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AI को लेकर कैसा है कॉर्पोरेट इंडिया का मिजाज? एक्सपर्ट्स ने कही मन की बात 

'आजकल लोग अधिकांश समय अपनी स्क्रीन को स्क्रॉल करते हुए बिताते हैं, वास्तविक दुनिया से उनका नाता कम रहता है. यह मार्केटिंग कंपनियों और व्यवसायों के लिए शानदार अवसर है'.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Businessworld द्वारा Marketing White Book Summit के 8वें संस्करण का आयोजन किया जा रहा है. इसमें मार्केटिंग सेक्टर की दिग्गज हस्तियां शिरकत कर रही हैं. इस दौरान आयोजित सीईओ सेशन में Hindware Home Innovation के CEO साहिल कपूर और Bausch & Lomb India के MD India & SAARC संजय भूटानी ने 'AI as a Force for change for Business Community' विषय पर अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने बताया कि किस तरह व्यवसाय जगत में AI यानी आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हो रहा है.   

AI महज एक हाइप नहीं 
सेशन चेयर के रूप में मौजूद BW Businessworld के Senior Correspondent अर्जुन यादव ने कॉर्पोरेट इंडिया में AI के इस्तेमाल से जुड़े प्रश्न के साथ सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू किया. उन्होंने पूछा कि पिछले एक साल में एक फोर्स के रूप में AI और जनरेटिव AI को लेकर कॉर्पोरेट इंडिया की सोच में कितना बदलाव आया है? इस पर साहिल कपूर ने OpenAI विवाद का जिक्र करते हुए कहा - पिछले हफ्ते हमने एक कॉर्पोरेट बैटल देखी जहां पहले बोर्ड ने सीईओ को निकाला, फिर सीईओ ने बोर्ड को फायर कर दिया. इस विवाद ने AI को चर्चा के शीर्ष पर ला दिया. अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कपूर ने कहा कि लोगों ने पहले AI के बारे में जो सोचा था, वो उससे काफी अलग है. हर टेक्नोलॉजी S हाइप साइकिल पर चलती है, पिछले साल तक मेटावर्स चर्चा का मुख्य बिंदु था और अब वो एकदम से नीचे आ गया है. दुनिया भर में AI पर हुए डेवलपमेंट ने साबित किया है कि ये वास्तव में परिवर्तनकारी है. यह कोई हाइप नहीं है, बल्कि इन्टरनेट के बाद नेक्स्ट बिद थिंग है. 

टेक वर्ल्ड में ज्यादा चर्चा
साहिल कपूर ने आगे कहा कि AI को लेकर चर्चा टेक वर्ल्ड में सबसे ज्यादा है. कई ऐसे टूल्स आ रहे हैं, तो वास्तव में व्यवसाय के सभी हिस्सों के लिए उपयोगी हैं, लेकिन रोजमर्रा के व्यवसाय में उनका उपयोग करना, यह ट्रांजिशन होना अभी बाकी है. इसलिए यदि मैं कहूं कि ये टेक वर्ल्ड के लिए टॉप ऑफ द माइंड है. बिजनेस वर्ल्ड इस पर करीब से नजर रख रहा है, तो यह गलत नहीं होगा. दूसरी तरह, व्यवसाय जगत द्वारा इसका इस्तेमाल एक अलग विषय है. 

पहले से कर रहे हैं इस्तेमाल
वहीं, संजय भूटानी ने कहा - मेरे ख्याल से हम AI काफी समय से इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन लोगों को इसका अहसास नहीं है. जैसे कि कोई भी कंज्यूमर इंटरैक्शन, उदाहरण के तौर पर यदि आप किसी खास सेगमेंट के ग्राहकों को टारगेट करते हैं, तो वो सेगमेंटेशन AI के माध्यम से होता है. जैसा कि सलिल ने कहा व्यवसाय जगत इस पर नजर रख रहा है, क्योंकि ये अभी भी विकसित हो रहा है. यदि आप सवाल करेंगे कि प्रोडक्ट कंपनी के तौर पर क्या हम इसका 100% इस्तेमाल कर रहे हैं, तो जवाब होगा - नहीं. प्रोडक्ट कंपनी इसका इस्तेमाल विभिन्न प्लेटफॉर्म के माध्यम से करती हैं. वे अपने ग्राहकों से कैसे इंटरैक्ट करती हैं, इस मामले में वह AI इस्तेमाल करती हैं. 

यहां किया जा रहा है प्रयोग  
एक अन्य सवाल के जवाब में साहिल कपूर ने कहा - AI जैसा कि हम जानते हैं इंटेलिजेंस ऑफ मशीन है. यह नेक्स्ट लेवल यानी जनरेटिव AI पर जा रही है, जहां आपके पास टूल्स हैं, प्लेटफॉर्म हैं जिनकी मदद से आप कंटेंट, इमेज आदि जनरेट कर सकते हैं. इन सभी क्षमताओं का एक बड़ा भाग वास्तव में डेटा विश्लेषण, डेटा माइनिंग, उत्पादक विश्लेषण में कुछ विस्तार के साथ पहले से ही मौजूद है, और यह धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है. ऐसे टूल्स जो बड़े पैमाने पर और बहुत अधिक गति के साथ ऐसा करेंगे, अभी भी उपयोग किए जाने बाकी हैं. मैं संजय से सहमत हूं कि इसका इस्तेमाल पहले से ही कुछ हद तक डे-टू-डे बिजनेस में किया जा रहा है. डेटा माइनिंग, कंज्यूमर बिहेवियर का अनुमान लगाना, कस्टमर सेगमेंटेशन में इसका इस्तेमाल पहले से हो रहा है. उन्होंने आगे कहा, 'क्या हम वास्तव में वे टूल्स इस्तेमाल कर रहे हैं, जो लगातार विकसित हो रहे हैं? इसका जवाब है हां कुछ हद तक. उदाहरण के तौर माइक्रोसॉफ्ट का पावर BI टूल्स बहुत से बिजनेस इस्तेमाल करते हैं. लेकिन यदि आप पूछेंगे कि क्या हम कंटेंट क्रिएशन के लिए AI इस्तेमाल कर रहे हैं, तो फिलहाल इसका जवाब है - नहीं'. 

