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पं. जवाहर लाल नेहरू की इकोनॉमिक पॉलिसी: क्या चुनौतियां थीं, क्या-क्या उपाय किए?

देश में शिक्षा जैसी कोई चीज ही नहीं थी. न स्कूल थे और ना ही कॉलेज. कोई इंडस्ट्री नहीं थी और ना ही संस्थाएं थीं. गांव तो दूर की बात है, कई शहरों में बिजली तक नहीं थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: 15 अगस्त, 1947 को जब देश आजाद हुआ था, तब उस समय भारत के सामने सिर्फ चुनौतियां ही चुनौतियां थीं. न तो कोई इंडस्ट्री थी, ना ही आज के प्राइवेट सेक्टर जैसी कोई चीज थी, बेरोजगारी चरम पर थी, हर तरफ भुखमरी जैसा माहौल था, ऐसे में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की इन चुनौतियों को पार करने की कड़ी परीक्षा भी थी.

14 नवंबर, 1889 को जन्मे पं. जवाहर लाल नेहरू इन चुनौतियों से अच्छी तरह परिचित थे और उन्होंने इनका सामना करने की ठान ली थी. उन्हें इकोनॉमी की भी बहुत अच्छे से समझ थी. देश की जर्जर हालत को सुधारने के लिए पं. नेहरू ने जो इकोनॉमी पॉलिसी अपनाई, उसके बारे में इतिहासकार और अर्थशास्त्री अशोक कुमार पांडेय ने BW Hindi से विस्तार से बात की.

उस वक्त कई शहरों में भी बिजली नहीं थी
अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि जब देश आजाद हुआ तब इतना अनाज भी उत्पन्न नहीं होता था, जिससे सबका पेट भर सके. देश में शिक्षा जैसी कोई चीज ही नहीं थी. न स्कूल थे और ना ही कॉलेज. कोई इंडस्ट्री नहीं थी और ना ही संस्थाएं थीं. गांव तो दूर की बात है, कई शहरों में बिजली तक नहीं थी. उस वक्त लगभग 90 प्रतिशत आबादी गरीब थी और साक्षरता दर 10 प्रतिशत थी. हर तरफ बेरोजगारी थी. हालात ऐसे थे कि कोई भी इस देश की बागडोर संभालने के लिए हाथ खड़े कर दे, पर नेहरू जी ने अंग्रेजों के नाम का कोई बहाना नहीं बनाया. उन्होंने पूरी ताकत, उत्साह और समर्पण से नए भारत का निर्माण करना शुरू कर दिया.

सबसे ज्यादा जरूरत इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की थी
उन्होंने बताया कि भारत को इन गंभीर चुनौतियों से बाहर लाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की थी. पं. नेहरू ये मानते थे कि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के देश को विकास के पथ पर नहीं ले जाया जा सकेगा. पं. नेहरू ने विकास के लिए जो रास्ता चुना था, वो मिक्स्ड इकोनॉमी का रास्ता था. यानी उन्होंने कैपिटलिस्ट को भी खत्म नहीं किया. उन्हें बिजनेस करने की पूरी इजाजत दी गई. पर कई कोर सेक्टर अपने हाथों से नहीं जाने दिया. उसकी जिम्मेदारी सरकार के पास ही रखी.

कोर सेक्टर की जिम्मेदारी अपने पास ही रखी
जैसे- इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने की जिम्मेदारी सरकार की तय की. शिक्षा देश के हर नागरिक तक पहुंच, चाहे वो कितना भी गरीब क्यों न हो, इसकी जिम्मेदारी भी सरकार के पास ही रखी. देश के लोगों को रोजगार मिल सके, उसकी जिम्मेदारी भी उन्होंने सरकार की ही तय की. इसके लिए उन्होंने प्लानिंग कमीशन की स्थापना की और उसे ऑपरेटर की तरह यूज किया. इसका असर ये हुआ कि बहुत जल्द भारत अलग-अलग सेक्टर में विकास करने लगा. उन्हें इसकी प्रेरणा रूस से मिली थी.

IIT, AIIMS की स्थापना की
अर्थशास्त्री अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि पं. नेहरू का शिक्षा पर इतना ज्यादा जोर था कि वे देश के हर नागरिक को शिक्षित करना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने देश के हर हिस्से में स्कूल खोलना शुरू किया. हर 10 गांव के बीच 1 स्कूल खोला गया. देश के लोगों का इलाज अच्छे से हो सके, इसके लिए अस्पताल खोले जाने लगे. लोगों को ज्यादा से ज्यादा नौकरियां मिल सके, इसलिए पब्लिक सेक्टर का दायरा बढ़ाना शुरू किया. देश में इंडस्ट्री लगाने के लिए व्यापारियों को प्रोत्साहित करने का काम किया. उन्होंने IIT, AIIMS से लेकर साहित्य अकादमी, चिल्ड्रेन फिल्म इंस्टीट्यूट बनाए. वे अपनी इसी विकसित इकोनॉमिक सोच की वजह से देश को कई चुनौतियों से बाहर निकालने का पूरा प्रयास किया.

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