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BW Security: 'दोधारी तलवार की तरह है AI, इसे रेगुलेट करना जरूरी'  

AI को अब रेगुलेट करने की जरूरत है. आप यह नहीं कह सकते कि हम इस टेक्नोलॉजी को 10 सालों तक विकसित होने देंगे और फिर नए कानूनी फ्रेमवर्क के साथ सामने आएंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Businessworld द्वारा दिल्ली में #BWSecurity40Under40Awards समारोह आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में सिक्योरिटी सेक्टर की दिग्गज हस्तियां शिरकत कर रही हैं और अपने विचार व्यक्त कर रही हैं. इस मौके पर Chief Executive, AI Law Hub & Advocate, Supreme Court of India डॉ पवन दुग्गल (Dr Pavan Duggal) ने साइबर सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा कीं. उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल अच्छे-बुरे दोनों कामों के लिए किया जा रहा है, लिहाजा कुछ कदम उठाने की जरूरत है.   

जल्दी कदम उठाना जरूरी
पवन दुग्गल ने कहा - AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मौजूदा समय में सबसे बड़ा Buzzword है. लिहाजा हमें साइबर सिक्योरिटी के संबंध में AI को समझना होगा. चलिए राम मंदिर से शुरू करते हैं, राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने वाली है. सरकार ने इसकी सुरक्षा के लिए AI का व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया है. ये एक उदाहरण है, आपको यह बताने का कि AI कितने बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी में इस्तेमाल की जा रही है. यदि आपको लगता है सिक्योरिटी प्रोफेशनल के तौर पर AI केवल आपके लिए है, तो ऐसा नहीं है. AI उनके लिए भी है जो सिक्योरिटी ब्रीच करना चाहते हैं. AI से हर सेक्टर प्रभावित है, बड़े पैमाने पर इसका गलत इस्तेमाल भी हो रहा है. लिहाजा जितनी जल्दी हम यह अहसास कर लेंगे कि हमें इससे निपटना है, उतना ही अच्छा है. 

आने वाली है सुपर इंटेलिजेंस
डॉक्टर दुग्गल ने कहा कि भारत में यह चिंता बढ़ रही है कि AI मौजूदा कानूनों के मानदंडों में कवर नहीं है, इसलिए इस दिशा में काम करने की जरूरत है. चैटGPT बनाने वाली कंपनी OPenAI ने पिछली जुलाई को एक नया प्रोजेक्ट लॉन्च किया था - 'सुपर इंटेलिजेंस अलाइनमेंट'. इसके तहत अगले 4 सालों में OPenAI एक नए प्रकार के सुपर इंटेलिजेंस के साथ आएगी, जो ह्यूमन इंटेलिजेंस को भी पीछे छोड़ देगी. इसलिए इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, OPenAI एक नई क्रांतिकारी शुरुआत कर दी है. उन्होंने आगे कहा कि AI, डिजिटल सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. साथ ही ये फिजिकल वर्ल्ड सिक्योरिटी मैकेनिज्म से भी कनेक्टेड है. AI बता सकती है कि फिजिकल वर्ल्ड सिक्योरिटी मैकेनिज्म को कैसे और मजबूत किया जा सकता है. 

गलत इस्तेमाल के कई उदाहरण
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पवन दुग्गल ने कहा कि AI को अब रेगुलेट करने की जरूरत है. आप यह नहीं कह सकते कि हम इस टेक्नोलॉजी को 10 सालों तक विकसित होने देंगे और फिर नए कानूनी फ्रेमवर्क के साथ सामने आएंगे. AI एक दोधारी तलवार है. ऐसे कई उदाहरण हैं जो बताते हैं कि इसे ह्यूमन इंटरेस्ट के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि अगले 4 सालों में सुपर इंटेलिजेंस आने वाली है, जो ह्यूमन इंटेलिजेंस को भी पीछे छोड़ देगी, तो हमें अपना होमवर्क अभी करना होगा. फेशियल रिकॉग्निशन के बढ़ते प्रयोग पर उन्होंने कहा - ज्यादा से ज्यादा देश आज फेशियल रिकॉग्निशन पर जोर दे रहे हैं. हवाई यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाला ऐप DIGI Yatra भी फेशियल रिकॉग्निशन की सुविधा प्रधान करता है. लेकिन जब आप फेशियल रिकॉग्निशन इस्तेमाल करके AI के साथ कंबाइन करते हैं, तो बहुत सी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है. क्योंकि आपको नहीं पता कि आपका डेटा कहां लोकेटेड है और कौन उसे एक्सेस कर सकता है.

अमेरिका में बनाया गया है कानून
AI पर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि कोरिया की बात करें, तो वहां लोग मनुष्यों से ज्यादा डिजिटल अवतार से अधिक बातें करते हैं. जिसका मतलब है कि साइबर सुरक्षा चिंता का विषय है. पिछले एक साल में हमने देखा है कि AI का इस्तेमाल साइबर अपराधियों को सशक्त बनाने के लिए भी किया जा रहा है, लिहाजा AI डेवलपर, AI सर्विस कंपनियों की भूमिका पर नजर रखी जानी चाहिए और उनके अधिकार, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को परिभाषित किया जाना चाहिए. वैश्विक स्तर पर इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं. उदाहरण के तौर पर अमेरिका का Illinois राज्य देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने AI पर कानून पारित किया है. न्यूयॉर्क भी AI पर कानून लेकर आया है. 


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