✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / COP27: मिस्र में एक नई सुबह, 30 सालों से था इस पल का इंतजार

COP27: मिस्र में एक नई सुबह, 30 सालों से था इस पल का इंतजार

एक भारतीय के रूप में यह गर्व का क्षण है कि पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत स्वेच्छा से कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

- सुधीर मिश्रा और सिमरन गुप्ता
(सुधीर मिश्रा Trust Legal Advocates & Consultants के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर हैं. वहीं सिमरन गुप्ता Trust Legal Advocates & Consultants में अधिवक्ता और सहयोगी हैं.)

शर्म अल-शेख, जिसे 'शांति का शहर' कहा जाता है, वह दुनिया के लिए जलवायु न्याय और जलवायु इक्विटी के लिए आशा की किरण वाला शहर बन गया. दुनिया ने जलवायु मुआवजा कोष पर आम सहमति के लिए बहुत लंबा इंतजार किया है और कई गहन वार्ताओं और चर्चाओं के बाद, रविवार को मिस्र में लाल सागर रिसॉर्ट शहर में COP27 (पार्टियों का 27वां सम्मेलन) के परिणामस्वरूप एक हानि और क्षति निधि (L&D) के निर्माण के साथ एक ऐतिहासिक समझौते को सील कर दिया गया.

इस मिशन के लिए पिछले 30 सालों से लगातार प्रयास किया जा रहा था, लेकिन कुछ अमीर और विकसित देशों द्वारा लंबे समय तक इसमें बाधा उत्पन्न की गई, पर आखिरकार तमाम बाधाओं को पार करते हुए मिस्र में इस मिशन को COP27 में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया.

मिस्र की वार्ताओं में 'पर्यावरण मुआवजा' की जो अवधारणा चर्चा का विषय बनी थी, वह दुनिया भर के कई देशों में पहले से ही एक बहुत ही स्थापित तंत्र है. भारत की ही बात कर लें तो पर्यावरण की रक्षा के लिए 1996 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया था. सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार 'Polluter Pays Principle' को लागू किया, जिसमें कहा गया कि प्रदूषण के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रदूषक ही पूरी तरह उत्तरदायी होगा.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू सिद्धांत में कहा गया कि प्रदूषक को न केवल प्रदूषण के शिकार लोगों को हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी, बल्कि इससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की बहाली के लिए भी क्षतिपूर्ति करनी होगी. इसके बाद, जलवायु मुआवजे की अवधारणा को वेल्लोर नागरिक कल्याण फोरम बनाम भारत संघ [(1996) 5 एससीसी 647] के फैसले में आगे परिभाषित और पुष्टि की गई कि भारत के पर्यावरण कानून के अंतर्गत प्रदूषक सिद्धांत के अनुसार भुगतान करने के लिए बाध्य है.

जलवायु मुआवजे की इसी अवधारणा के विस्तार के रूप में, पहली बार, वैश्विक स्तर पर एक समर्पित कोष के रूप में हानि और क्षति कोष बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में जलवायु संबंधी नुकसान और नुकसान से निपटने के लिए विकासशील देशों की मदद हो सके.

सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों (CBDR) की अवधारणा के आधार पर, 2015 के पेरिस समझौते में भी एक मौलिक सिद्धांत पर सहमति हुई थी कि अमीर देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने का बड़ा बोझ उठाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने दशकों से अधिक ग्रीन-हाउस गैसों का उत्सर्जन किया है. इसका परिणाम विकासशील या अल्प विकसित देशों को भुगतना पड़ता है.

वास्तव में, रविवार को जलवायु न्याय के लिए मिस्र की घोषणा एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका और कई अन्य अमीर देश मूल रूप से विकसित देशों द्वारा उच्च उत्सर्जन के कारण कमजोर देशों को मुआवजा देने के खिलाफ थे.

विकसित देश पर्यावरण के नुकसान के लिए अपनी जिम्मेदारी से दूर भागना चाहते थे, इसलिए COP27 में शामिल विकसित देश उच्च आय वाले देशों और चीन-भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को शामिल करने पर जोर दे रहे थे. साथ ही वे लाभार्थियों में केवल सबसे कमजोर देशों तक ही सीमित करना चाहते थे.

इसी क्रम में विकासशील और विकसित देशों के बीच भेदभाव भी देखने को मिला. संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ चीन को इस तरह के किसी भी कोष में बड़े योगदानकर्ता बनने पर जोर दे रहे थे. उनका मानना है कि चीन दुनिया में सबसे बड़े मौजूदा उत्सर्जक और ग्रीन-हाउस गैस का दूसरे सबसे बड़ा उत्सर्जक है.

23 सदस्यों वाली एक समिति (विकसित देशों से 10 और विकासशील देशों से 13) अब इसके तौर-तरीकों पर फैसला करेगी और फंड और उसका भुगतान कैसे किया जाएगा, उसके सोर्स क्या रहेंगे, इस बारे में सवालों का जवाब देगी, जिसे नवंबर, 2023 में UAE में होने वाले COP28 में आगे माना जाएगा.

इसके अलावा, भारत के व्यावहारिक सुझावों द्वारा निर्देशित, COP27 ने सभी जीवाश्म ईंधनों को परिवर्तित करने पर भी सहमति व्यक्त की, न कि सिर्फ कोयले की. COP26 में इस सुझाव की कमी थी. इसे अमेरिका और यूरोपीय संघ सहित लगभग 80 देशों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन कुछ विकसित देशों के तेल और गैस को शामिल करने के विरोध का भी सामना करना पड़ा. हालांकि यह समझौता विफल हो गया और इसमें सभी जीवाश्म ईंधन पर एक एक राय नहीं बन पाई, जैसा कि भारत और कई अन्य देशों द्वारा इसे प्रस्तावित किया गया था.