उदाहरण देकर समझाई बात
प्रोडक्ट कंपनी के तौर पर AI इस्तेमाल करने के बारे में बताते हुए संजय भूटानी ने कहा - 2 से 3 साल पहले हमने मल्टी फोकल लेंस को लेकर एक कैंपेन चलाया था, जिसमें इसमें AI का इस्तेमाल किया गया. इस कैंपेन में शामिल कोई ग्राहक यदि हमारे लेंस में रुचि दिखाता था, तो हम उसकी डिटेल फीड करवाते थे. उसके अपना पिनकोड डालते ही, वहां मौजूद हमारे स्टोर की जानकारी आ जाती थी. उस दौर में डेटा प्रोटेक्शन कानून इतने सख्त नहीं थे, जबकि आज भारत में ये काफी सख्त हो गए हैं. हम संबंधित ग्राहक का मोबाइल नंबर अपने उस स्टोर को भेजते थे. स्टोर ग्राहक को काल करते और जब वो स्टोर आते, तो गूगल मैप की मदद से हमें उनकी खरीदारी के बारे में पूरी जानकारी रहती थी. AI के दूसरे इस्तेमाल के बारे में बताते हुए भूटिया ने कहा कि हमारे पास अलग-अलग कलर के लेंस भी हैं. अब हर ग्राहक को एक-एक लेंस लगाकर दिखाना संभव नहीं हो सकता. इसलिए हमने एक टूल बनाया जिसे सभी स्टोर को दिया गया. स्टोर में ग्राहक की फोटो क्लिक की जाती और फिर टूल की मदद से उस पर अलग-अलग कलर के लेंस लगाकर दिखाया जाता. हालांकि, ये प्रयोग ज्यादा सफल नहीं रहा, क्योंकि ग्राहक फोटो खिंचवाने को लेकर सहज नहीं थे. इसके बाद हमने एक ऐप विकसित किया. ग्राहक ऐप में खुद देख सकता है कि उस पर कौनसा लेंस जचेगा. तो इस तरह हम काफी पहले से ही AI इस्तेमाल करते आ रहे हैं.

अवसर के साथ आए जोखिम  
साहिल कपूर टेक्नोलॉजी पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ZEN G को GEN AI के तौर पर भी जाना जाता है. यानी वो जनरेशन जो हमेशा अपनी स्क्रीन पर इन रहती है. आप देखेंगे कि आजकल लोग अधिकांश समय अपनी स्क्रीन को स्क्रॉल करते हुए बिताते हैं, वास्तविक दुनिया से उनका नाता कम रहता है.  यह मार्केटिंग कंपनियों और व्यवसायों के लिए ग्रेट इंटरफेस और शानदार अवसर है, क्योंकि उन्हें ऐसे लोगों को एंगेज करना जो हमेशा वहां है, यानी मोबाइल स्क्रीन पर. पहले लोग कम्युनिकेशन टूल्स - अखबार, टीवी या रेडियो से दिन में एक निर्धारित समय पर ही जुड़ते थे, लेकिन इन्टरनेट आने के बाद यह समय बढ़ा और सोशल मीडिया के आने के बाद लोग पूरे दिन एंगेज रहते हैं. आज AI और जनरेटिव AI ने हमें कई अवसर दिए हैं, लेकिन इसके जोखिम भी हैं जैसे कि DeepFake. लिहाजा, मार्केटियर के पास बेहतर अवसर हैं, मगर साथ ही उन्हें जिम्मेदार बनने की भी जरूरत है. 

कंपनियां दिलाएं विश्वास 
साहिल की बात पर सहमति जताते हुए संजय भूटिया ने एक वाकये का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि वो ट्रैफिक सिग्नल पर खड़े थे, तभी पास में एक लड़की आकर रुकी. उसने अपना मोबाइल निकाला और स्क्रीन स्क्रॉल करने में इतनी व्यस्त हो गई कि उसे अहसास ही नहीं हुआ कि उसकी स्कूटी कुछ पीछे पहुंच गई है. यह देखकर लड़की के पीछे रुका कार चालक तुरंत अपनी कार को पीछे ले गया. यह दर्शाता है कि लोग आजकल स्क्रीन को लेकर कितने एडिक्टिव हो गए हैं. दूसरी तरफ, जब बात अपनी पर्सनल डिटेल की आती है, तो लोग इतनी आसानी से नहीं देता. ऐसे में कंपनियों को चाहिए कि ग्राहकों को विश्वास दिलाये कि उनका डेटा सुरक्षित रहेगा और वो जब चाहें उसे डिलीट कर सकते हैं. हम यही कर रहे हैं.
 


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