोटों की संख्या सालाना आधार पर 102 फीसदी बढ़ी है, तो 2000 के नकली नोट 55 फीसदी बढ़ गए हैं. वित्त वर्ष 2021-22 में कुल 2,30,971 नकली नोट बैंकिंग सेक्टर में पकड़े गए. जिन्होंने अर्थव्यवस्था को कुल 8,25,93,560 रुपए की चपत लगाई थी. यह तादात घटने का नाम नहीं ले रही है. इसमें पुलिस की जब्ती शामिल नहीं है.

आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाया
नोटबंदी की छठवीं बरसी मनाने के वक्त आर्थिक हालात पर चिंतन हो रहा है. इसी बीच वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच के बाद अब मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष 2022-23 के लए भारत के आर्थिक विकास की दर का अनुमान घटाकर 7 फीसदी कर दिया है. जून में उसने 7.8 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान बताया था. यही नहीं, उसने आगामी वित्त वर्ष 2023-24 के विकास अनुमान को भी घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है, जबकि पहले यह 7.4 फीसदी की दर से बढ़ने का था. हालांकि फिच ने यह भी कहा है कि दूसरी तिमाही में विकास अनुमान और अर्थव्यवस्था दोनों में सुधार हुआ है मगर यह पूर्व अनुमान से काफी कम है. वैश्विक आर्थिक हालात, बढ़ती महंगाई और सख्त आर्थिक नीतियां जीडीपी को सुस्ती की दिशा में ले जा रही हैं. वहीं, आरबीआई का मानना है कि महंगाई पहले से काबू हुई है और यह 7 फीसदी की दर से नीचे पहुंच सकती है मगर खुदरा महंगाई फिलहाल काबू से बाहर है. इसका असर अर्थव्यवस्था पर सीधा दिखाई दे रहा है. इसे नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक लगातार रेपो रेट बढ़ा रहा है और आखिरी माह में फिर बढ़ाना पड़ सकता है. वैश्विक मंदी के हालात का भी जिक्र फिच ने किया है, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक पड़ना लाजिमी है.

राहत भरा रहा पिछला महीना
नकारात्मक आर्थिक माहौल के बीच अर्थव्यवस्था के लिए पिछला माह राहत भरा रहा है, क्योंकि सितंबर में त्योहारी मांग के चलते कोर सेक्टर का उत्पादन बढ़ा है, जो लगातार बढ़त बना रहा है. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, सितंबर में कोर सेक्टर का उत्पादन 7.9 फीसदी रहा. इसमें कोयला, उर्वरक, सीमेंट और बिजली सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया. इसके कारण भारतीय पूंजी बाजार में यकीन जागा है. वहीं, पेट्रोलियम के क्षेत्र में रूस से सस्ती दरों पर कच्चा तेल मिलने और उसे महंगी दरों पर दूसरे देशों को निर्यात करने से निर्यात में बढ़ोत्तरी भी हुई है. पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद सितंबर, 2022 में पिछले साल के मुकाबले 6.6 प्रतिशत बढ़ा है. बावजूद इसके भारतीय तेल कंपनियां अभी बड़े घाटे में हैं, जो नीतियों के कारण संतुलन नहीं बना पा रही हैं. इसकी बड़ी वजह भारत में तेल की भारी खपत और महंगाई के कारण उपभोक्ताओं खरीद क्षमता अच्छी न हो पाना है. बेरोजगारी बड़े संकट की तरह देश की अर्थव्यवस्था की गति को बिगाड़ रही है. इसको लेकर अर्थशास्त्री एवं आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघु रमन राजन ने भी स्पष्ट किया है कि बेरोजगारी अर्थव्यवस्था के लिए घातक है.

नकदी पर ही कायम है विश्वास
बाजार में नकली नोटों के बीच आरबीआई ने डिजिटल करेंसी लांच कर दी है. डिजिटल करेंसी आने से उम्मीद की जा रही थी कि सरकार के साथ आम लोगों और बिजनेस के लेनदेन की लागत में कमी आएगी मगर शुरुआती रुझान बहुत अच्छे नतीजे नहीं दे सके हैं. वजह साफ है, लोगों का नकदी पर अधिक यकीन है. वहीं जब नोट नकली पाए जाएं, तब अविश्वास पनपता है. जो बाजार पर नकारात्मक असर डालने के साथ ही बैंकिंग सेक्टर को भी चपत लगाता है. पूंजी बाजार में नीतियों का भी फर्क पड़ता है. अभी बाजार के ऊपर जाने की वजह वैश्विक बाजार अधिक हैं, घरेलू की अपेक्षा. दो राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में खर्चों से बाजार में मांग बढ़ी है, मगर यह स्थायी नहीं है. अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए स्थायी प्रबंधन बेहद जरूरी है. सरकार को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, नहीं तो नकली नोट न सिर्फ वैश्विक छवि को खराब करते हैं बल्कि बाजार में भी अविश्वास पैदा करते हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए घातक होता है.  


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