COP27 का टैगलाइन - कार्यान्वयन के लिए एक साथ (Together for implementation) शुरू में इस बात पर ध्यान केंद्रित करना था कि प्रतिबद्धताएं वास्तविकता में कैसे परिवर्तित होंगी. कई लोग COP27 पर विचार कर रहे हैं और इसे भारत के दृष्टिकोण से 'एक चूका हुआ अवसर' कह रहे हैं. आपको बता दें कि इस जीत में COP27 का स्थायी जीवन शैली मिशन का समर्थन और ऊर्जा संक्रमण के संबंध में एक खंड शामिल है, जो विशेष जीवाश्म ईंधन को अलग नहीं करता है.

एक भारतीय के रूप में यह गर्व का क्षण है कि पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत स्वेच्छा से कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, सभी जीवाश्म ईंधन का त्याग कर रहा है, गैर-पारंपरिक ऊर्जा को नहीं अपना रहा है और मिस्र में इस बात पर जोर दे रहा है कि हमारे ग्रह के पास अब और धैर्य नहीं है.

Disclaimer: ऊपर दिए गए लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखकों के हैं और जरूरी नहीं कि वे इस पब्लिशिंग हाउस के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हों. लेखक ने यह लेख अपनी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार लिखा है. उनका बिल्कुल ऐसा इरादा नहीं है कि वे किसी एजेंसी या संस्था के आधिकारिक विचारों, दृष्टिकोणों या नीतियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हों.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

विसर्जित भारत

2047 तक विकसित, दिवाली 2026 तक विसर्जित

13 hours ago

भारतीय दीवार पर किसका होगा कब्जा?

जैसे-जैसे बिरला ओपस, जेएसडब्ल्यू ड्यूलक्स और पिडिलाइट की हैशा स्थापित दिग्गजों को चुनौती दे रही हैं, त्योहारी सीजन यह दिखाएगा कि क्या वितरण क्षमता, डीलर अर्थशास्त्र और पेंटर का प्रभाव लंबे समय से चली आ रही उपभोक्ता आदतों को बदल सकता है.

13 hours ago

खाद्य सुरक्षा से किसान सुरक्षा तक: 2014 के बाद भारत की कृषि नीति के ढांचे में कैसे आया बदलाव

लेखक बंशीलाल गुर्जर और नीरज सहरावत के अनुसार, इस बदलाव की सबसे सीधी अभिव्यक्ति प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में दिखाई देती है. पीएम-किसान पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से सालाना 6,000 रुपये की आय सहायता प्रदान करता है.

1 day ago

HDFC बैंक के पहले बाहरी CEO होंगे अनूप बागची, सामने होंगी ये 6 बड़ी प्राथमिकताएं

जैसे-जैसे अनूप बागची 27 अक्टूबर को एचडीएफसी बैंक की कमान संभालने की तैयारी कर रहे हैं, भरोसा बहाल करना, विकास और लाभप्रदता को मजबूत करना, ग्राहक अनुभव में सुधार करना और प्रतिभाओं को एक दिशा में लाना उनके शुरुआती एजेंडे को परिभाषित करेगा.

6 days ago

मोदी @76: भारत की विकास गाथा के केंद्र में उद्योग और उद्यमिता

इस लेख में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन और भारत को एक मजबूत विनिर्माण, नवाचार और निर्यात अर्थव्यवस्था में बदलने पर विचार रखें हैं.

17-September-2026


बड़ी खबरें

भारतीय दीवार पर किसका होगा कब्जा?

जैसे-जैसे बिरला ओपस, जेएसडब्ल्यू ड्यूलक्स और पिडिलाइट की हैशा स्थापित दिग्गजों को चुनौती दे रही हैं, त्योहारी सीजन यह दिखाएगा कि क्या वितरण क्षमता, डीलर अर्थशास्त्र और पेंटर का प्रभाव लंबे समय से चली आ रही उपभोक्ता आदतों को बदल सकता है.

13 hours ago

अडानी समूह पर शॉर्ट-सेलिंग हमले की फुसफुसाहट

राजीव जैन के GQG ने ITC में अपनी हिस्सेदारी बेच दी. डीलिंग रूम में चर्चा है कि कुछ ऑफशोर खिलाड़ियों को इसका पहले से अंदाजा था और उन्होंने पहले ही फंड की प्रमुख होल्डिंग्स में शॉर्ट पोजीशन बना ली थी. एलन मस्क की X पोस्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में बिकवाली को और बढ़ा दिया.

11 hours ago

विसर्जित भारत

2047 तक विकसित, दिवाली 2026 तक विसर्जित

13 hours ago

2037-38 की जरूरत की 84% हुई कोल्ड स्टोरेज क्षमता, पैक-हाउस और रीफर वाहनों की भारी कमी: रिपोर्ट

रिपोर्ट में प्रमुख बागवानी उत्पादन केंद्रों के आसपास बहु-वस्तु और अलग-अलग तापमान पर काम करने वाली सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है. इसके साथ भरोसेमंद रेफ्रिजरेटेड परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.

14 hours ago

डीजल एक्सपोर्ट एक साल के टॉप पर, सितंबर में भारत से रोजाना 6.2 लाख बैरल का निर्यात; यूरोप सबसे बड़ा बाजार

सितंबर में डीजल निर्यात में आई तेजी ऐसे समय में हुई है जब यूरोप और अमेरिका समेत कई बाजारों में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं.

17 hours ago