होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / एक्सपर्ट्स ने बताया, कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के लिए कैसे वरदान बन गया है Social Media

एक्सपर्ट्स ने बताया, कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के लिए कैसे वरदान बन गया है Social Media

दिल्ली में आयोजित BW Marketing World इवेंट में इंडस्ट्री से जुड़ी दिग्गज हस्तियां अपने विचार व्यक्त कर रही हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Businessworld द्वारा राजधानी दिल्ली में BW Marketing World इवेंट आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में मार्केटिंग से जुड़ी दिग्गज हस्तियां शिरकत कर रही हैं. इस दौरान, 'Tweet, Post, Engage: The Dynamic Duo of Social Media and PR Strategies' विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन में Bajaj Allianz General Insurance के वाइस प्रेसिडेंट एवं कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के हेड निखिल भारद्वाज, Jindal Stainless Group की कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन की प्रमुख सोनल सिंह और Housing.com के कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन हेड अमित अरोरा ने भाग लिया. जबकि BW Marketing World की एडिटोरियल लीड Reema Bhaduri बतौर मॉडरेटर उपस्थित रहीं. 

महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा सोशल मीडिया
पैनल डिस्कशन की शुरुआत करते हुए Reema Bhaduri ने पूछा कि PR और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन समय के साथ विकसित हुआ है. हमने ट्रेडिशनल, डिजिटल मीडिया देखा और अब PR एवं कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन देख रहे हैं. आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि सोशल मीडिया, PR एवं कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के उद्देश्यों के बीच सीमलेस अलाइनमेंट हो? व्यवसाय के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सोशल मीडिया का रोल क्या है? इसके जवाब में Nikhill Bharadwaj ने कहा - कम्युनिकेशन के पारंपरिक साधनों की बात करें, तो वह कुछ ऐसे हैं जैसे किसी छत पर खड़े होकर कोई एक इलाके को संबोधित करता है. जबकि सोशल मीडिया एक ही बार में एक से ज्यादा छतों से कई शहरों तक अपनी बात पहुंचाना है. इसलिए मैं सोशल मीडिया को एम्प्लीफिकेशन मैकेनिज्म या मीडिया के रूप में देखता हूं. और यह बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. 

ऑब्जेक्टिव को समझना है जरूरी
निखिल ने आगे कहा कि यह ऑब्जेक्टिव पर निर्भर करता है. आप प्रोडक्ट के बारे में जानकारी चाहते हैं या कैटेगरी के बारे में. PR को बेहद महत्वपूर्ण कार्य करना होता है. उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि जानकारी प्रमाणिक रॉ फॉर्म में सब तक पहुंचे और सोशल मीडिया इंगेजमेंट स्टैंडपॉइंट से ज्यादा है. आप सोशल मीडिया पर फन स्टफ कर सकते हैं, जो आप ट्रेडिशनल PR पर नहीं कर सकते. इंश्योरेंस के मामले में यदि आप कोई नया प्रोडक्ट लॉन्च करते हैं तो आपको उसके लिए अवेयरनेस फैलानी पड़ती है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से आसानी से हो सकता है. PR में आप गंभीरता से ऐसा करते हैं और सोशल मीडिया पर मजेदार अंदाज में. 

कम्युनिकेशन मैसेज बॉक्स की मदर है PR
सोनल सिंह ने निखिल की बात से सहमति जताते हुए कहा कि ऑब्जेक्टिव को समझना जरूरी है. एक मीम है कि 'बस अपने आपको ही ढूंढना रह गया है, बाकी सब तो गूगल पर है'. यह बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न है जिसका जवाब मिलना चाहिए और इसका जवाब केवल PR से ही नहीं आना चाहिए. PR उस जवाब का स्क्रिप्टर है, और उस जवाब का सलाहकार है, लेकिन वास्तव में यह जवाब संस्थागत जवाब है कि हमें जाना कहां है, हम क्या हासिल करना चाहते हैं? क्या मेरी PR रणनीति या सोशल मीडिया रणनीति सिंक करती हैं या नहीं, ये इस पर निर्भर है कि कंपनी की इंटरनल स्ट्रक्चरिंग कैसे की गई है. यदि यहां मौजूद लोग अपनी कंपनी के लिए PR मैनेज कर रहे हैं और साथ ही संगठन के सोशल मीडिया इंटरफेस को भी मैनेज कर रहे हैं या सक्रिय रूप से उसमें योगदान दे रहे हैं, तो उनके डिसकनेक्ट होने की कोई संभावना नहीं है. PR और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन प्रोफेशनल के बीच संघर्ष इंटरनल होता है. हम कह सकते हैं कि आधी लड़ाई हम घर पर लड़ते हैं और बाकी दूसरों के साथ. सोनल ने आगे कहा कि PR एक ओमनी वैन है, जो विजन स्टेटमेंट है और सोशल मीडिया हमारे लिए उसे इम्प्लीमेंट करने का टूल. PR को कम्युनिकेशन मैसेज बॉक्स की मदर कहा जा सकता है. सोनल सिंह ने यह भी कहा कि ब्रैंड लोगों की तरह हैं, जैसे किसी के व्यक्तित्व को निखारा जाता है, ठीक वैसे ही ब्रैंड को भी निखारना होता है.

