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डिजाइन और क्रिएटिव इकोनॉमी: भारत में ऑरेंज इकोनॉमी की नई दिशा
लेखक डॉ संजीव विद्यार्थी के अनुसार ऑरेंज इकोनॉमी में एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) का सशक्त इकोसिस्टम शामिल है. यह केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आर्थिक क्षमता के रूप में विकसित किया जा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत में रचनात्मकता और डिजाइन अब केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति नहीं रह गए हैं, बल्कि वे आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं. तेजी से बढ़ती डिजिटल क्रिएटर इकोनॉमी, युवा प्रतिभाओं और नए बिजनेस अवसरों के साथ, ऑरेंज इकोनॉमी देश की आर्थिक संरचना में स्थायी बदलाव ला रही है. इस परिदृश्य में रचनात्मक कौशल, बौद्धिक संपदा और डिज़ाइन सोच को बढ़ावा देना और उन्हें औपचारिक आर्थिक रूप देना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.
ऑरेंज इकोनॉमी: विकास में नया दृष्टिकोण
बजट 2026 भी पारंपरिक आर्थिक सोच से आगे बढ़कर ऑरेंज इकोनॉमी केंद्रित दृष्टिकोण को महत्व देता है. इस दृष्टिकोण में रचनात्मक विचार, बौद्धिक संपदा और सांस्कृतिक पूंजी को औपचारिक मान्यता दी जा रही है और उन्हें दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के प्रमुख आधार के रूप में समर्थित किया जा रहा है.
ऑरेंज इकोनॉमी में एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) का सशक्त इकोसिस्टम शामिल है. यह केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आर्थिक क्षमता के रूप में विकसित किया जा सकता है.
युवा क्रिएटर्स और डिजिटल इकोनॉमी
भारत में 20 से 25 लाख सक्रिय डिजिटल क्रिएटर्स हैं, जो तेजी से उभरती क्रिएटर इकोनॉमी को आगे बढ़ा रहे हैं. यह इकोनॉमी सालाना 350 बिलियन डॉलर से अधिक के उपभोक्ता खर्च को प्रभावित कर रही है और अनुमान है कि 2030 तक यह 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है.
युवा केवल डिजिटल कंटेंट के उपभोक्ता नहीं हैं, बल्कि निर्माता भी हैं. वे संस्कृति को आकार दे रहे हैं, बाजार को गति दे रहे हैं और अपने करियर का निर्माण कर रहे हैं. इस परिदृश्य में ऑरेंज इकोनॉमी कल्पना और पहचान को रोजगार, उद्यमिता और वैश्विक सांस्कृतिक उपस्थिति में बदलने की क्षमता रखती है.
सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय विविधता
भारत की जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक विविधता इस संभावनाओं को और मजबूत बनाती है. युवा क्रिएटर्स डिजिटल परिदृश्य में अपनी अलग और सार्थक पहचान बना सकते हैं. केंद्रीय बजट में कंटेंट लैब्स के लिए किए गए बजटीय प्रावधान भविष्य के क्रिएटर्स और सशक्त इकोसिस्टम निर्माण में निवेश का संकेत देते हैं.
रोजगार और आर्थिक सृजन
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, ऑरेंज इकोनॉमी से जुड़े क्षेत्र जैसे संस्कृति, मीडिया, मनोरंजन और बौद्धिक संपदा रोजगार सृजन, शहरी सेवाओं के विस्तार और पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. ये क्षेत्र बड़े पैमाने पर, विकेंद्रीकृत और लचीले ढंग से रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं, जो पारंपरिक विनिर्माण क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं.
डिजाइन को विकास का केंद्रीय स्तंभ बनाना
बजट 2026 डिजाइन को विकास का केंद्रीय स्तंभ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाता है. यह पेशेवर विशेषज्ञता के सीमित दायरे से डिज़ाइन को मुख्यधारा में लाने की पहल है. डिज़ाइन केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं; यह व्यवस्थाओं, स्थानों और नीतियों को आकार दे सकता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है. ऑरेंज इकोनॉमी पर जोर और पूर्वोत्तर में नए डिजाइन संस्थानों की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं.
डिजाइन शिक्षा और पेशेवर विकास
डिजाइन शिक्षा को इस परिवर्तन का केंद्र बनना होगा. संस्थानों को पारंपरिक, सीमित पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर अंतर्विषयी और प्रैक्टिस-आधारित शिक्षण मॉडल अपनाने होंगे. इसमें डिजाइन, तकनीक, संस्कृति और उद्यमिता का समन्वय होना चाहिए. विश्वविद्यालयों को ऐसे पेशेवर तैयार करने होंगे जो विभिन्न विषयों के बीच सहजता से काम कर सकें और वास्तविक चुनौतियों का समाधान कर सकें.
निष्कर्ष
बजट 2026 सिर्फ एक वित्तीय घोषणा नहीं है, बल्कि सोच में आए बड़े बदलाव का संकेत है. यह नीति, शिक्षा और उद्योग को साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करती है, ताकि एक मजबूत रचनात्मक इकोसिस्टम तैयार हो सके. अगर इसे निरंतर प्रयास और संस्थागत प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाए, तो डिजाइन भारत की अर्थव्यवस्था को दिशा देने के साथ बदलती दुनिया में देश की पहचान को भी सशक्त बना सकता है.
अतिथि लेखक : डॉ संजीव विद्यार्थी, प्रोवोस्ट, अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी
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