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Earth Day: पृथ्वी से हमने बहुत लिया, अब उसे वापस देने का समय

हमने ये नहीं सोचा था कि कभी पानी की कुछ कमी हो सकती है, ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. परन्तु जिस तरह से मनुष्य ने व्यवहार किया है, उससे प्रकृति को गंभीर नुकसान पहुंचा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • जयंती दीदी, यूरोपीयन डायरेक्टर, ब्रह्माकुमारी

पृथ्वी दिवस यानी Earth Day की बधाइयां. इस वर्ष हम अर्थ डे के मौके पर हम क्या संकल्प लेंगे? मुझे लगता है कि सबसे पहले हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि मनुष्य से लेकर जीव-जंतु तक हम सभी के लिए सुखदायी बनें, शांति की राह पर चलें. धरती ने हमारी इतनी परवरिश की है कि हम उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते. लिहाजा, इस अर्थ दिवस पर हमें पूरे पर्यावरण की बात करनी चाहिए, जिसमें मनुष्य से लेकर जीव-जंतु तक सभी आते हैं.

जरूरतों में कटौती करें
पृथ्वी अकेले कुछ नहीं कर रही. उसके साथ सूर्य देवता भी हैं , नदियों को भी हम देवी के रूप में पूजते हैं. लेकिन एक तरफ हम पूजा करें और दूसरी तरफ हिंसक वृति रखें, तो ये दोनों विपरीत हो जाते हैं.  आज हम देख रहे हैं कि मानव का धरती और पर्यवरण पर कितना गलत प्रभाव पड़ चुका है, जिससे हम सभी प्रभावित हो रहे हैं. हवा से लेकर पानी तक में जहर घुल रहा है. इस समय जरूरत है हमें कुछ अच्छा करने की, अपनी आवश्यकताओं में कटौती करनी की. Simple living , High thinking का मंत्र बहुत ही सुन्दर है. हम अपने जीवन को जितना सिंपल बना सकें , उतना ही उचित होगा. क्योंकि हम धरती से पहले ही काफी कुछ ले चुके हैं. अब उसके पास हमें और ज्यादा देने की ताकत नहीं है. 

प्राकृतिक साधनों पर दें जोर
हमें आगे के लिए यदि मानव जीवन का कुछ महत्व रखना है, तो हमें धरती का महत्व रखना होगा. मिट्टी को बचाना होगा , पानी को शुद्ध बनाना होगा और फिर साथ ही साथ जितना हमसे हो सके पौधे लगाने होंगे, ताकि ऑक्सीजन मिलती रहे. अब तक हम बेदर्दी से पेड़ों को काटकर पर्यवरण को क्षति पहुंचाते आए हैं, इस पर अब पूरी तरह से रोक लगानी होगी. मुझे लगता है कि भारत के अंदर सूर्य देवता तो 10 मास, 9 मास अपना प्रकाश बिखरते ही रहते हैं, तो क्यों न हम Renewable Energy, Solar Energy का इस्तेमाल करें. ये अकेले सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है. हम अपने घरों पर भी Solar Panel लगा सकते हैं. 

हमें ये करने की जरूरत 
हमने ये नहीं सोचा था कि कभी पानी की कुछ कमी हो सकती है , हमने ये नहीं सोचा था कि कभी Oxygen की कमी हो सकती है. परन्तु जिस तरह से मनुष्य ने व्यवहार किया है, उससे प्रकृति को गंभीर नुकसान पहुंचा है. हम हमेशा धरती से लेते आये हैं, कभी उसे वापस देने के बारे में नहीं सोचा. पूजा-पाठ करने से हमारी धार्मिक आस्था बढ़ती है,  लेकिन धरती के लिए कुछ करने से संपूर्ण मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है. हमें अपनी लाइफ को सिंपल बनाना होगा, पानी को रीसायकल करना होगा, ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने होंगे, तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए सही मायनों में कुछ छोड़ पाएंगे. हमें अपने मन में धरती के हर तत्व, चाहे वो इंसान हो या जीव-जंतु, सभी के लिए प्रेम रखना होगा.
 


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