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आप जानते हैं क्‍या होता है Scope-3 Emission? कार्बन उत्‍सर्जन में है इसकी बड़ी हिस्‍सेदारी

सभी कंपनियों में Scope-3 Emission काफी बड़ा है, लेकिन इसे दूर करना इतना आसान नहीं है क्‍योंकि ना तो प्रोडक्‍ट की क्‍वॉलिटी से समझौता किया जा सकता है और न ही रेग्‍यूलेशन को दरकिनार किया जा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

Business world की BW Sustainability कम्‍यूनिटी के मुंबई में हुए इवेंट में कार्बन उत्‍सर्जन को लेकर हुए सेशन में कई नामचीन शख्सियतों ने भाग लिया. इस प्‍लेटफॉर्म पर सभी ने बताया कि आखिर किस तरह उनकी कंपनियां कार्बन उत्‍सर्जन को कम करने को लेकर काम कर रही हैं. कोई अपने पैकेजिंग पर काम कर रहा है तो किसी ने सोलर एनर्जी को लेकर काम किया है. कुछ समस्‍याएं जो सभी के वहां नजर आई वो ये हैं कि कार्बन उत्‍सर्जन में सबसे बड़ा योगदान कच्‍चे माल का है. 

क्‍या होता है Scope-3 Emission?

Scope-3 Emission कार्बन उत्‍सर्जन में प्रमुख तौर पर एक वो पदार्थ होते हैं जो सीधे कार्बन उत्‍सर्जन करते हैं उन्‍हें स्‍कोप वन कार्बन उत्‍सर्जन कहा जाता है. इसमें डीजल पेट्रोल जैसे तत्‍व आते हैं. जबकि कुछ ऐसे हैं जो अप्रत्‍यक्ष रूप से कार्बन उत्‍सर्जन का कारण बनते हैं. इनमें बिजली आती है. इन्‍हें स्‍कोप 2 कार्बन उत्‍सर्जन कहा जाता है. इसी तरह कार्बन उत्‍सर्जन के जो बाकी कारण होते हैं उन्‍हें स्‍कोप 3 उत्‍सर्जन कहा जाता है. सेशन को  Mynzo Carbon & Solararise की संस्‍थापक तान्‍या सिंघल ने की, जबकि इस सेशन में,Head – Sustainability, Marico बिपिन ओढ़ेकर, Vice President-Sustainability, Past Member of the Executive Board-Skoda Auto Volkswagen India संजय खरे, Chief Sustainability Officer, Grasim Industries सूर्य वल्‍लूरी मौजूद रहे.

 

Scope-3 Emission पर काम करना इतना आसान नहीं
Marico के Head – Sustainability, बिपिन ओढ़ेकर ने कहा अगर हम ये मानते हैं कि पूरी दुनिया एक है तो स्‍कोप 3 हम सभी को कनेक्‍ट करता है. अगर हम सभी लोग इसे इस नजरिए से देखेंगे तो मुझे लगता है कि हम इसका बेहतर सॉल्‍यूशन निकाल पाएंगे. हम समझ पाएंगे कि हमें इस समस्‍या को कैसे सुलझाना है. हमने अपनी सस्‍टेनेबिलिटी की यात्रा को 15-16 में शुरू किया था. वहां से हमने इसे देखना शुरू किया कि आखिर हमारे वहां स्‍कोप थ्री एमिशन सबसे ज्‍यादा कहां हैं. हमारे वहां स्‍कोप 1 और 2 का प्रतिशत केवल 7 प्रतिशत है और बाकी सभी स्‍कोप 3 है.

जो हमने पाया है वो ये है कि 80 प्रतिशत एमिशन कच्‍चे माल से आता है. ये सबकुछ प्रोडक्‍ट फॉर्मूलेशन में इस आधार पर किया जाता है कि आखिर बाजार में कस्‍टमर क्‍या मांग रहा है. रेग्‍यूलेशन क्‍या कहते हैं? अब ऐसे में अगर आप कोई बदलाव करना चाहते हैं तो वो इतना आसान नहीं होता है. किसी भी एक पैरामीटर को बदलने के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इसलिए हमने अपने पैकेजिंग मटीरियल को लेकर काम करना शुरू किया है. हमने पैकेजिंग को सुधारने के लिए 37 प्रोजेक्‍ट किए हैं. 

हमने सोलर एनर्जी से हासिल किया बड़ा लक्ष्‍य 

Skoda Auto Volkswagen India के Vice President-Sustainability, Past Member of the Executive Board संजय खरे ने कहा कि हमारे प्रोडक्‍शन साइट पर 2 प्रतिशत एमिशन होता है. बाकी जो भी 98 प्रतिशत एमिशन होता है वो स्‍कोप 3 एमीशन होता है. 80 प्रतिशत एमिशन टेल पाइप से होता है. 12 प्रतिशत अपस्‍ट्रीम सप्‍लाई चेन से होता है जबकि 5 प्रतिशत रिसाइकिलिंग से होता है. हम इसे लेकर भारत की सड़कों पर बेहद एहतियात बरत रहे हैं. हमने स्‍कोप 3 को कम करने के लिए सबसे पहले स्‍कोप 1 और 2 पर ध्‍यान दिया. आज हमने अपनी सभी छतों पर सोलर पॉवर लगा दी है. इसके कारण होता ये है कि हमने 18 वॉट तक एनर्जी सेव की है. इससे हमारी 60 प्रतिशत तक एनर्जी कॉस्‍ट की बचत हुई है. आज हम जीरो लिक्विड डिस्‍चार्ज कंपनी बन चुके हैं,जीरो वेस्‍ट वाली कंपनी बन चुके हैं. भारत में 70 प्रतिशत इंडस्‍ट्री एसएमई और एमएसएमई सेक्‍टर की है. हम हर स्‍तर पर उसे कम करने को लेकर प्रयास कर रहे हैं. 

हम अपने गुड्स एंड ट्रांसपोर्ट के लिए सल्‍यूशन ढ़ूढ़ रहे हैं.

Grasim Industries के Chief Sustainability Officer, सूर्य वल्‍लूरी ने इस मौके पर कहा कि हमारे स्‍कोप 3 की बात करें तो वो कोई 40 प्रतिशत के आसपास है. हमारी लास्‍ट कार्बन काउंटिंग में जिसे हमने दिखाया भी है उसमें 5.5 मिलियन टन स्‍कोप 3 एमिशन है. आप ये भी जानना चाह रहे होंगे कि आखिर ये कहां से आ रहा है और इसकी क्‍या वजह है. हम टेक्‍सटाइल डोमेन में काम कर रहे हैं, हम फैशन और फाइबर में काम कर रहे हैं, हम कैमिकल में काम कर रहे हैं. ये वो सभी तरह के क्षेत्र हैं जहां हमारी कंपनी काम कर रही है. हमने जब इसकी जांच की तो पाया कि लगभग 50 प्रतिशत स्‍कोप 3 एमिशन कच्‍चे माल से आ रहा है. जबकि 29 प्रतिशत एमीशन हमारे गुडस एंड सर्विसेज से आता है. 17 प्रतिशत ऐसा है जो फिलर से आता है. अब हम अपने गुड्स एंड ट्रांसपोर्ट के लिए सल्‍यूशन ढ़ूढ़ रहे हैं.


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