बहुत डायनामिक है सोशल मीडिया
अमित अरोरा ने कहा कि PR और कम्युनिकेशन इंडस्ट्री में सोशल मीडिया की भूमिका बढ़ी है. सोशल मीडिया बहुत डायनामिक है, हम अभी स्क्रीन ऐज से इंफ्लुएंसर ऐज में हैं. मौजूदा वक्त में परिदृश्य बेहद गतिशील है, आज हम जिस बारे में बात कर रहे हैं, शायद वो कल प्रासंगिक न रहे. इसलिए परिदृश्य बहुत तेजी से बदल रहा है. स्क्रीन की भूमिका और हमारी लाइफ काफी विकसित हुई है. कुछ साल पहले हम बात करते थे कि हमारा अधिकांश समय स्क्रीन पर गुजरता है, फिर चाहे ऑफिस हो या घर. लेकिन कोरोना के चलते ऑफिस स्क्रीन में मर्ज हो गया. आज हर कोई इंफ्लुएंसर है, सोशल मीडिया आज हमारी कम्युनिकेशन रणनीति का हिस्सा बन गया है. एक दूसरे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऑथेंटेसिटी आजकल बेहद महत्वपूर्ण है, आपको अपने ग्राहक को समझना है. खासतौर पर भारत जैसे देश में जहां हम सांस्कृतिक रूप से काफी मजबूत हैं, प्रमाणिकता और विश्वास हमें हमेशा से पढ़ाया गया है. तो ये हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है. मुझे लगता है कि आजकल हर ब्रैंड यह समझता है और कोई इस लाइन को क्रॉस नहीं करता. लेकिन जिसने ऐसा किया है उसे परिणाम भी भुगतने पड़े हैं. 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

टैगोर से टाटा तक: पश्चिम बंगाल अवसरों की भूमि

उद्योग पेशेवर डॉ. अजय शर्मा लिखते हैं, 1960 के दशक में भारत के जीडीपी में बंगाल की हिस्सेदारी 10% से अधिक थी, जो 2023-24 तक घटकर लगभग 5.6% रह गई है.

51 minutes ago

बंगाल के जनादेश का सम्मान जरूरी: भरोसा लौटे, गौरव पुनर्जीवित हो, सम्मान स्थापित हो

प्रबल बसु रॉय लिखते हैं, शासन का अगला चरण, चाहे स्थानीय स्तर पर इसका नेतृत्व कोई भी करे, भाषण या इरादों के आधार पर नहीं आंका जाएगा, इसे परिणामों के आधार पर परखा जाएगा.

1 hour ago

अहंकार का अंत: कमल मुस्कुरा रहा है

पश्चिम बंगाल का औद्योगिक केंद्र से आर्थिक ठहराव तक का सफर दशकों की नीतियों और राजनीतिक बदलावों के जरिए समझा जा सकता है, साथ ही इसके पुनरुत्थान की संभावनाओं पर भी बहस जारी है.

21 hours ago

प्रसार भारती में प्रसून होने का महत्व

टाटा मोटर्स के सीएमओ शुभ्रांशु सिंह लिखते हैं, विज्ञापन ने प्रसून जोशी को सटीकता और जटिलता को कुछ यादगार शब्दों में समेटने की क्षमता दी.

1 day ago

गोदरेज इंडस्ट्रीज की नई ब्रांड पहचान: सिर्फ डिजाइन नहीं, बड़े बदलाव का संकेत

इस लेख में लेखक गणपति विश्वनाथन ने गोदरेज इंडस्ट्रीज की रीब्रांडिंग और उसके मौजूदा संकेतों का विश्लेषण किया है.

2 days ago


बड़ी खबरें

BW The Future Finance Office में मुख्य अतिथि होंगे यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक

एक ओर जहाँ फाइनेंस लीडरशिप और एंटरप्राइज लीडरशिप के बीच की सीमा पूरी तरह समाप्त हो रही है. वहीं, CFO की भूमिका के भविष्य को नए सिरे से परिभाषित करने के उद्देश्य से भारत के टॉप फाइनेंस लीडर्स 8 से 10 मई तक लखनऊ में एकत्र होंगे.

35 minutes ago

मुखर्जी के गृह राज्य में भगवा लहर: पश्चिम बंगाल में BJP की ऐतिहासिक बढ़त

चुनाव परिणामों को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जनता के विश्वास और विकास की राजनीति का परिणाम है.

2 hours ago

टैगोर से टाटा तक: पश्चिम बंगाल अवसरों की भूमि

उद्योग पेशेवर डॉ. अजय शर्मा लिखते हैं, 1960 के दशक में भारत के जीडीपी में बंगाल की हिस्सेदारी 10% से अधिक थी, जो 2023-24 तक घटकर लगभग 5.6% रह गई है.

51 minutes ago

बंगाल के जनादेश का सम्मान जरूरी: भरोसा लौटे, गौरव पुनर्जीवित हो, सम्मान स्थापित हो

प्रबल बसु रॉय लिखते हैं, शासन का अगला चरण, चाहे स्थानीय स्तर पर इसका नेतृत्व कोई भी करे, भाषण या इरादों के आधार पर नहीं आंका जाएगा, इसे परिणामों के आधार पर परखा जाएगा.

1 hour ago

2026 में ऊर्जा संक्रमण से आगे निकला भू-राजनीतिक संकट: GlobalData

रिपोर्ट के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें अब ऊर्जा उद्योग की कार्यक्षमता को तेजी से बदल रही हैं.

2 hours ago